नई दिल्ली. देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) अरविंद सुब्रमण्यम आगामी 26 जुलाई को अपना पद छोड़कर वापस हार्वर्ड यूनिवर्सिटी लौटने वाले हैं. अपनी पारिवारिक प्रतिबद्धताओं का हवाला देते हुए उन्होंने बीते दिनों मुख्य आर्थिक सलाहकार का पद छोड़ने की बात कही थी. अरुण जेटली ने अपने फेसबुक पोस्ट के हवाले से सुब्रमण्यम के कार्यकाल को शानदार बताते हुए देश को इस बात की जानकारी दी. 59 वर्षीय सुब्रमण्यम ने नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद वर्ष 2014 में मुख्य आर्थिक सलाहकार का पद संभाला था. देश की आर्थिक नीतियों और व्यवस्था से जुड़े इस पद को छोड़ने से पहले अरविंद सुब्रमण्यम ने हमारी सहयोगी वेबसाइट डीएनए से खास बातचीत की. मोदी सरकार द्वारा विभिन्न नीतियों को लागू करने के बाद उन पर उठे सवालों को लेकर दिए जवाब में उन्होंने कहा कि आर्थिक सलाहकार का काम सलाह देना है. वह अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए सरकार को सलाह देता है. इसका नतीजा क्या होता है, यह देखना राजनेताओं का काम है, आर्थिक सलाहकार का नहीं.

कार्यकाल पूरा होने से पहले ही मोदी सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार सुब्रह्मण्यम का इस्तीफा

जीएसटी और ‘जाम’ को बताया बड़ी सफलता
डीएनए के साथ साक्षात्कार में अरविंद सुब्रमण्यम ने कहा कि कई योजनाएं हैं, जो सफलता की कहानी कहती हैं. मुख्य आर्थिक सलाहकार के तौर पर अपने कार्यकाल को याद करते हुए सुब्रमण्यम ने कहा कि मोदी सरकार ने गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST), ‘जाम’ (जन-धन योजना, आधार और मोबाइल) जैसी स्कीमें लॉन्च की, जो अर्थव्यवस्था को सुधारने में मील का पत्थर साबित हुईं. इसके अलावा उन्होंने कहा कि सरकार ने यूनिवर्सल बेसिक इनकम जैसे आइडिया पर काम किया, यह भी बड़ी सफलता है. रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन और नीति आयोग के प्रमुख अरविंद पनगढ़िया के बाद, मुख्य आर्थिक सलाहकार द्वारा सरकार का पद छोड़ने के सवाल पर उन्होंने कहा, ‘मैं इसलिए पद नहीं छोड़ रहा हूं कि सरकार मेरे काम से खुश नहीं है. मुझे तो एक साल पहले ही जाना था, मेरा कॉन्ट्रैक्ट समाप्त हो गया था. लेकिन उस वक्त मुझसे कहा गया कि आप एक साल और रुकें. लेकिन अब मेरे जाने का समय आ गया है. मेरी कुछ निजी प्रतिबद्धताएं हैं, इसलिए जा रहा हूं. अन्य लोगों के जाने की तुलना में मेरा मामला अलग है.’

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जीएसटी का 28% वाले स्लैब में सुधार की गुंजाइश
अरविंद सुब्रमण्यम ने मोदी सरकार के सबसे महत्वाकांक्षी कर सुधार, जीएसटी को हालांकि सरकार की सफलता के रूप में गिनाया, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि इसमें अभी और सुधार की गुंजाइश है. खासकर जीएसटी के तहत कई सामान पर लगने वाली 28 प्रतिशत की दर को कम करने के संबंध में उन्होंने कहा, ‘हां, मुझे लगता है कि 28 प्रतिशत की दर बहुत ज्यादा है. इसमें अभी भी सुधार करने की गुंजाइश बाकी है. लेकिन एक बार जब राजस्व मिलना स्थिर हो जाए, फिर इस काम को किया जाना चाहिए.’ जीएसटी प्रणाली को शानदार और डायनामिक बताते हुए मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि ज्यों-ज्यों हम आगे बढ़ेंगे, इसके बेहतर परिणाम हमें दिखने लगेंगे. अलबत्ता इसमें सुधार संबंधी मांगों पर सहमति जताते हुए सुब्रमण्यम ने कहा कि कुछ चुनौतियां हैं, जैसे- कर भुगतान का और आसान तरीका, फॉर्म का सरलीकरण, निर्यातकों के रिफंड की व्यवस्था आदि. इन सभी में समय के साथ सुधार की गुंजाइश है.

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मैं राजनीतिक निर्णयों का अनुमान नहीं लगा सकता
बतौर मुख्य आर्थिक सलाहकार, अपने किसी फैसले पर पछतावे या उसे वापस लेने से संबंधित डीएनए के सवाल पर अरविंद सुब्रमण्यम ने दोटूक शब्दों में अपनी बात रखी. डीएनए को दिए साक्षात्कार में उन्होंने कहा, ‘कई काम ऐसे होते हैं जो किए जाने के बाद लगता है कि और बेहतर तरीके से अमल में लाए जा सकते थे. कई बार ऐसा भी लगता है कि यह काम नहीं किया जाना चाहिए था. ऐसा सभी सरकारों के साथ होता है. कई बार आपको अपने फैसलों के लिए पछताना पड़ता है. लेकिन यहां मैं कहना चाहता हूं कि एक आर्थिक सलाहकार या टेक्नोक्रेट के रूप में मैं राजनीतिक निर्णयों का अनुमान नहीं लगा सकता. राजनेताओं को ऐसे निर्णयों का नतीजा भुगतना पड़ता है, मुझ जैसे लोगों को नहीं. मेरा काम सलाह देना है. मैं सलाह दूंगा. इसके बाद हार्वर्ड में पढ़ाने के लिए चला जाऊंगा. इस तरह से देखें तो मेरा काम बहुत आसान है.’