दुनिया, एक ऐसा लफ्ज़ जिसमें बहुत कुछ समाया हुआ है. बहुत मुश्किल होता है इस लफ़्ज़ को परिभाषित करना या इसकी तर्जुमानी करना. अक्सर हम अपने आस पास की चीज़ों से तंग आकर ‘दुनिया’ को कुसूरवार ठहरा देते हैं. इस दुनिया के कई रंग हैं और देखने वाले इसे अपने पसंदीदा रंगों की चादर के तले देख लेते हैं. इस दुनिया को हम सबने अपनी आंखों से देखा और समझा है. कई चीज़ें ऐसी हैं जिसकी तमन्ना है और कई चीज़ें ऐसी जिससे शिकायत है. इन्हीं सब सवालों से जब हम घिरने लगते हैं तब दुनिया का मतलब तलाशना शुरू करते हैं. आज हम लाए हैं आप के लिए ‘दुनिया’ पर वो शायरी जिसे पढ़ कर आप इस लफ्ज़ का एक बहुत बड़ा हिस्सा महसूस करेंगे. Also Read - रौशनी है किसी के होने से... पढ़िए 'रौशनी' पर कुछ चुनिंदा शायरी

यहां पढ़िए दुनिया पर 14 मशहूर शेर-Read Top 14 Duniya Shayari 

यहाँ लिबास की क़ीमत है आदमी की नहीं
मुझे गिलास बड़े दे शराब कम कर दे
बशीर बद्र Also Read - Shayari in Hindi 2020: कुछ तो तन्हाई की रातों में सहारा होता... पढ़िए 'तन्हाई' पर 10 चुनिंदा शायरी 

बाज़ीचा-ए-अतफ़ाल है दुनिया मिरे आगे
होता है शब-ओ-रोज़ तमाशा मिरे आगे
मिर्ज़ा ग़ालिब Also Read - कहीं अबीर की ख़ुश्बू कहीं गुलाल का रंग... पढ़िए और भेजिए 'होली' पर ये चुनिंदा शायरी  

चले तो पाँव के नीचे कुचल गई कोई शय
नशे की झोंक में देखा नहीं कि दुनिया है
शहाब जाफ़री

दुनिया जिसे कहते हैं जादू का खिलौना है
मिल जाए तो मिट्टी है खो जाए तो सोना है
निदा फ़ाज़ली

नहीं दुनिया को जब परवाह हमारी
तो फिर दुनिया की परवाह क्यूँ करें हम
जौन एलिया

बहुत मुश्किल है दुनिया का सँवरना
तिरी ज़ुल्फ़ों का पेच-ओ-ख़म नहीं है
असरार-उल-हक़ मजाज़

दुनिया पर शायरी – Duniya Shayari in Hindi

जितनी बुरी कही जाती है उतनी बुरी नहीं है दुनिया
बच्चों के स्कूल में शायद तुम से मिली नहीं है दुनिया
निदा फ़ाज़ली

थोड़ी सी अक़्ल लाए थे हम भी मगर ‘अदम’
दुनिया के हादसात ने दीवाना कर दिया
अब्दुल हमीद अदम

गाँव की आँख से बस्ती की नज़र से देखा
एक ही रंग है दुनिया को जिधर से देखा
असअ’द बदायुनी

दुनिया बस इस से और ज़ियादा नहीं है कुछ
कुछ रोज़ हैं गुज़ारने और कुछ गुज़र गए
हकीम मोहम्मद अजमल ख़ाँ शैदा

हिंदी में दुनिया पर शायरी – Famous Shayari on Duniya in Hindi

दुनिया पसंद आने लगी दिल को अब बहुत
समझो कि अब ये बाग़ भी मुरझाने वाला है
जमाल एहसानी

रास आने लगी दुनिया तो कहा दिल ने कि जा
अब तुझे दर्द की दौलत नहीं मिलने वाली
इफ़्तिख़ार आरिफ़

दुनिया मिरे पड़ोस में आबाद है मगर
मेरी दुआ-सलाम नहीं उस ज़लील से
अहमद जावेद

कैसे आ सकती है ऐसी दिल-नशीं दुनिया को मौत
कौन कहता है कि ये सब कुछ फ़ना हो जाएगा
अहमद मुश्ताक़