Story of Mafia Brijesh Singh: उत्तर प्रदेश का पूर्वी हिस्सा यानी पूर्वांचल हमेशा से वहां के लोगों द्वारा पहचाना गया है. 1980 के दशक में सबसे पिछड़े जिले में विकास की ऐसी बयार बही जिसने देश के सबसे बड़े माफियाओं को वहां जन्म दिया. इसी कड़ी में एक माफिया हुए मुख्तार अंसारी जो फिलहाल पंजाब की जेल में बंद हैं. मुख्तार को उत्तर प्रदेश वापस लाने की कवायद योगी सरकार द्वारा तेज कर दी गई है. ऐसे में आए दिन पंजाब हाईकोर्ट में बहस होती है लेकिन मुख्तार अंसारी का कहना है कि यूपी में उनकी जान को खतरा है. खतरा आखिर उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि उत्तर भारत के सबसे बड़े बाहुबली को आखिर किससे खतरा? Also Read - मुख्तार अंसारी केस: लखनऊ से बांदा जेल की निगरानी कर रहे हैं डीजी आनंद कुमार, चप्पे-चप्पे पर है सीसीटीवी कैमरा

हम बात कर रहे हैं पूर्वांचल के माफिया डॉन बृजेश सिंह की. मुख्तार अंसारी और बृजेश सिंह के बीच गैंगवार दशकों से चली आ रही है. दोनों के बीच यह शुरुआत 1980 के दशक में ही हुई जब साहिब सिंह गैंग का कब्जा पूर्वांचल के अधिकतर सरकारी ठेकों पर होने लगा. साहिब सिंह के नेटवर्क को गाजीपुर जिले में संभालने का काम बृजेश सिंह करते थे. वहीं मकनू सिंह गैंग के सभी सरकारी कामों का ठेका गाजीपुर जिले में मुख्तार अंसारी संभालते थे. लेकिन बृजेश सिंह के बढ़ते प्रभाव के कारण पूर्वांचल में दो माफियाओं के बीच एक तलवार में दो म्यान जैसी स्थिति बन गई. फिर क्या आए दिन फिल्मी अंदाज में हत्याएं, गैंगवॉर, फिरौती, वसूली, जमीनों पर अवैध कब्जे का काम पूर्वांचल में जोर-शोर से शुरू हुआ. इस अपराध को राजनीतिक शह मिलने लगी. Also Read - UP: योगी सरकार मुख्‍तार अंसारी के बाद अब बाहुबली पूर्व सांसद अतीक अहमद को गुजरात से यूपी लाएगी

कौन हैं बृजेश सिंह Also Read - UP आते ही मुख्तार अंसारी की बढ़ीं मुश्किलें, योगी सरकार रद्द करवाएगी विधानसभा सदस्यता

बृजेश सिंह उर्फ अरुण कुमार सिंह का जन्म वाराणसी के रविंद्र सिंह के परिवार में हुआ. रविंद्र सिंह काफी रसूखदार लोगों में गिने जाते थे. सिंचाई विभाग में काम कर रहे रविंद्र सिंह का आसपास के क्षेत्रों में काफी सम्मान था. वे अपने बेटे बृजेश सिंह को IAS अधिकारी बनाना चाहते थे. बृजेश सिंह भी अपने पिता के सपने को साकार करने के लिए उन सपनों में रम जाते हैं और पढ़ाई करने लगते हैं. 1984 में 12वीं कक्षा की परीक्षा में उन्हें काफी अच्छे अंक प्राप्त हुए थे. इसके बाद बृजेश सिंह ने वाराणसी के यूपी कॉलेज में दाखिला ले लिया. अपने पढ़ाई के दिनों में बृजेश सिंह बेहद होनहार छात्र थे.

बृजेश सिंह कैसे बने बाहुबली

दरअसल एक जमीन के विवाद में 27 अगस्त 1984 को बृजेश सिंह के पिता रविंद्र सिंह की वाराणसी के धरहरा गांव में हत्या कर दी गई. इस हत्या को उनके विरोधी हरिहर और पाचू सिंह ने अंजाम दिया ता. पिता की मौत ने बृजेश सिंह जो कभी IAS बनने का ख्वाब देख रहे थे, उन्हें पूर्वांचल का माफिया बना दिया. IAS बनकर देशसेवा करने की सोच रखने वाले बृजेश सिंह की किस्मत को कुछ और ही मंजूर था और बृजेश सिंह ने अपने पिता के मौत का बदला लेने का ख्वाब पाल लिया और उन्होंने इसी कारण अपराध की दुनिया में कदम रखा.

पिता की मौत का बदला

जिस दीवार पर कभी UPSC परीक्षा से संबंधित विषय वस्तु की तस्वीरें लगी होती थीं, वहां अब बृजेश सिंह ने अपने पिता की तस्वीर और पाचू और हरिहर सिंह की तस्वीर को लगा दिया. अपने पिता की हत्या का बदला लेने के लिए बृजेश सिंह काफी तड़पे. इसके लिए उन्हें सालभर का लंबा इंतजार भी करना पड़ा. 27 मई 1985 को बृजेश सिंह अपने पिता के हत्यारे के घर जब पहुंचे तो वह खाना खा रहा था. इस दौरान बृजेश सिंह ने कहा कि चाचा खाना जल्दी खा लो, मैं आपको मारने आया हूं. इतना कहने के बाद बृजेश सिंह ने एक के बाद एक कई गोलियां अपने पिता के हत्यारे के सीने में उतार दी. हरिहर सिंह की हत्या पहला ऐसा मामला था, जब बृजेश सिंह के ऊपर पुलिस FIR दर्ज की गई. कहते हैं कि इस घटना में बृजेश सिंह ने AK47 हथियार का इस्तेमाल किया जिसके बाद पूरे राज्य में बृजेश सिंह का नाम फैल गया.

हत्या का सिलसिला शुरू

हरिहर सिंह को मौत के घाट उतारने के बाद बृजेश सिंह का गुस्सा शांत नहीं हुआ और उन्होंने उन लोगों की भी तलाश शुरू की जो बृजेश के पिता रविंद्र सिंह की हत्या में शामिल थे. 9 अप्रैल 1986 को बनारस का सिकरौरा गांव अचानक गोलियों की आवाज से गूंज उठा. दरअसल बृजेश सिंह ने अपने पिता की हत्या में सामिल रहे 5 लोगों को एक साथ गोलियों से भून डाला. इस घटना के बाद पहली बार ऐसा था जब बृजेश सिंह को पुलिस ने गिरफ्तार किया.

जेल की दोस्ती

पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद माफिया बृजेश सिंह को जेल भेज दिया गया. इसके बाद जेल में बृजेश सिंह की मुलाकात गाजीपुर जिले के मुडियार गांव के त्रिभुवन सिंह से हुई. हालांकि शुरुआती दौर में बृजेश और मुख्तार की कोई रंजिश नहीं थी. लेकिन त्रिभुवन सिंह से मुख्तार अंसारी की दुश्मनी पहले से ही थी. हालांकि बाद में सरकारी ठेकों पर कब्जे के चले मुख्तार और बृजेश के बीच दुश्मनी की शुरुआत हुई थी. लेकिन इस दुश्मनी से पहले त्रिभुवन और बृजेश की दोस्ती खूब फली फूली और दोनों ने मिलकर यूपी में रेशम, शराब, रेलवे, कोयले इत्यादि सभी के धंधे में हाथ आजमाया और ठेकेदारी पर कब्जा करना शुरू किया. अबतक कोयले की ठेकेदारी पर एक छत्र राज कर रहे मुख्तार अंसारी को यह बात पची नहीं और यही वह वक्त था जब तय हो गया कि लावा फटने वाला है और इस लावे से पूर्वांचल का तापमान बढ़ने वाला है.

बृजेश की गलती

बृजेश सिंह जो अपने हर फैसले को बेहद सोच समझकर लेने के लिए जाने जाते हैं. उनसे एक गलती यह हुई कि मुख्तार की ताकत को पहचानने में उन्होंने गलती कर दी. दरअसल मुख्तार एक ऐसे परिवार से आते हैं जिसमें सभी लोग बड़े बड़े ओहदों पर तैनात हैं. जब मुख्तार अपराध जगत में आए तो इस दौरान उनके दोनों भाई विधायक थे यानी उनके पास राजनीतिक सपोर्ट मौजूद था, लेकिन बृजेश ने यहीं गलती कर दी और मुख्तार से लोहा लेने लगे. इस बीच दोनों गैंग के बीच कई बार गोलीबारी की घटना हुई, दोनों पक्ष के कई लोगों की मौत हुई. पूरे पूर्वांचल में इनकी दुश्मनी के चर्चे अखबार के पन्नों से लेकर लोगों की जुबान तक पे छा गई थी. लेकिन राजनीतिक परिवार से आने के कारण मुख्तार अंसारी ने पुलिस और नेताओं पर दबाव बनाकर बृजेश के पीछे पुलिस को लगा दिया और बृजेश को कानूनी मामलों में उलझा दिया.

बृजेश के भाई की हत्या

मुख्तार संग दुश्मनी में बृजेश सिंह के चचेरे भाई सतीश सिंह की हत्या कर दी गई. इस घटना के बाद पूरा पूर्वांचल दहल गया. बता दें कि इस घटना को तब अंजाम दिया गया जब बृजेश के भाई चौबेपुर में एक दुकान पर चाय पी रहे थे. इस दौरान बाईक पर सवार कुछ बदमाश वहां आते हैं गोलियां बरसाते हुए वहां से फरार हो जाते हैं. बृजेश के भाई की मौत मौके पर ही हो जाती है. ऐसे में पूरे पूर्वांचल को यह डर था कि शायद अब पूर्वाचल में गोलीबारी और गैंगवॉर अपने चरम पर पहुंचने वाली है.

बृजेश पर लगातार हमले

बृजेश सिंह के पीछे एक तरफ मुख्तार ने पूरे पुलिस फोर्स को राजनीतिक दबाव से लगा रखा था, वहीं दूसरी ओर मुख्तार व उसका गैंग बृजेश सिंह के पीछे हाथ धोकर पड़ा हुआ था. बृजेश सिंह के खास दोस्त यानी पूर्वांचल की भाषा में राईट हैंड अजय खलनायक पर भी हमला किया गया, हालांकि इस घटना में अजय खलनायक बच निकले. लेकिन इस हमले का आरोप मुख्तार अंसारी पर लगा.

पुलिस बनकर किया हत्या

अपने सबसे करीबी मित्र त्रिभुवन सिंह के भाई की हत्या का बदला लेने के लिए बृजेश सिंह और त्रिभुवन सिंह दोनों पुलिस के वेश में गाजीपुर के एक अस्पताल में पहुंचे. यहां साधु सिंह का इलाज हो रहा था. दोनों बाहुबलियों ने साधू सिंह को गोलियों से भून डाला. इस घटना के बाद बृजेश की चर्चा पूरे देश में होने लगी. इसी के बाद बृजेश सिंह की एंट्री दाऊद गैंग में हो जाती है और जेजे अस्पताल में जो गोलीबारी होती है, उससे पूरा मुंबई शहर सिहर जाता है. बृजेश सिंह पर आरोप है कि मुंबई के जेजे अस्पताल में घुसकर गवली गिरोह के शार्प शूटर समेत 4 पुलिसकर्मियों को बृजेश सिंह ने हत्या कर दी.

राजनीतिक पारी और शरण

साधू सिंह की हत्या के बाद बृजेश सिंह पूर्वांचल में अपने दबदबे को खोने लगे और मुख्तार की ताकत और बढने लगी. ऐसे में गाजीपुर जिले में मुख्तार की ताकत को चनौती देने व खुद के राजनीतिक शरण के लिए बृजेश सिंह ने गाजीपुर के कृष्णानंद राय का दामन थामा. कृष्णानंद राय का संरक्षण मिलने के बाद बृजेश की दिक्कतें कम होने लगीं. कहते हैं कि मुहम्मदाबाद क्षेत्र से मुख्तार के विधायक भाई को कृष्णानंद राय ने हरा दिया और यह अपमान मुख्तार अंसारी को पसंद नहीं आई. यही नहीं बृजेश सिंह के पीछे मुख्तार गैंग हाथ धोकर पड़ा था लेकिन कृष्णानंद राय के कारण बृजेश सिंह तक पहुंच पाना किसी के लिए संभव नहीं था. आरोप है कि इसी कारण मुख्तार अंसारी ने अपने शूटर मुन्ना बजरंगी के व अन्य शूटरों के माध्यम से उसरी चट्टी पर कृष्णानंद राय की हत्या करवा दी. इस हत्याकांड में 400 राउंड गोलियों व कई तरह के भयंकर हथियारों का इस्तेमाल किया गया था.

उड़ीसा से माफिया की गिरफ्तारी

कृष्णानंद राय की हत्या के बाद बृजेश सिंह का राजनीतिक संरक्षण छिन चुका था, इसके बाद पूर्वांचल के अखबारों में एक खबर आती है कि बृजेश सिंह की मौत गैंगवॉर में हो गई. लेकिन उड़ीसा से दिल्ली पुलिस एक शख्स को गिरफ्तार करती है. इस शख्स के बारे में जानकारी जुटाने पर पता चलता है कि पूर्वांचल का माफिया बृजेश सिंह है. ऐसे में बृजेश सिंह तभी से पुलिस की गिरफ्त में हैं और मामले की पेशी के लिए कई जिलों की कोर्ट में उनकी पेशी होती रहती है.