नई दिल्ली: दुनियाभर में कोरोना वायरस के कारण कोहराम मचा हुआ है. पूरी दुनिया में इससे 3 लाख से अधिक लोगों की मौत हो गई, वहीं 48 लाख से अधिक लोग कोरोना से संक्रमित पाए गए हैं. इस हमारे देश में इलाज के द्वारा ठीक किए जा रहे लोगों का आंकड़ा भी बाकी देशों की अपेक्षा कहीं ज्यादा है. यही नहीं अन्य देशों में भी कोरोना का इलाज कर लोगों को ठीक किया जा रहा है. लेकिन अभी तक कोरोना का वैक्सीन नहीं बनाया जा सका है बावजूद इसके लोग कैसे ठीक हो रहे हैं. यह सवाल कई लोगों के मन में होगा, तो आज हम आपको उन दवाओं के नाम बताने वाले हैं जिनक जरिए लोगों को इलाज कर ठीक किया जा रहा है. बता दें कि फिलहाल कई देशों में कोरोना वैक्सीन का ट्रायल शुरू हो चुका है लेकिन अभी इसमें काफी वक्त लगने वाला है. Also Read - कोरोना मामले पर स्वास्थ्य मंत्रालय का बयान- प्रतिबंधों में ढील के कारण 5 राज्यों में बढ़ें संक्रमण के मामले

पहली दवा का नाम है रेमडेसिवीर. इस दवा का इस्तेमाल कोरोना के मरीजों को ठीक करने के लिए किया जा रहा है. इस दवा को कोरोना के इलाज में इस्तेमाल के लिए एक दवा बनाने वाली कंपनी गिलिएड साइंसेज ने मंजूरी दी थी. इन दवाओं के बनाने का काम भारत और पाकिस्तान को दिया गया है. इन दवाओं का भारत और पाकिस्तान को बड़े पैमानें पर कॉन्ट्रैक्ट दिया गया है. बता दें कि यह एक एंटीवायरल ड्रग है. कोरोना से लड़ने में यह दवा काफी कारगर साबित हो रही है. यह दवा कोरोना वायरस की जीन्स यानी RNA की कॉपी बनाता है. साथ ही कोरोना के असर को धीमा कर देता है. इस कारण कोरोना के मरीजों का इलाज काफी कम दिनों में हो रहा है. जहां पहले इसमें 15 दिन लगते थे वहीं अब इस दवा के इस्तेमाल से लोगों को 4 दिन में ही ठीक किया जा रहा है. बता दें कि इस दवा का इस्तेमाल इबोला बीमारी के दौरान भी किया गया था. Also Read - Coronavirus: पीपीई किट पहनने के बाद बढ़ी बेचैनी, कुछ ही देर बाद स्वास्थकर्मी की मौत

दूसरी सबसे अहम दवा का नाम है हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन यानी कि HCQ. बता दें कि ज्यादातर जगहों पर इसे HCQ शॉर्ट नेम से ही जाना जाता है. इसी दवा को लेकर बीते दिनों अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से डिमांड की थी. हालांकि बाद में उनके दवा ना दिए जाने को लेकर भारत परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहे इस बात की खूब आलोचना भी हुई थी. बावजूद इसके भारत ने इसकी पहली खेप अमेरिकी दी थी. इस दवा को कोरोना के इलाज के रूप में पहली बार ICMR ने इस दवा की सिफारिश की थी. इस दवा का इस्तेमाल मलेरिया के रोगियों को ठीक करने के लिए किया जाता है. हालांकि यह दवा ज्यादा असरदार नहीं है, बावजूद इसके बड़े पैमाने पर इन दवाओं का कोरोना संक्रमितों को ठीक करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है. Also Read - प्रवासी मजदूरों की वापसी ने बढ़ाई बिहार प्रशासन की चिंता, कोरोना के मामलों में हो रही वृद्धि

कोरोना के इलाज का तीसरा अहम तरीका है प्लाज्मा थेरेपी. इस थेरेपी में कोरोना से ठीक हो चुके मरीजों के शरीर से प्लाज्मा लेकर कोरोना संक्रमितों के शरीर में इंजेक्ट किया जाता है. इस कारण ठीक हो चुके मरीज का प्लाज्मा संक्रमित व्यक्ति के शरीर में एंटीबॉडी की तरह काम करता है. बता दें कि बीते दिनों दिल्ली सरकार ने भी कहा था कि वह प्लाज्मा थेरेपी पर काम कर रहे हैं. साथ ही इसके जरिए लोगों का इलाज भी किया जा रहा है.

चौथी दवा का नाम है ‘सेप्सिवैक’ दवा. इस दवा का ट्रायल चंडीगढ़ स्थित एक मेडिकल रिसर्च संस्थान PGIMR ने शुरू किया है. इस दवा को लेकर ICMR का मानना है कि यह दवा मृत्युदर को कम करने में कारगर साबित हो सकती है. इस दवा को लेकर एक चिकित्सक ने बताया कि इसको मरीजों को वैक्सीन के रूप में दिया जाएगा. इस दवा के इस्तेमाल से लोग दोबारा कोरोना संक्रमण से बच सकते हैं.

पांचवी दवा का नाम है फेवीपिरवीर. इस दवा का इस्तेमाल पहले जानलेवा बीमारी इन्फ्लुएंजा वायरस के खिलाफ किया जाता था. इस दवा का परीक्षण फिलहाल जापान में कोरोना संक्रमितों पर किया जा रहा है. Times Of India की एक खबर के मुताबिक इस दवा का परीक्षण जल्द ही भारत में भी शुरू हो सकता है. माना जा रहा है कि यह दवा शरीर के विभिन्न अंगों में वायरस को फैलने से रोकता है.