नई दिल्ली. पीएम नरेंद्र मोदी ने देश के प्रधानमंत्री के तौर पर 4 दर्जन से ज्यादा बार विदेशों की यात्राएं की. केंद्र सरकार का दावा है कि इन यात्राओं से न सिर्फ दुनिया में देश की प्रतिष्ठा बढ़ी, बल्कि भारत में निवेश की संभावनाओं को बल मिला और कई विदेशी निवेशकों ने देश के उद्योग जगत को बढ़ाने के लिए यहां पैसे लगाए. अब जबकि केंद्र में सत्तारूढ़ सरकार का कार्यकाल पूरा होने में कुछ ही महीने बचे हैं, आने वाले मार्च-अप्रैल में लोकसभा के चुनाव होने हैं, सरकार पीएम मोदी की इन विदेश यात्राओं को ‘संजो’ कर रखने वाली है. पीएम की विदेश यात्राओं को संजोने का मतलब यह है कि सरकार इन यात्राओं को लेकर एक कॉफी-टेबल बुक का प्रकाशन कराने जा रही है. इस कॉफी-टेबल बुक में पीएम मोदी की सभी विदेश यात्राओं के बारे में जानकारी होगी. साथ ही इसमें यह भी बताया जाएगा कि पीएम की इन यात्राओं से देश को क्या हासिल हुआ. खासकर, कॉफी-टेबल बुक में उन यात्राओं पर विशेष फोकस किया जाएगा जिससे देश को सार्थक और सकारात्मक परिणाम हासिल हुए.

कॉफी-टेबल बुक की 1500 प्रतियां छपेंगी
अंग्रेजी वेबसाइट इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक, पीएम मोदी की विदेश यात्राओं पर विपक्षी दल हमेशा निशाना साधते रहे हैं. इन यात्राओं और इससे देश को हासिल होने वाले निवेश को लेकर सरकार पर सवाल भी उठाए जाते रहे हैं. सरकार ने इन्हीं सवालों और विपक्ष को जवाब देने के लिए कॉफी-टेबल बुक प्रकाशित करने का फैसला लिया है. सरकार ने निर्णय लिया है कि इस कॉफी-टेबल बुक की 1500 प्रतियां छापी जाएंगी, जिन्हें राजनीतिज्ञों, विदेशी डिप्लोमैट और भारतीय दूतावासों के बीच बांटा जाएगा. सरकार की मंशा है कि इस कॉफी-टेबल बुक के प्रकाशन से एक तरफ जहां विदेशी कूटनीति के क्षेत्र में भारत की सफलताओं के बारे में जाना जा सकेगा, वहीं दूसरी ओर मई 2014 के बाद इन विदेश यात्राओं से देश को मिले लाभों के बारे में भी लोगों को बताया जा सकेगा. खासकर, नरेंद्र मोदी के सरकार में आने के बाद जिस तरह भारत अपने को वैश्विक एजेंडे के केंद्र में रखने में सफल हुआ है, यह कॉफी-टेबल बुक इस कहानी को भी बयां करेगा. सरकार की तरफ से बताया गया है कि इस कॉफी-टेबल बुक में पीएम मोदी की हर देश की यात्रा के बारे में 10 प्वाइंट्स में जानकारी दी जाएगी. इन बिंदुओं में यह बताया जाएगा कि भारत ने किस देश के साथ किस चीज के लिए समझौता किया, उस देश के साथ भारत का अंतरराष्ट्रीय संबंध कैसा है और इस समझौते से देश को क्या हासिल हो पाया.

मैंने जो किया वो सही या गलत, ये जनता तय करेगी, पढ़ें PM मोदी के इंटरव्यू की 25 बड़ी बातें

पीएम मोदी की 48 यात्राओं पर 2 हजार करोड़ खर्च
पीएम मोदी की विदेश यात्राओं को लेकर संसद या इससे बाहर अक्सर ही सवाल किए जाते रहे हैं. कई विपक्षी दल पीएम की विदेश यात्राओं को लेकर तंज तक कसते रहे हैं. वहीं, कुछ राजनीतिक दल इन यात्राओं से देश को हासिल होने वाले विदेशी निवेश को लेकर भी सवाल करते रहे हैं. सरकार ने इन सभी सवालों का जवाब संसद के शीत सत्र में दिया. पिछले दिनों संसद में सरकार ने एक सवाल के जवाब में बताया था कि पीएम मोदी की विदेश यात्राओं पर 2 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम खर्च की गई. पीएम मोदी ने अपने प्रधानमंत्रित्व काल में कुल 48 यात्राएं की हैं. इन यात्राओं के दौरान चार्टर्ड एयरक्राफ्ट पर जहां 429 करोड़ रुपए खर्च हुए, वहीं एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस का खर्च 1592 करोड़ रुपए रहा. संसद में दिए गए अपने जवाब में सरकार ने यह जानकारी दी थी कि पीएम मोदी की इन यात्राओं से देश को सिर्फ वर्ष 2017 में ही 60 बिलियन डॉलर यानी 60 अरब रुपए विदेशी निवेश हासिल हुआ. यह 2014 के बाद तीन वर्षों में हुए कुल निवेश का 67 प्रतिशत था.

पीएम मोदी की विदेश यात्रा पर खर्च हुए इतने सौ करोड़, अब तक की 84 देशों की यात्रा

जहां-जहां गए पीएम, वहां से आया निवेश
पीएम मोदी अपने कार्यकाल के दौरान 2014 से लेकर 2018 के बीज जिन-जिन देशों में भी गए, उनमें से टॉप-10 देशों से भारत को बड़ी तादाद में विदेशी निवेश हासिल हुआ. इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक, सरकार ने कहा है कि सिंगापुर, जापान, नीदरलैंड्स, अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, यूएई, चीन, फ्रांस और दक्षिण कोरिया जैसे देश हैं, जहां के निवेशकों ने भारत में निवेश किया है. सरकार द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक वर्ष 2014 से लेकर 2018 के बीच 1 लाख 36 हजार मिलियन डॉलर से ज्यादा का निवेश हुआ. यह यूपीए की मनमोहन सिंह सरकार में वर्ष 2011 से लेकर 2014 तक में हुए निवेश से कहीं ज्यादा है. मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री रहते हुए इन तीन वर्षों में 81 हजार मिलियन डॉलर से ज्यादा का विदेशी निवेश हुआ था. सरकार का कहना है कि कॉफी-टेबल बुक पीएम मोदी की इसी सफलता की कहानी को बयां करेगा.