दस साल कम नहीं होते. एक दूसरे को जानने, समझने के लिए. पर्याप्‍त से कहीं अधिक होते हैं. लेकिन हर रिश्‍ते पर यह बात सही नहीं बैठती. खासकर तब जब आप प्रेम में हो! किसी के साथ जीवन की धूप को मिलजुल कर सहने की तैयारी में हों. अनुभव और अनुधा के साथ कुछ ऐसा ही हुआ. ‘डियर जिंदगी’ को लिखे एक ईमेल में अनुभव ने बहुत ही आदर, प्रेम के साथ इस बात को रेखांकित किया है. Also Read - Birthday: इन एक्ट्रेस के साथ जुड़ा है वरुण धवन का नाम, अब नताशा दलाल के साथ करेंगे शादी, निक नेम जानकर हंस पड़ेंगे

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अनुभव ने लिखा, हम कॉलेज के जमाने से दोस्‍त थे. समान पारिवारिक स्थिति से आते थे. सुपरिचित थे, इसलिए जब रिश्‍ते की बात चली तो कोई ‘स्‍पीड ब्रेकर’ मिला ही नहीं. अनुभव-अनुधा पेशे से वकील हैं. तर्कशील, शिक्षित, समझदार हैं. ऐसे में शादी के दस बरस बाद ही रिश्‍ते में दरार थोड़ी चौंकाने वाली है. जहां भाव से अधिक ‘समझ’ जमा हो जाती है, वहां रिश्‍तों में दरार की गुंजाइश बढ़ जाती है. रिश्‍तों के नाम भले वही हों, लेकिन उनके मिजाज, व्‍यवहार में जो ‘ताजी’ हवा आई है, उसके अनुकूल स्‍वयं को तैयार करना होगा. Also Read - आजकल तापसी पन्नू नहीं कर रही हैं कोई फोटो शेयर, बेवजह कुछ नहीं, छिपा है गहरा राज़

डियर जिंदगी : ‘आईना, मुझसे मेरी पहली सी सूरत मांगे…’

दस साल कम नहीं होते. एक दूसरे को जानने, समझने के लिए. पर्याप्‍त से कहीं अधिक होते हैं. लेकिन हर रिश्‍ते पर यह बात सही नहीं बैठती. खासकर तब जब आप प्रेम में हो! किसी के साथ जीवन की धूप को मिलजुल कर सहने की तैयारी में हों. अनुभव और अनुधा के साथ कुछ ऐसा ही हुआ. ‘डियर जिंदगी’ को लिखे एक ईमेल में अनुभव ने बहुत ही आदर, प्रेम के साथ इस बात को रेखांकित किया है.

अपेक्षा का कैक्टस और स्नेह का जंगल

अनुभव ने लिखा, हम कॉलेज के जमाने से दोस्‍त थे. समान पारिवारिक स्थिति से आते थे. सुपरिचित थे, इसलिए जब रिश्‍ते की बात चली तो कोई ‘स्‍पीड ब्रेकर’ मिला ही नहीं. अनुभव-अनुधा पेशे से वकील हैं. तर्कशील, शिक्षित, समझदार हैं. ऐसे में शादी के दस बरस बाद ही रिश्‍ते में दरार थोड़ी चौंकाने वाली है. जहां भाव से अधिक ‘समझ’ जमा हो जाती है, वहां रिश्‍तों में दरार की गुंजाइश बढ़ जाती है. रिश्‍तों के नाम भले वही हों, लेकिन उनके मिजाज, व्‍यवहार में जो ‘ताजी’ हवा आई है, उसके अनुकूल स्‍वयं को तैयार करना होगा.

डियर जिंदगी : परवरिश की परीक्षा!

स्‍कूल, कॉलेज से निकलने वाले यह युवा, किशोर दुनिया से पहले के मुकाबले कहीं अधिक जुड़े हैं. लेकिन क्‍या उनके साथ घर,परिवार और समाज बदल रहा है. जैसे मेरी मां सोचती थीं, वैसा मेरी पत्‍नी तो शायद सोच भी लें लेकिन क्‍या मुझे मेरी बेटी से पत्‍नी जैसी सोच की अपेक्षा होनी चाहिए! यह अपेक्षा ही सबसे अधिक दुख, घुटन का कारण है. ध्‍यान से देखिए, अनुभव का परिवार बहू से जिस आचरण की अपेक्षा रख रहा है, अपनी बेटी से वैसे व्‍यवहार की कल्‍पना से भी परेशान हो सकता है.

डियर जिंदगी : कितने उदार है, हम!

दस बरस तक आते-आते अनुभव और अनुधा ने महसूस किया कि उनके बीच अब स्‍नेह का वह बंधन नहीं रह गया. बस, साथ रहने के वादे, कसमों के साथ अकेले रह गए हैं. अनुधा का कहना है कि अनुभव अपने परिवार को कहीं अधिक अच्‍छे से समझते थे. तो उन्‍हें पहले ही इस बात को बताना चाहिए था कि परिवार को आधुनिक नहीं बल्कि ऐसी बहू चाहिए थी, जो उनके स्‍वर में हमेशा ‘हां’ मिला सके. अनुभव बहुत अच्‍छे व्‍यक्ति हैं, लेकिन वह अपने परिवार के मामले में ‘स्‍टैंड’ लेने में कमजोर रहे. अपने परिवार के लिए मुझे ‘चेंज’ करने पर उनका ध्‍यान इतना अधिक रहा कि मेरी शख्सियत ही बदल गई.

डियर जिंदगी : मेरा होना सबका होना है!

यह कैसा प्रेम, स्‍नेह और दुलार था, जहां सब कुछ मुझे ही करना था. मेरी अपनी पहचान कहां गई. अनुधा ने अपनी बात खत्‍म करते हुए कहा, ‘मेरी मां और खुद अनुभव की मां ने जो किया था, उसकी अपेक्षा मुझसे की जा रही थी, यह कैसे संभव होता! रिश्‍ते को बचाए रखने के लिए कुछ त्‍याग करना और बात है लेकिन अपनी पहचान, शख्सियत को मिटा देना एकदम अलग बात है. मैं इसके लिए तैयार नहीं थी.’

डियर जिंदगी : जीवन के गाल पर डिठौना!

इसमें किसी की कितनी गलती है, इसका फैसला कोई दूसरा नहीं कर सकता. क्‍योंकि ऐसा करते समय वह इसमें खुद को शामिल कर लेगा. लेकिन हां, इससे बहुत कुछ सीखा, समझा जा सकता है. शादी का अर्थ एक के लिए दूसरे का मिटना नहीं है. बल्कि साथ रहते हुए एक दूसरे की स्‍वतंत्रता का सम्‍मान करना है. ठीक वैसे ही जैसे वीणा के तार एक ही स्‍वर में धड़कते होते हुए भी अलग-अलग हैं.

एक दूसरे से प्रेम करिए लेकिन प्रेम को बंधन में मत बांधिए. बंधन जैसे-जैसे बढ़ेगा, असल में घुटन बढ़ेगी और घुटन के बीच कोई रिश्‍ता नहीं ‘खिल’ सकता!

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(लेखक ज़ी न्यूज़ के डिजिटल एडिटर हैं)

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