दिल्ली में प्रदूषण इतना खतरनाक स्तर है कि इससे सांस संबंधी बीमारियां होने का खतरा काफी बढ़ गया है. इन बीमारियों से कैसे बचा जाए और क्या एहतियात बरती जाए… यह आम लोगों को पता नहीं है. प्रदूषण से होने वाली बीमारियों का त्वरित कोई इलाज भी नहीं है. ऐसे में हमने डॉ राम मनोहर लोहिया अस्पताल के वरिष्ठ पल्मोनरी फिजिशियन डॉ. देश दीपक से बात की. आइए जानते हैं कि डॉ. दीपक इस बारे में क्या सुझाव देते हैं.

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सवालः खतरनाक प्रदूषण के कारण सांस संबंधी परेशानियां काफी बढ़ गई हैं. अस्थमा के मामले बढ़ गए हैं. ऐसे में क्या एहतियात बरतनी चाहिए?
जवाबः मौसम बदलते ही सांस के मरीजों की दिक्कत बढ़ जाती है. अस्थमा के मरीजों में भी सांस की तकलीफ बढ़ने लगती है. सर्दी में ऐसे खतरनाक प्रदूषण के कारण सीओपीडी (COPD) के मामले बढ़ जाते हैं. दरअसल, क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस यानी सीओपीडी एक बड़ी बीमारी है. इसका एक कम्पोनेंट है ब्रोंकाइटिस. यह आमतौर पर स्मोकिंग के कारण होती है. लेकिन इन दिनों दिल्ली-एनसीआर में फैले स्मॉग ने स्मोकिंग नहीं करने वालों को भी इसकी चपेट में ला रहा है. यह बीमारी लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाते हैं या धूओं के बीच रहते हैं उनके इस बीमारी के होने का खतरा काफी बढ़ जाता है. इन दिनों दिल्ली-एनसीआर में ऐसी ही स्थिति है. ऐसे में यहां के लोगों में इस बीमारी के होने का खतरा काफी ज्यादा है. सर्दियों में एक और दिक्कत आती है. ऐसे बुजुर्ग, जो सांस की बीमारी से ग्रसित हैं उनकी तकलीफें बढ़ जाती हैं. ऐसे में उनको सुबह-सुबह घर से बाहर न निकलने की सलाह दी जाती है. उन्हें सूरज निकलने के बाद ही घर से बाहर निकलना चाहिए.

How we keep our lungs healthy in Delhi?

सवालः प्रदूषण से बचने के लिए कौन से मास्क पहनना चाहिए? इसका इस्तेमाल कैसे किया जाना चाहिए?
जवाबः पॉल्यूशन लेवल हाई हो तो बाहर जाने से बचें. ऐसे वक्त में एक्सरसाइज करने से बचें. बाहर जाना यदि बहुत ही जरूरी हो तो एक खास किस्म के मास्क को पहनकर निकलें. इसे N95 मास्क कहते हैं. साथ ही पॉल्यूशन से बचने के लिए घर की खिड़कियां दरवाजे बंद रखें और घर के अंदर रहें. बाजार में बहुत तरह के मास्क उपलब्ध हैं. इसमें सर्जिकल मास्क भी है. खतरनाक प्रदूषण में ये मास्क काम के नहीं हैं. हमें N95 मास्क का ही उपयोग करना चाहिए. मास्क जब तक गीला न हो जाए तब तक उसका इस्तेमाल कर सकते हैं. इसे अमूमन आठ घंटे तक पहना जा सकता है. N95 मार्क देखकर ही मास्क खरीदें. N95 का मतलब है कि यह मास्क 95 फीसदी तक हवा में मौजूद प्रदूषण के कणों को रोकता है.

How do you keep your lungs healthy in pollution?

सवालः फेफड़ों में परेशानी शुरू होने के क्या लक्षण हैं?
जवाबः प्रदूषण के कारण फेफड़ों में परेशानी की शुरुआत गले से होती है. आपको गले में इरिटेशन महसूस होगा. आंखों में जलन होगी. खांसी आएगी. सांस लेने में दिक्कत होगी. दम घूटेंगा. ये सभी फेफड़े में परेशानी के शुरुआती लक्षण हैं. धीरे-धीरे खांसी बढ़ जाएगी और फिर बलगम भी आने लगेगा.

How do you tackle smog?

सवालः अस्थमा और क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस में क्या अंतर है? इनका कोई स्थायी इलाज है या फिर इसके लिए हमेशा दवा खाने की जरूरत होती है?
जवाबः ब्रोंकाइटिस और अस्थमा एक दूसरे से एकदम अलग है. उचित इलाज से अस्थमा ठीक हो सकता है. वहीं क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस यानी सीओपीडी में लगातार इलाज की जरूरत होती है. यह बीमारी आमतौर पर चालीस साल के बाद होती है. सीओपीडी के मरीजों के लिए जरूरी है कि वे स्मोकिंग न करें. ब्रोंकाइटिस में बलगम ज्यादा आता है. लगातार बलगम आता है. सर्दियों में यह और बढ़ जाता है. इसमें स्मोकिंग बंद करने से काफी फायदा होता है. दूसरी तरफ, अस्थमा छोटे से लेकर बुजुर्ग किसी को भी हो सकता है. वहीं अगर प्रदूषण और धुआं हो तो इंसान की इसकी चपेट में जल्दी आ जाता है.

एक ही समय में इन दोनों बीमारियों से कोई व्यक्ति ग्रसित नहीं हो सकता. यह एक मिथक है. क्योंकि इन दोनों बीमारियों का लक्षण तो एक ही है. इन दोनों ही बीमारियों में सांस फूलता है. हमारे शरीर में ऑक्सीजन जाने का जो चैनल है वह पतला हो जाता है. इलाज के दौरान बायोप्सी टेस्ट से पता चलता है कि हमें क्या रणनीति अपनानी होगी. इसके बाद पीएफटी करते हैं. इसमें हम मरीज को दवा देते हैं. अगर वह दवा लेने से ठीक हो जाता है तो उसमें अस्थमा होने की संभावना ज्यादा होती है. अगर दवा देने से कोई फर्क नहीं पड़ता है तो वो सीओपीडी होती है.