कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया है. पहले इस वायरस की चपेट में चीन आया, जिसके बाद इस वायरस ने इटली को अपनी चपेट में लिया और अब अमेरिका और भारत समेत कई देश इसकी चपेट में आ गए हैं. सरकारें इस वायरस से अपने नागरिकों की जान बचाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रही हैं. इस महामारी से बचने का केवल एक ही तरीका है- लोगों से दूरी. लेकिन आपको संभवतः यह पता नहीं होगा कि दुनिया में कोरोना जैसी महामारी पहली बार नहीं आई है. इस प्रकृति का अपना तरीका कहें या फिर कुछ और… लेकिन दुनिया को हर 100 साल में कोरोना जैसी महामारी का सामना करना पड़ा है. ये सिलसिला पिछले 400 सालों से चलता आ रहा है. आइए जानतें हैं 400 सालों से लोगों को किन-किन महामारियों का सामना करना पड़ा है. Also Read - Breaking News: असम में भूस्‍खलन से 20 लोगों की मौत

प्लेग-
फ्रांस के एक छोटे से शहर मॉर्साइल में 1720 में फैली प्लेग महामारी ने 1 लाख से ज्यादा लोगों की जान ले ली. प्लेग फैलते ही कुछ महीनों में 50 हजार लोगों की मौत हो गई. बाकी 50 हजार लोग अगले दो सालों में मारे गए. बता दें कि उस समय लोगों को इस बीमारी का पता ना होने के कारण यह कई शहरों और प्रांतों में फैलती गई और लोगों को अपनी चपेट में लेती गई. धीरे-धीरे ये बीमारी बाकी देशों में भी फैली. इसने माल्टा में 1679, विएना में 76,000 प्राग में 83 हजार लोगों की जान ली. यह महामारी इतनी भीषण थी कि इससे 10,000 की आबादी वाले ड्रेस्डेन नगर में 4,397 नागरिक इसके शिकार हो गए. Also Read - मध्य प्रदेश: कोरोना संक्रमण का आंकड़ा 8,283 तक पहुंचा, 385 में सबसे ज्यादा मौतें इंदौर में

बताते चले कि प्लेग ने भारत पर भी आक्रमण किया. इस बीमारी से संपूर्ण भारत में दहशत क माहौल पैदा हो गया. यह महामारी पाली से मेवाड़ पहुंची, फिर मेवाड़ में इस महामारी ने इतना तांडव मचाया कि लोग डरने लगे. ये चूहों से फैली महामारी थी. इस महामारी से हालात यह थे कि अस्पताल पहुंचने से पहले भी लोगों की मौत हो जाया करती थी. Also Read - लॉकडाउन के चलते इस राज्य के मंदिरों को हुआ 600 करोड़ का नुकसान, सालाना आय में आई बड़ी कमी

एक सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, इस महामारी से 1800 करोड़ का नुकसान हुआ. प्लेग एक ऐसा संक्रमण था जो जानवरों से इंसानों में पहुंचता है. इस महामारी से बचने के लिए गुजरात के सूरत में हजारों लोगों ने पलायन किया था. पलायन की शुरुआत गुजरात के सूरत से शुरू हुई थी. यहां रहने वाले लोग जब प्लेग की चपेट में आकर मरने लगे तो यूपी और बिहार से आकर यहां बसने वाले लोग भी अपने घरों को पलायन करने लगे. इस महामारी से देखते ही देखते सूरत से 25 फीसदी आबादी बाहर चली गई. उस दौर में भी लोगों को आइसोलेश की हिदायत दी गई थी.

कॉलेरा-

प्लेग महामारी के 100 साल बाद 1820 में एशियाई देशों में कॉलेरा मे महामारी का रूप लिया. इस महामारी ने जापान, भारत, बैंकॉक, मनीला, ओमान, चीन, सीरिया आदि देशों तो अपनी चपेट में ले लिया. बता दें कि कॉलेरा की वजह से सिर्फ जावा में 1 लाख लोगों की जान चली गई. इस महामारी से सबसे ज्यादा मौतें थाईलैंड, इंडोनेशिया और फिलीपींस में हुई थी.

स्पैनिश फ्लू

कॉलेरा महामारी के 100 साल बाद 1920 में स्पैनिश फ्लू ने अपने पैर पसारे. बताया जाता है कि इस महामारी की वजह से पूरी दुनिया में 1.70 करोड़ से 5 करोड़ लोगों की जान चली गई थी. माना जाता है कि यह वायरस अमेरिका से फैला था. उस समय विश्व युद्ध का समय था और यह फ्लू अमेरिकी सैनिकों से यूरोप में फैला था. भारत में स्पैनिश फ्लू को बॉम्बे फीवर के नाम से जाना गया. एक अनुमान के मुताबिक भारत में इस महामारी से लगभग एक से दो करोड़ लोगों की जान चली गई थी. उस समय इस महामारी की कोई वैक्सीन ना होने के चलते सरकार ने लोगों को आइसोलेट करके वायरस को काबू में पाया था.

कोरोना वायरस

वहीं, एक बार फिर 100 साल पुराना इतिहास दोहराया गया है और 2020 में कोरोना वायरस महामारी सामने आई है. चीन से फैले इस वायरस के मामले दस लाख से अधिक हो गए हैं, जबकि 51 हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. एएफपी द्वारा गुरुवार रात जारी आँकड़ों के अनुसार यह जानकारी सामने आई है. दुनियाभर के 188 देशों में कोरोना वायरस से संक्रमण (कोविड-19) के कम से कम 10,00,036 मामले दर्ज किए गए हैं और अब तक 51,718 लोगों की मौत हो चुकी है. चीन से फैले कोरोन वायरस का सबसे ज्यादा असर इटली के बाद अब अमेरिका में देखा जा रहा हैं. इस खतरनाक वायरस ने अमेरिका को बेबस कर दिया है. यहां एक दिन में मरने वालों की संख्या 1169 हुई. यह जानकारी एएफपी न्यूज एजेंसी ने दी. इसी के साथ अमेरिका में मौत का आंकड़ा भी 6000 को पार कर गया है. अब तक यहां कोरोना वायरस के चलते 6070 मौतें हो चुकी हैं.