नई दिल्ली: गूगल डूडल आज दुनिया की पहली महिला इंजीनियरों में से एक एलिसा लियोनिडा जमफिरेसको को याद कर रहा है. उनका जन्म 10 नवंबर, 1887 को गलाती रोमानिया में हुआ था. एलिसा लियोनिडा ने बुखारेस्ट स्थित सेंट्रल स्कूल ऑफ गर्ल्स से अच्छे नंबरों के साथ हाई स्कूल की परीक्षा पास की थीं. लेकिन उन्हें हायर एजुकेशन हासिल करने और करियर बनाने में तमाम मुश्किलों का सामना करना पड़ा. उन्होंने जब हायर एजुकेशन के लिए आवेदन किया तो उनका आवेदन इसलिए रद्द कर दिया गया था क्योंकि वह एक महिला थीं. Also Read - Google Doodle On Pu La Deshpande: कौन थे पुरुषोत्तम लक्ष्मण देशपांडे, जिन्हें Google ने डूडल बनाकर किया याद

एलिसा लियोनिडा के पिता अतानासे लियोनिडा एक करियर अधिकारी थे, जबकि उनकी मां मातील्डा गिल एक इंजीनियर की बेटी थीं. उनका भाई भी इंजीनियर था. विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं के खिलाफ पूर्वाग्रहों के कारण, जमफेयर्सकू को बुखारेस्ट में स्कूल ऑफ ब्रिज और रोड्स द्वारा खारिज कर दिया गया था. 1909 में रॉयल एकेडमी ऑफ टेक्नोलॉजी बर्लिन ने उनके आवेदन को स्वीकार कर लिया. Also Read - गूगल ने जोहरा सहगल की याद में बनाया डूडल, जानिए आज का दिन क्यों है अहम

हालांकि यहां भी उन्हें भेदभाव का सामना करना पड़ा. एक बार संस्थान के प्रमुख ने उनसे कहा था कि बेहतर होता कि आप चर्च, बच्चे और किचन पर फोकस करतीं. उन्होंने 1912 में इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की. दावा किया जाता है कि एलिसा लियोनिडा दुनिया की पहली महिला इंजीनियरों में से एक थीं. Also Read - Google Doodle Arati Saha: जानें, कौन थीं 'भारत की जलपरी' Arati Saha, जिन्‍हें गूगल ने किया याद

ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने जिअलॉजिकल इंस्टिट्यूट जॉइन किया जहां प्रयोगशाला का नेतृत्व किया. पहले विश्व युद्ध के दौरान उनकी मुलाकात कॉन्सटैंटिन जमिफरसको से हुई और यह मुलाकात प्यार में बदल गई. बाद में दोनों ने शादी कर ली और उनको दो बेटियां हुईं.

एलिसा लियोनिडा ने फिजिक्स और केमिस्ट्री भी पढ़ाई की. अपने लैब के प्रमुख के तौर पर उन्होंने मिनरल्स और अन्य चीजों के अध्ययन के लिए नए तरीके एवं तकनीक का सहारा लिया. 75 वर्ष की उम्र में 1963 में उन्होंने रिटायरमेंट लिया. 25 नवंबर 1973 को 86 वर्ष की आयु में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया. वह एजीआईआरआर (रोमानियाई इंजीनियरों के जनरल एसोसिएशन) की पहली महिला सदस्य थी.बुखारेस्ट में उनके नाम पर एक सड़क का नाम रखा गया है.