नई दिल्ली. पूर्व प्रधानमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee) की पिछले साल मृत्यु के बाद उनकी पार्टी और इसके नेता उन्हें शिद्दत से याद करते हैं. पीएम मोदी हों या भाजपा के अन्य धुरंधर, वाजपेयी का जिक्र कर अक्सर विपक्षी दलों को उनकी खामियों की याद दिलाते रहते हैं. वाजपेयी के राजनीतिक कद को देखते हुए उन्हें ऐसा सम्मान मिलना लाजिमी भी है. लेकिन अगर अटल बिहारी वाजपेयी की मृत्यु के बाद उनके अस्थियों के विसर्जन को लेकर विवाद हो जाए, तो इस पर आप क्या कहेंगे? जी हां, भाजपा ने पूर्व प्रधानमंत्री की मृत्यु के बाद उनके अस्थि-अवशेषों को देश के कोने-कोने तक पहुंचाने और वाजपेयी से जुड़े स्थानों पर नदियों में उसे प्रवाहित करने की योजना बनाई थी. इसके तहत लखनऊ, जहां से पूर्व प्रधानमंत्री कई बार सांसद रहे, में भी गोमती नदी में अस्थि विसर्जन को लेकर ‘भव्य’ कार्यक्रम किया गया. इसमें ढाई करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च हो गए. इस पूरी कहानी में शर्मनाक बात यह है कि इस राशि के बिल को लेकर अब विवाद हो गया है.

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दरअसल, उत्तर प्रदेश सरकार ने वाजपेयी की अस्थियों के विसर्जन को लेकर सारा इंतजाम करने का जिम्मा लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) को सौंपा था. सीएम योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) के निर्देशों के अनुसार वाजपेयी की अस्थियों को गोमती नदी में प्रवाहित करने की योजना बनी. हमारी सहयोगी वेबसाइट डीएनए की रिपोर्ट के अनुसार, LDA से कहा गया था कि वह इस कार्यक्रम का इंतजाम करे और इसमें हुए खर्च का भुगतान राज्य सरकार करेगी. LDA ने सरकार के निर्देशों के अनुरूप ऐसा किया भी. अस्थि विसर्जन कार्यक्रम के लिए मंच बनाने, साउंड-सिस्टम, लाइटिंग, टेंट और बैरिकेडिंग जैसे काम पर प्राधिकरण को 2 करोड़ 54 लाख रुपए से ज्यादा खर्च करना पड़ा. डीएनए के मुताबिक वाजपेयी के अस्थि विसर्जन जुलूस में तत्कालीन गृह मंत्री राजनाथ सिंह, सीएम योगी आदित्यनाथ के अलावा भाजपा के कई बड़े नेता शामिल हुए थे.

वाजपेयी के अस्थि विसर्जन कार्यक्रम के बाद LDA ने राज्य सरकार को इस राशि के भुगतान को लेकर पत्र लिखा. डीएनए की रिपोर्ट के मुताबिक कार्यक्रम के लगभग एक साल पूरा होने के बाद भी अभी तक सरकार ने LDA को इस राशि का भुगतान नहीं किया है. बीते दिनों लखनऊ के एक स्थानीय अखबार ने इसको लेकर खबर प्रकाशित की, जिसके बाद यह मामला सामने आ गया. आपको बता दें कि LDA सरकार के शहरी विकास और आवास विभाग के अधीन एक स्वायत्तशासी इकाई है. डीएनए की रिपोर्ट के मुताबिक इस साल जनवरी में LDA के सचिव एमपी सिंह ने सरकार को इस आशय का पत्र लिखा, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला. इसके बाद मार्च में उन्होंने एक बार फिर रिमाइंडर भेजा, लेकिन नतीजा जस का तस रहा. बीते दिनों जब स्थानीय अखबार ने इस आशय की खबर प्रकाशित की, तब जाकर सरकार का सूचना विभाग हरकत में आया.

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उत्तर प्रदेश सरकार के सूचना विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर डीएनए से कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के अस्थि विसर्जन कार्यक्रम पर खर्च हुई राशि के भुगतान की फाइल आगे बढ़ा दी गई है. LDA को जल्द से जल्द इस राशि का भुगतान कर दिया जाएगा. बहरहाल, भाजपा के जिस दिवंगत नेता का नाम लेकर पार्टी के नेता तमाम तरह के दावे करते रहते हैं, उनके नाम के साथ पैदा हुए इस शर्मनाक वाकये को उत्तर प्रदेश सरकार जितनी जल्दी सुलझा ले अच्छा है. वरना विपक्षी दलों के निशाने पर रहने वाली योगी सरकार को इस मामले पर भी शर्मिंदा होना पड़ेगा.