मध्य राजस्थान वह इलाका है जहां साल 2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस 36 में से एक भी सीट नहीं जीत पाई थी. लेकिन, इस बार सचिन पायलट को सीएम फेस देखते हुए यहां समीकरण बदले-बदले नजर आ रहे हैं. दौसा से लेकर अजमेर और टोंक तक सचिन पायलट के साथ-साथ अशोक गहलोत का असर दिख रहा है. स्थिति यहां तक है कि जयपुर की सीटें जिसे बीजेपी का गढ़ कहा जाता था, वहां भी कांग्रेस मजबूत स्थिति में दिख रही है.

इस इलाके की 20 सीटें तो ऐसी हैं जहां कांग्रेस एकतरफा बढ़त के साथ दिख रही है. लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली के बाद कई सीटों पर बीजेपी वापसी करती दिख रही है. रिपोर्ट के मुताबिक, 11 ऐसी सीटें हैं जिनपर बीजेपी के पक्ष में माहौल बनने लगा है. दौसा, अजमेर के साथ-साथ टोंक में टिकट वितरण के बाद कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ी हैं. हालांकि, बागियों से बीजेपी और कांग्रेस दोनों परेशान हैं. साल 2013 के चुनाव में 4 सीटों पर अन्य ने जीत हासिल की थी.

टोंक
टोंक की बात करें तो सचिन पायलट के यहां से चुनाव लड़ने के साथ ही इसपर सबकी नजर बनी हुई है. दूसरी तरफ बीजेपी ने अपने एक मात्र मुस्लिम कैंडिडेट को यहीं से उतार दिया है. हालांकि, यहां पहले दिन से सचिन पायलट लीड लेते दिख रहे हैं. पायलट का असर है कि देवली-उनियारा और निवाई सीट पर भी कांग्रेस मजबूर स्थिति में दिख रही है. दूसरी तरफ मालपुरा कांग्रेस बागियों से परेशान दिख रही है. सबसे बड़ी बात है कि यह एक ऐसा जिला है जहां आरएसएस का प्रभाव माना जाता है. लेकिन पायलट के चेहर ने बीजेपी के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं.

दौसा
दौसा पहले राजेश पायलट को लेकर चर्चित रहा है. शुरुआत में तो यहां कांग्रेस का पड़ला भारी दिख रहा था, लेकिन पीएम मोदी की रैली के बाद मुकाबला कड़ा हो गया है. किरोड़ीलाल मीना के बीजेपी छोड़ कांग्रेस ज्वाइन करने का भी असर दिख रहा है. हालांकि, उनके भतीजे राजेंद्र मीना की सीट भी फंसती दिख रही है.

जयपुर और अजमेर
जयपुर पिछले दो दशक से बीजेपी का गढ़ माना जाता रहा है. लेकिन इस बार कांग्रेस लड़ाई में आ गई है. कोटपूतली. विराटनगर, जवारामगढ़, हवामहल, विधाधर नगर, सिविल लाइन्स, किशनपोल, बगरू और चाकसू ऐसी सीटें हैं जो बीजेपी की गढ़ रही हैं, लेकिन कांग्रेस से इस बार मजबूत चुनौती मिल रही है. बीजेपी ने पिछली बार 19 में से 16 सीटें जीती थीं और कांग्रेस को एक ही सीट मिली थी. लेकिन इस बार समीकरण बदल सकते हैं. दूसरी तरफ अजमेर में कांग्रेस बागियों से परेशान है. बीजेपी उत्तर और दक्षिण सीट पर मजबूती से लड़ रही है. केकड़ी और नसीराबाद में कांग्रेस बढ़त बनाते दिख रही है लेकिन किशनगढ़ और मसूदा में बागियों ने बीजेपी और कांग्रेस दोनों को परेशान किया है. पुष्र और ब्यावर में कड़ा मुकाबला है.