नई दिल्ली. जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के समर्थन में निकाले गए जुलूस हों या डेरा सच्चा सौदा वाले राम रहीम के समर्थकों का उपद्रव, भीड़ नियंत्रण यानी क्राउड-कंट्रोल करना पुलिस और प्रशासन के लिए हमेशा मुश्किल भरा काम रहा है. कश्मीर में सेना के जवान जब उग्र लोगों की भीड़ को कंट्रोल करने के लिए पैलेट-गन चलाते हैं या देश में किसी भी स्थान पर प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस सख्त कदम उठाती है, तो उसको लेकर मानवाधिकार के प्रश्न उठाए जाते हैं. रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी डीआरडीओ (DRDO) ने प्रशासनिक अमले की इसी परेशानी का नायाब तोड़ ढूंढ निकाला है. डीआरडीओ ने एक ऐसा वाहन बनाया है, जो पलक झपकते ही हजारों प्रदर्शनकारियों की भीड़ को तितर-बितर कर देगा. बुलेट-प्रूफ तकनीक से लैस इस वाहन को लेजर साइंस एंड टेक्नोलॉजी सेंटर (LASTEC) के सहयोग से विकसित किया गया है. इसे लेजर-डैजलर नाम दिया गया है. इस वाहन से भीड़ के ऊपर लेजर-बीम छोड़ी जाती है जिससे कुछ सेकेंडों के लिए आपकी आंखों के सामने अंधेरा छा जाएगा. इससे किसी भी व्यक्ति को लंबे समय के लिए कोई नुकसान नहीं होगा, लेकिन जब तक इस लेजर-बीम का असर होगा, उन्हें कुछ भी नहीं दिखेगा. इसका फायदा यह होगा कि किसी भी स्थान पर जमा हजारों लोगों की भीड़ को पलभर में ही कम किया जा सकेगा.

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3 साल से सेना कर रही है इसका परीक्षण
DRDO ने यूं तो लेजर-डैजलर को 3 साल पहले ही विकसित किया था, लेकिन इसे आम प्रशासनिक काम में अब तक नहीं लगाया गया है. DRDO ने इस वाहन को भारतीय सेना के उत्तरी कमांड को सौंप दिया था, जो अभी तक इसका परीक्षण के साथ-साथ इस्तेमाल भी कर रही है. जालंधर में आयोजित 106वीं भारतीय विज्ञान कांग्रेस (Indian Science Congress) के दौरान DRDO ने इसका प्रदर्शन किया है. DRDO के अनुसार इस बुलेट-प्रूफ लेजर डैजलर से एक हरे रंग की लेजर-बीम निकलती है, जिसकी पहुंच करीब 24 मीटर तक होती है. DRDO के वैज्ञानिक मनमोहन सिंह ने अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि यह लेजर-बीम इतनी ताकतवर और प्रभावी है कि 24 मीटर के दायरे में आने वाले किसी भी व्यक्ति की आंखों को कुछ देर के लिए चौंधिया देती है. यानी लेजर-बीम पड़ते ही आपकी आंखों के सामने अंधेरा सा छा जाएगा और आप क्षणभर के लिए कुछ भी देख नहीं पाएंगे. मनमोहन सिंह के अनुसार लेजर डैजलर की यही खूबी भीड़ को नियंत्रित करने में मददगार साबित हो सकती है.

70 लाख की लागत से विकसित किया गया है VMLD
देश की नामी वाहन निर्माता कंपनी महिंद्रा एंड महिंद्रा के सहयोग से विकसित किए गए इस व्हीकल को DRDO ने तकनीकी तौर पर व्हीकल माउंटेड लेजर डैजलर (VMLD) का नाम दिया है. संगठन के अनुसार दंगा नियंत्रण, बेकाबू भीड़ को कंट्रोल करने जैसे प्रशासनिक काम के लिए यह वाहन अचूक नियंत्रक का काम करेगा. DRDO के एक अन्य अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि स्वचालित हथियार से लैस यह बुलेट-प्रूफ वाहन किसी भी स्थान पर प्रतिकूल परिस्थिति में काम करने के लिए बनाया गया है. इस वाहन को विकसित करने की लागत करीब 70 लाख रुपए आई है. इसमें 50 लाख रुपए तो व्हीकल की लागत है, वहीं 20 लाख रुपए से इसमें लेजर आधारित टेक्नोलॉजी का समावेश किया गया है. DRDO के अधिकारी ने बताया कि 10 हजार से ज्यादा लोगों की भीड़ को काबू करने के लिए सुरक्षाबलों के चंद जवान काफी नहीं होते. ऐसे में VMLD निश्चित तौर पर काफी उपयोगी साबित होगा. क्योंकि यह वाहन 400 मीटर दूर से ही भीड़ को तितर-बितर करने का काम कर सकता है. इसकी लेजर-बीम टेक्नोलॉजी इतनी जबर्दस्त है कि यह लोगों को गंभीर रूप से नुकसान नहीं पहुंचाता, बल्कि कुछ क्षणों के लिए उन्हें अक्षम बना देता है.

कश्मीरी लोगों का गुस्सा न बढ़े, इसलिए नहीं किया इस्तेमाल
DRDO के अधिकारी ने अखबार को बताया कि संगठन की तरफ से भारतीय सेना की उत्तरी कमान को पिछले साल ही यह वाहन इस्तेमाल करने के लिए दिया गया था. लेकिन सेना ने कश्मीर की अशांत स्थिति को देखते हुए और वहां के लोगों की नाराजगी न बढ़े, इसके कारण VMLD का सार्वजनिक प्रयोग नहीं किया. अधिकारी का कहना था कि पैलेट-गन के इस्तेमाल के बाद कश्मीरियों की नाराजगी को देखते हुए ही सेना ने इसको लेकर संयम बरता. DRDO के चेयरमैन जी. सतीश रेड्डी ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि सुरक्षाबलों के सामने VMLD का डेमो किया जा चुका है, लेकिन अभी तक इसे कहीं तैनात नहीं किया गया है. क्राउड-कंट्रोल करने की इसकी विशेषता को देखते हुए आने वाले समय में सुरक्षाबल की किसी भी इकाई (सेना या पुलिस) द्वारा इसकी तैनाती की संभावना है. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि DRDO का यह काम नहीं है कि VMLD को कहां तैनात किया जाए.