राजस्थान का दौसा (dausa) जिला. राजनैतिक रूप से इसे उस शख्स ने पहचान दिलाई जो कभी दिल्ली के लुटियन जोन में गाय की सेवा से लेकर दूध बेचने तक का काम करता था. वह एक म्यूनिसिपिल बोर्ड स्कूल में पढ़ाई करके भारतीय वायुसेना में क्वालिफाई करने का ख्वाब ही नहीं देखा, बल्कि पूरा भी किया. साल 1971 में पाकिस्तान के साथ हुए युद्ध में भारतीय सेना के साथ शामिल होता है और फिर साल 1980 में नौकरी छोड़ राजनीति में उतर जाता है. जो यूपी के बागपत से टिकट मांगता है और इंदिरा गांधी उसे राजस्थान के भरतपुर से उतारती हैं. वही शख्स साल 1984 में दौसा से चुनाव लड़ता है और फिर जीवन के अंतिम दिन तक उस जिले की दूसरी पहचान वही होता है. हम बात कर रहे हैं कांग्रेस नेता राजेश पायलट की. आज उनके बेटे सचिन पायलट को राज्य में सीएम फेस के तौर पर देखा  जा रहा है.

दौसा जिले में घुसते ही हमें एक चमचमाती सड़क दिखाई दी. सड़क की शुरुआत से पहले ही एक बाजार में बीजेपी के नेता जनसंपर्क कर रहे थे. हमने वहां चुनाव का हाल जानना चाहा. बीजेपी प्रत्याशी के समर्थक वहां दुकानों, सड़क और घर के बाहर खड़े लोगों को पार्टी सिंबल लगी टोपी और गले में दुपट्टा पहना रहे थे. सिर पर बीजेपी सिंबल लगी टोपी पहने साधुराम जाट से हमने पूछा कि शहर का क्या मिजाज है? उन्होंने एक झटके में कहा, बीजेपी जीत रही है. तभी उनके बगल में खड़े महेंद्र ने चुटकी लेते हुए कहा कि एक घंटे पहले तक तो निर्दलीय जीत रहा था. साधुराम ने मुस्कराते हुए कहा कि ऐसे तो पूरे राजस्थान में कांग्रेस जीत रही है. लेकिन मैं निर्दलीय को वोट दूंगा. मैंने पूछा कि ये बात आप बीजेपी की टोपी पहने हुए कह रहे हैं तो उन्होंने टोपी निकाली और बगले में खड़े सुरेश मीणा के सिर पर पहना दी.

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सुरेश मीणा ने बताया कि राज्य में कांग्रेस आ रही है. लेकिन 40-50 निर्दलीय भी जीतेंगे. वसुंधरा क्यों नहीं आ रही हैं? सवाल पर दुकान की तरफ खड़े 4-5 लोगों की तरफ देखते हुए कहा कि क्यों वोट दें? नाराजगी क्या है सवाल पर उन्होंने कहा, भैया खाली हर चीज में आधार कार्ड ही मिलाते रह गए हैं ये लोग. कांग्रेस की तरफ से सीएम फेस कौन होगा के सवाल पर उन्होंने कहा कि गहलोत और पायलट में से कोई हो जाए. ये उनका मामला है, हम क्यों बीच में पड़े. हालांकि, उन्होंने ये जरूर कहा कि मोदी 28 नवंबर को आ रहे हैं, देखते हैं वह क्या कहते हैं. उसके बाद ही कुछ कहा जाएगा.

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चमचमाती सड़क से हम दौसा की तरफ आगे बढ़े. सड़क काफी अच्छी थी और जर्क नाम की कोई चीज नहीं थी. दौसा शहर में पहुंचते ही एक दुकान पर खड़े कुछ लोगों से हमने सड़क के बारे में सवाल किया. दौलतराम मीणा ने कहा कि देखिए वसुंधरा जी ने बनवाया है. उनकी बात काटते हुए रामसाई ने कहा कि राजेश पायलट के जमाने में पास हुई थी ये सड़क. गहलोत ने काम शुरू कराया. इस बीच दोनों पक्षों से एक-दो लोग और जुड़ गए और क्रेडिट लेने की होड़ मच गई. यहां सिर्फ ये चीज देखने को मिली कि साल 2000 में जिस शख्स राजेश पायलट की एक हादसे में जान चली जाती है, उसकी चर्चा साल 2018 में भी हो रही है.

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यहां से हम दौसा कांग्रेस के दफ्तर में पहुंचते हैं. कार्यालय में चहल-पहल थी और लोग चाय की चुस्की ले रहे थे. किस मुद्दे पर चुनाव लड़ रहे हैं कि सवाल पर वहां बैठे कजोड़ मीना ने कहा कि विकास. गहलोत के किए कामों पर. बीजेपी के झूठ के खिलाफ. नोटबंदी, किसान, युवाओं को रोजगार और राफेल में भ्रष्टाचार के खिलाफ. वसुंधरा की नाकामी पर. स्थिति क्या है यह पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि जिले की सभी सीट जीत रहे हैं. इसके पीछे उनका तर्क ये भी था कि सांसद जी खुद ही बीजेपी छोड़ कांग्रेस में आ गए हैं. हालांकि, उन्होंने थोड़ा धीमे स्वर में ये जरूर कहा कि 28 को नरेंद्र मोदी आ रहे हैं. देखते हैं उसके बाद क्या स्थिति बनेगी. इस बीच वहां से चाय लेकर गुजर रहे एक शख्स ने कहा कि अब जलवा खत्म हो गया है उनका. कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा.

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कांग्रेस दफ्तर से निकल हम रास्ते में एक जगह बैठे 4-5 लोगों से बीजेपी कार्यालय का पता पूछते हैं. वह हमें पता बताते हैं, इस बीच हम सवाल करते हैं कि बाबा चुनाव कौन जीत रहा है. दो-तीन लोग हमारी तरफ देखते हुए कहते हैं कि बीजेपी भैया बीजेपी. हम कुछ कदम आगे बढ़ते हैं और फिर उनके पास लौटकर बात शुरू करते हैं. पहले उन्हें विश्वास दिलाने की कोशिश करते हैं कि बीजेपी दफ्तर का पता पूछ रहे हैं, बीजेपी के नेता-कार्यकर्ता नहीं हैं. हम दिल्ली से बस चुनाव का माहौल देखने आए हैं. इस पर वे धीरे-धीरे खुलते हैं और बताते हैं कि जिले में इस बार कांग्रेस जीत रही है. इसके पीछे वसुंधरा राजे के खिलाफ नाराजगी को कारण बता रहे हैं.

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वहां से हम बीजेपी दफ्तर में पहुंचते हैं. कुछ दूरी से ही बीजेपी के पक्ष में वोट देने के लिए एक गाना बज रहा था. दफ्तर में घुसने पर वहां एक तरफ लोग चुनावी चर्चा में मशगूल थे तो दूसरी तरफ कुछ लोग पर्चियां बना रहे थे. चुनाव का क्या माहौल है के सवाल पर उन्होंने कहा कि बीजेपी सभी सीट जीत रही है. वहां बैठा युवा अपना नाम श्रवण सिंह राजपूत (राजपूत बोलते समय उन्होंने काफी जोर लगाया) बताया. किस मुद्दे पर वह लोग चुनाव में उतरे हैं और प्रचार कर रहे हैं तो श्रवण ने तुरंत कहा कि हिंदुत्व. मैंने कहा और कोई मुद्दा. तो वह हंसते हुए कहते हैं कि विकास. मैंने कहा, माहौल पक्ष में तो नहीं लग रहा तो वह कहते हैं कि 28 को आ रहे हैं मोदी जी. फिर देखिएगा. अभी तो चुनाव 7 दिसंबर तक है न.

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राजस्थान के दौसा जिले में आज भी पहुंचने पर राजेश पायलट का नाम लिया जाता है. यहां विधानसभा की 5 सीटें हैं. दौसा, लालसोट, बांदीकुई, सिकराय और महुआ. साल 2013 की बात करें तो दौसा से बीजेपी के शंकर लाल शर्मा, लालसोट से एनपीपी के डॉ. किरोरी लाल मीना, बांदीकुई से बीजेपी की अल्का सिंह, सिकराय से नेशनल पीपुल पार्टी की गीता वर्मा और महुआ से बीजेपी के ओमप्रकाश को जीत मिली थी. ऐसे में देखा जाए तो जिले में मौजूदा समय में कांग्रेस के पास एक भी विधायक नहीं है. हालांकि, साल 2014 के चुनाव में बीजेपी से सांसद बने हरीश मीणा हाल ही में कांग्रेस में शामिल हो गए हैं. उन्होंने अपने भाई कांग्रेस नेता नमोनारायण मीणा को हराया था.