परीक्षा का दौर आरंभ हो चुका है. प्री-बोर्ड के माध्‍यम से बोर्ड की तैयारी की बात से सहमत होना मुश्किल है. यह ऐसा है, जैसे तनाव से पहले तनाव देकर उसकी तैयारी कराना! Also Read - Board Exams: बोर्ड परीक्षा के लिए कंप्यूटर साइंस, केमेस्ट्री समेत इन विषयों की कोचिंग देगी सरकार

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कुछ दिन पहले हमारे मेहमान अपने दसवीं कक्षा के बच्‍चों के साथ आए. बच्‍चों के साथ मुझे संवाद का अवसर मिला. थोड़ा आश्‍चर्य हुआ कि एक सुचिंतित, सुलझे हुए दंपति के बच्‍चों पर भी तनाव के बादल मंडरा रहे थे. बच्‍चों के चेहरे पर परीक्षा का तनाव महसूस किया जा सकता था. यह दंपति न तो बच्‍चों से किसी तरह की अनावश्‍यक अपेक्षा रखते हैं, न ही उन पर कोई दबाव डालते हैं, उसके बाद भी बच्‍चों के मन पर तनाव की छाया चिंतित करने वाली है. Also Read - Pariksha Pe Charcha 2020: पीएम नरेंद्र मोदी आज छात्रों से करेंगे बातचीत

इसकी मुख्‍य वजह बच्‍चों का सबसे अधिक उस दुनिया में रहना है, जहां स्‍नेह, प्रतिष्‍ठा उस बच्‍चे को हासिल है, जिसके नंबर सबसे ज्‍यादा हैं. यही उनके तनाव का सबसे बड़ा कारण है!

डियर जिंदगी: साथ रहते हुए ‘अकेले’ की स्‍वतंत्रता!

बच्‍चों ने जिस एक बात पर सबसे अधिक जोर दिया वह थी, प्री-बोर्ड का डर. स्‍कूल का केवल अपने रिजल्‍ट पर ध्‍यान. स्‍कूल बच्‍चों की दिमागी सेहत, स्‍वास्‍थ्‍य के प्रति न्‍यूनतम सरोकार रखते हैं. कुछ स्‍कूल इसके अपवाद हो सकते हैं. अधिकांश केवल इस बात पर आंख लगाए रहते हैं कि कैसे अधिक से अधिक टॉपर बच्‍चे स्‍कूल से निकलें. इसलिए परीक्षा के पहले प्री-बोर्ड जैसे अभ्‍यास से चीज़ों को रटवाने की कोशिश की जाती है. जिससे दिमाग में तथ्‍यों को रखने में आसानी हो.

डियर जिंदगी: स्‍वयं को दूसरे की सजा कब तक!

मुझसे अनेक बच्‍चों ने कहा कि प्री-बोर्ड तनाव घटाने नहीं बढ़ाने का काम करता है. पढ़ाई में अच्‍छा नहीं कर पाने वाले बच्‍चों के लिए यह दोहरी मार जैसा है. ‘डियर जिंदगी’ को परीक्षा के दिनों में तनाव का सामना करने के बारे में बहुत से पाठकों, अभिभावकों के ई-मेल मिल रहे हैं. परीक्षा से उपजने वाले तनाव, दबाव पर संवाद के निमंत्रण मिल रहे हैं. हम यथासंभव संवाद करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन यह सब एक सीमा से आगे संभव नहीं.

इसलिए, हमारा अनुरोध है कि परीक्षा के दिनों में बच्‍चों का ध्‍यान एकदम वैसे रखें, जैसे आप अपने सबसे कीमती चीज़ों का रखते हैं. जैसे कांच के बर्तनों का ख्‍याल रखते हैं. सबसे कीमती चीज़ों का ध्यान उस वक्‍त भी रखते हैं, जब आप बहुत ज्‍यादा व्‍यस्‍त होते हैं. ठीक वैसे ही बच्‍चों का रखना है.

डियर जिंदगी: जो बिल्‍कुल मेरा अपना है!

बार-बार खुद को याद दिलाना है…

‘बच्‍चे हमसे हैं, हमारे लिए नहीं. बच्‍चे प्रोडक्‍ट नहीं, जिनको बाज़ार में तैयार करके बेचना है. बच्‍चों का साथ दीजिए, उन्‍हें एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ में इतना व्‍यस्‍त मत कीजिए कि वह खुद से ही अलग हो जाएं. उनके लिए जिंदगी में सफलता इतनी जरूरी हो जाए कि जिंदगी से भी ज्‍यादा कीमती हो जाए.’

‘डियर जिंदगी’ को इंदौर से एक किशोर छात्र ने फेसबुक मैसेंजर पर लिखा है कि वह परीक्षा से डरा हुआ है. यह छात्र बारहवीं कक्षा का है. उसने बताया कि दसवीं में उसने अच्‍छा प्रदर्शन किया था. लेकिन बारहवीं में उसे पिताजी ने काॅमर्स की जगह गणित चुनने को कहा! वह उन्‍हें मना नहीं कर पाया. क्‍योंकि परिवार इंजीनियरिंग, आईआईटी से भरापूरा है. इसलिए पिता ने परिवार की परंपरा, प्रतिष्‍ठा का हवाला देते हुए उसे गणित विषय ही चुनने को कहा.

डियर जिंदगी: असफल बच्‍चे के साथ!

उस बच्‍चे का यहां तक कहना है कि वह एक बार सुसाइड की कोशिश कर चुका है. जिसके बाद उसे किसी तरह बचा तो लिया गया, लेकिन वह बहुत बड़े स्‍कूल का छात्र है. जहां टॉपर्स ही टॉपर्स हैं. उसके परिवार को उसकी सेहत की चिंता तो है, लेकिन परिवार की प्रतिष्‍ठा उनके लिए कहीं जरूरी है. उसके परिवार के लिए इस बात को बर्दाश्‍त करना लगभग असंभव है कि उनका बेटा खराब नंबर ले आए, गणित जैसे पारिवारिक विषय में कमजोर रहे!

यह बच्‍चा अपने ही परिवार में अकेला है. उसे कौन अकेला कर रहा है. कौन उसे परेशान कर रहा है. वही सोच, जिसका हम हर दूसरे लेख में जिक्र करते हैं. जिस पर डियर जिंदगी के सौ से अधिक लेख हैं, ‘बच्‍चे हमसे हैं, हमारे लिए नहीं. बच्‍चे प्रोडक्‍ट नहीं, जिनको बाज़ार में तैयार करके बेचना है.’

हमने उस बच्‍चे की जितना संभव हो मदद की कोशिश की है. उसके परिवार से भी संपर्क किया गया. आप सभी से निवेदन है कि इस कठिन समय में बच्‍चों का साथ दें. उनके साथ रहें, उनके लिए रहें. वह जैसे भी हैं, परीक्षा में जैसा भी करते हैं, उनका साथ और हाथ न छोड़ें. जिंदगी किसी भी अनुभव से बड़ी है. जिंदगी है तो अनुभव हैं. इसलिए जिंदगी का साथ देना है. हर मुश्किल में. इसे अकेला नहीं छोड़ना.

‘डियर जिंदगी’ जीवन के प्रति शुभकामना है. इसे हमेशा अपने पास महसूस कीजिए!

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(लेखक ज़ी न्यूज़ के डिजिटल एडिटर हैं)

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