नई दिल्ली: ट्रांसपोर्टेशन टेक्नोलॉजी ने मंगलवार को फुल साइज पैसेंजर कैप्सूल से पर्दा हटा दिया. यह कैप्सूल 105 फीट यानी 32 मीटर लंबा है. इसका वजन 5 टन है. फ्रांस में मंगलवार को इसका प्रदर्शन किया गया. कैलिफॉर्निया की स्टार्टअप जिसे हाइपरलूप टीटी के नाम से जाना जाता है, ने बयान जारी कर बताया कि कैप्सूल को बनाने में कई तरह के मिश्रण का इस्तेमाल किया गया है.

हाइपरलूप टेस्ला के संस्थापक एलन मस्क की सोच है, जिसे उन्होंने 2013 में दुनिया के सामने लाया था. हाईस्पीड ट्रांसपोर्टेशन के लिए कई कंपनियां काम कर रही हैं. कंपनी का दावा है कि हाइपरलूप की स्पीड 750 माइल्स यानी 1200 किमी प्रति घंटा होगी. इसमें 30 से 40 यात्री यात्रा कर सकेंगे. यह ध्वनी की गति से तेज चलेगी और अबतक जितनी भी हाईस्पीड ट्रेनें हैं उन्हें पीछे छोड़ देगी.

अमेरिका का लॉस एंजिल्स हाइपरलूप के मुख्य सेंटर के रूप में उभरा है. हाइपरलूप पर काम करने वाली कई कंपनियां यहीं मौजूद हैं. कैलिफॉर्निया हाईस्पीड से निराश एलन मस्क ने 2013 में हाइपरलूप प्लान के बारे में दुनिया को बताया था. उन्होंने इस ट्रांसपोर्ट के माध्यम से लोगों को लॉस एंजिल्स से सैन फ्रांसिस्को आधे घंटे में पहुंचाने का दावा किया था. अभी ट्रेन से इस दूरी को तय करने में 6 घंटे से ज्यादा समय लगते हैं. हालांकि हाइपरलूप की टेस्टिंग पर अभी भी काम चल रहा है.

कंपनी के सीईओ डर्क एलबॉर्न ने बताया कि उन्हें उम्मीद है कि तीन सालों के अंदर हाइपरलूप से लोग यात्रा कर पाएंगे. दुनियाभर में हाइपरलूप से यात्रा शायद 10 सालों के अंदर शुरू हो पाएगी. उन्होंने बताया कि यह सब सभी की उम्मीद से ज्यादा जल्दी हो रहा है.

भारत में भी हाइपरलूप को लेकर कुछ राज्यों से करार हुआ है. महाराष्ट्र उनमें से एक है. मुंबई से पुणे के बीच चलने वाली हाइपरलूप सर्विस से दोनों शहरों की दूरी 25 मिनट में तय की जा सकेगी. मुंबई-पुणे रूट पर हाइपरलूप चलाने की प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट पूरी हो गई है.

पुणे में हाइपरलूप सर्विस के डिमॉन्सट्रेशन के लिए जगह भी देख ली गई है. राज्य सरकार का दावा है कि हाइपरलूप प्रणाली के लिए 70 प्रतिशत निर्माण सामग्री और अन्य जरूरी चीज महाराष्ट्र में ही उपलब्ध हैं. पुणे क्षेत्रीय विकास प्राधिकार (PMRDA) ने हाइपरलुपवन सर्विस के शुरुआती परीक्षण के लिए पुणे में 15 किलोमीटर के ट्रैक की पहचान कर ली है.