नई दिल्ली. भारत के पड़ोसी देश नेपाल का एक पहाड़ी समुदाय दुनियाभर में अपनी अदम्य वीरता और साहस के लिए जाना जाता है. यह समुदाय है गोरखा. भारतीय सेना समेत विश्व के कई देशों में अद्भुत वीरता और लड़ाई करने की क्षमता के लिए जाने जाने वाले इन गोरखा जवानों को सम्मानपूर्वक तैनाती दी जाती है. भारतीय सेना के इतिहास में गोरखा जवानों की वीरता के कई किस्से भरे पड़े हैं. इन दिनों ये गोरखा जवान सिंगापुर में इस महीने के आखिरी दिनों में होने वाली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उत्तर कोरिया के राष्ट्रपति तानाशाह किम जोंग उन की बैठक को लेकर चर्चा में हैं. विश्व की दो चर्चित हस्तियों के बीच होने वाली इस बैठक का महत्व देखते हुए सिंगापुर के शांगरी-ला होटल में इन गोरखा जवानों को तैनात किया गया है. हालांकि दोनों ही देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ उनके निजी सुरक्षागार्ड रहेंगे, लेकिन सिंगापुर पुलिस ने इस अंतरराष्ट्रीय समिट के दौरान होटल और आसपास की सुरक्षा के लिए गोरखा जवानों को तैनात करने का फैसला किया है. Also Read - व्हाइट हाउस से विदाई के बाद पहले भाषण में डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर क्यों साधा निशाना, कहा...

सिंगापुर में 1800 गोरखा जवान दे रहे हैं सेवा
गोरखा सिर्फ नेपाल में ही पाए जाते हैं. सिंगापुर में आम दिनों में इनकी इक्का-दुक्का मौजूदगी ही लोगों को दिखती है. हालांकि सिंगापुर पुलिस के किसी अधिकारी ने इस बैठक के लिए गोरखा जवानों की तैनाती के बारे में कोई भी जानकारी देने से इनकार किया. लेकिन हमारी सहयोगी वेबसाइट डीएनए को सिंगापुर स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटजिक स्टडीज के विशेषज्ञ टिम हक्सले ने बताया कि युद्ध के मोर्चे पर खतरनाक जंग लड़ने के लिए प्रसिद्ध गोरखा जवानों को इस बैठक के दौरान सुरक्षा के लिए तैनात किया जाएगा. उन्होंने बताया, ‘गोरखा जवानों की वीरता और उनके साहसिक प्रदर्शन के रिकॉर्ड को देखते हुए उन्हें विशेष प्रयोजनों पर लगाया जाता है. उन्हें ट्रेनिंग भी इसी के लिए दी जाती है.’ डीएनए के अनुसार वर्तमान में सिंगापुर पुलिस में कम से कम 1800 गोरखा जवान सेवा दे रहे हैं. Also Read - जो बाइडन ने अमेरिका में वैध आव्रजन को रोकने वाले प्रतिबंध को हटाया

सिंगापुर का होटल शांगरी-ला, जहां ट्रंप और किम जोंग की बैठक होनी है.

सिंगापुर का होटल शांगरी-ला, जहां ट्रंप और किम जोंग की बैठक होनी है. (फोटो साभारः होटल शांगरी-ला सिंगापुर)

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पारामिलिट्री ऑपरेशन में काम आते हैं ये जवान
टिम हक्सले ने डीएनए को बताया कि सिंगापुर जैसे देश में गोरखा जवानों की तैनाती मायने रखती है. क्योंकि यहां दुनिया के विभिन्न देशों के लोग अपने परिवार के साथ रहते हैं. किसी भी तरह के क्षेत्रीय तनाव की स्थिति पैदा होने पर स्थानीय सिंगापुर पुलिस के मुकाबले ये गोरखा जवान ज्यादा कारगर साबित होते हैं. खासकर वीआईपी सुरक्षा और दंगा-निरोधी फोर्स के रूप में गोरखा जवानों की उपयोगिता बेहतर होती है. सिंगापुर पुलिस की वेबसाइट के अनुसार ‘अदम्य साहस, हमेशा चौकन्ने रहने वाले और वफादार’ गोरखा जवानों को सिंगापुर में पारामिलिट्री ऑपरेशंस में लगाया जाता है. हक्सले ने बताया कि इनकी वीरता और साहस को देखते हुए इन्हें मलेशिया-सिंगापुर बॉर्डर पर तैनात किया जाता है. 18 से 19 साल की अवस्था में सिंगापुर पुलिस में भर्ती होने वाले ये जवान 45 वर्ष की उम्र तक अपनी सेवा देते हैं. हालांकि सिंगापुर सरकार के नियमों के अनुसार इन गोरखा जवानों को स्थानीय महिलाओं से शादी करने की इजाजत नहीं दी जाती.