Corona Virus in India (लखनऊ): पूरी तरह बंद कमरा. इसमें एक खिड़की नहीं. बाहरी हवा आने को एक सुराख तक नहीं. 22 दिन तक इसी तरह एक कमरे में बंद रहा. घुटन, डर और उम्मीद के बीच मोबाइल साथी रहा. फ़ोन पर साथी और परिजन हिम्मत बंधाते रहे. ये आपबीती है 22 दिन तक जिंदगी और मौत के बीच झूलने वाले कीर्ति शर्मा की. डॉक्टर्स की अथक मेहनत और अपनी हिम्मत से युवक ने खुद को कोरोना से मुक्त कर लिया है. कीर्ति अपनी जिंदगी के इन 22 दिनों को बेहद त्रासदी पूर्ण बताते हैं. कीर्ति ने बताते हैं कि “लंदन से भारत आने के एक दिन पहले मैंने वहां खरीदारी करने गया था. वहां पर भीड़-भाड़ होंने के कारण मैं Corona Virus की चपेट में आ गया था. हालांकि मेरे जानने वालों में यह किसी को नहीं था. पता नहीं मैं इसकी चपेट में कैसे आ गया.” Also Read - Alert: AIIMS निदेशक की चेतावनी- हमें सावधान रहने की जरूरत, कोरोना के तीसरे लहर की हो चुकी है शुरुआत?

उत्तर प्रदेश के लखनऊ (Corona Virus in Lucknow) के रहने वाले कीर्ति शर्मा लंदन में बीबीए की पढ़ाई कर रहे हैं. वह 17 मार्च को लंदन से लखनऊ लौटे. कीर्ति बताते हैं कि “मुझे रास्ते में कुछ हल्का बुखार का अहसास हुआ. घर पहुंचते ही जुकाम और गले में खराश हो गई थी. उन्हें इस बीमारी के लक्षणों के बारे में पहले ही पता था इसलिए घर पहुंचते ही उन्होंने अपने परिजनों को सर्तक करके मास्क पहन कर एक कमरे में क्वारंटाइन कर लिया. इसके बाद 18 मार्च को जांच के लिए केजीएमयू (KGMU) पहुंचा. यहां डाक्टरों से जांच के दौरान पता चला कि मैं कोरोना पॉजिटिव हूं. मैं घबरा गया, लेकिन डॉक्टरों ने मुझे हिम्मत दी. मेरा हौसला बढ़ाया कि ये ठीक हो सकता है. फिर मुझे आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कराया गया. Also Read - Recovery After Coronavirus: कोविड के बाद हो रहीं नई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं, चिंता में डॉक्टर्स

कीर्ति शर्मा ने बताया कि “जिस वार्ड में भर्ती था. वह कमरा बिल्कुल पूरी तरह से सील था. खिड़की न होने के कारण वहां प्राकृतिक हवा भी नहीं मिलती थी. न कोई अन्य साधन थे. संक्रमण के कारण बाहर भी नहीं निकल सकते थे. ऐसे में अपने अंदर की मजबूती बहुत जरूरी होती है. इस दौरान कई बार नकारात्मक विचार भी आते हैं. इन सब के बीच धैर्य नहीं छोड़ना चाहिए. इलाज के दौरान जो दवाएं मिली थी. कभी-कभी वह शरीर के अनुकूल नहीं होती है इसके कारण उल्टी, चक्कर और पेट दर्द हुआ था, लेकिन धीरे-धीरे फायदा देने लगती हैं, लेकिन सबका तोड़ सिर्फ हिम्मत और हौसला ही है. पौष्टिक आहार भी बहुत जरूरी है. हां, इस दौरान चिकित्सकों ने बहुत मदद की है. वह हमारे लिए 24 घण्टे उपलब्ध रहते थे. इस दौरान मैं अपने परिवार के किसी भी सदस्य से नहीं मिल पाया. 21 दिन में मोबाइल ही मेरा साथी रहा है. इस दौरान ऑनलाइन मूवी और घर वालों से बातचीत होती रहती थी. 22वें दिन में जब मैंने ताजी हवा ली है तो मुझे एक नया अहसास मिला. Also Read - Mumbai: सोशल मीडिया पर छाया हुआ है 14 साल का चायवाला बच्चा, जानिए उसकी कहानी

कीर्ति के मुताबिक इंग्लैण्ड में कोरोना आने के बाद भी बहुत चीजों में छूट थी, जिस कारण वहां संक्रमण बढ़ता गया. भारत में लॉकडाउन जैसी प्रक्रिया अपनाई गई है. इससे ही यह नियंत्रित होगा. सबसे ज्याद जरूरी है कि खुद को संयमित रखना और चिकित्सकों और गाइडलाइन के अनुसार चलना. दवा का समय से सेवन करना भी अनिवार्य होता है. इसी का नतीजा है जो मैं कोरोना को मात देकर लौटा हूं.