जब आप अमिताभ बच्चन होते हैं, तो आप सिर्फ आप नहीं होते हैं…, आपके साथ पूरी शख्सियत होती है. फिल्म इंडस्ट्री का नाम होता है. मायानगरी की माया का जाल होता है. दो मिनट के लिए सोचकर देखिए, अगर आप सुबह में बिस्तर छोड़ें और महानायक अमिताभ बच्चन हो जाएं! तो क्या होगा? आप अनुभव करेंगे कि आपका कद अचानक कुछ लंबा हो गया है, तकरीबन 6 फीट से ज्यादा लंबा, जितने कि अमिताभ हैं (मुझे ये नहीं मालूम अमिताभ बच्चन की वास्तविक लंबाई कितनी है). आपका घर मुंबई हो जाएगा, जहां पहले से ही ढेरों (करोड़ों) लोग रहते हैं. अगर आप छोटे शहर के रहने वाले हैं और अचानक मुंबई के बाशिंदे हो गए हैं, तो सोचिए सुबह उठते ही दूध, अखबार, राशन के लिए कहां जाना है, आपको पता ही नहीं चलेगा. खैर, अमिताभ बच्चन होने के बाद की समस्याएं बहुतेरी हैं. लेकिन सबसे बड़ी समस्या है, आपका स्टार हो जाना.

पंजाबी भाषा के प्रसिद्ध कवि पाश ने तो बस इतना कहा था कि ‘सबसे कठिन है मुर्दा शांति से भर जाना…’, लेकिन ‘स्टार’ होने के बाद की क्या परेशानियां हैं, इसका अंदाजा पाश को भी नहीं रहा होगा. स्टार…, फिर सुपरस्टार और फिर अंततः महानायक बन जाना. दो मिनट नितांत स्वार्थी होकर विचार करिए, कभी-कभी किसी आनंददायक क्षण में जब आप खुश होते हैं तो जिस तरह आपके चेहरे पर हल्की-हल्की हंसी आती है, क्या महानायक बनने की ‘फीलिंग’ के बाद वैसी हंसी आएगी? शायद आए या नहीं भी आए. लेकिन जिसे हर वक्त महानायक बने रहना है, उसके बरक्स सोचें तो! हम जिन्हें आम जनता कहते हैं, ‘मैंगो पीपुल’, उनके लिए क्या यह संभव है कि वह अपनी बेटी को तो फिल्मी दुनिया से दूर रखें, लेकिन होने वाली बहू के साथ रुपहले पर्दे पर ठुमके लगाएं? लेकिन अमिताभ बच्चन बनने के बाद आपको यह भी करना पड़ सकता है. मैं यूं ही नहीं कह रहा कि बहुत कठिन है अमिताभ बच्चन हो जाना.

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अमिताभ सिर्फ नाम नहीं है, अभिषेक का पापा भी है
आपको क्या लगता है, अमिताभ बच्चन सिर्फ एक नाम है? नहीं! एक पूरा अभिनय-शास्त्र है, जिसमें सभी 9 रसों का समावेश है. जया बच्चन का पति है, जो अपने फिल्मी करियर के शुरुआती दिनों में ‘स्टार’ पत्नी के साथ शूटिंग-सेट पर आते हुए झिझकता होगा. वह संघर्ष करने वाला नायक भी है, जिसे खुद की फिल्म हिट कराने के लिए कामयाब ‘फॉर्मूले’ की जरूरत पहले भी पड़ती थी और आज भी पड़ती है. अमिताभ होना, राजनीति में कूदने का काम भी है और उसमें भयानक तरीके से मिलने वाली असफलता का उत्कर्ष झेलने की क्षमता रखना भी है. और तो और, अमिताभ होने के बाद आपको अभिषेक बच्चन का पापा भी बनना पड़ेगा. बेटे की कई सफल फिल्मों और उसके अच्छा अभिनेता होने के बावजूद यह सुनने का दर्द भी झेलना पड़ेगा, ‘तुमसे न हो पाया बेटा’.

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कुछ देर के लिए सोचिए, अगर किसी पिता की दो संतानें हैं, दोनों अपने-अपने क्षेत्र में ‘सेटल’ हो चुकी हैं और उनमें से एक के बारे में इस तरह की टिप्पणी सरे-बाजार सुनने को मिले, तो उस पिता के दिल पर क्या बीतती होगी. खासकर तब, जबकि आप अमिताभ बच्चन हैं, जिन्होंने बेटी को तो शादी करके उसकी ससुराल शिफ्ट कर दिया और बेटे को ‘महानायक’ के पदचिह्नों पर चलने का टास्क दे दिया. बेटा चला भी, ऐसा नहीं था कि उसे चलना नहीं आता था, लेकिन लोग उसकी लंबाई में बाप का कद नापते थे, बेटा ‘ठिगना’ नहीं था, मगर बाप जैसा ‘कद’ न पा सका. एक-दो नहीं, बल्कि कई ऐसी मुश्किलें हैं, जिसकी वैतरणी पार करने के बाद भी अमिताभ होना आसान नहीं है. फिर भी अगर आप अमिताभ बनना चाहते हैं, तो ‘सफल’ होने की जिद रखने वाले को आज तक कौन रोक सका है, जो मैं आपको रोकूंगा! जाइए…, हो जाइए अमिताभ.

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70 की उम्र में कोई रिटायर नहीं होने देगा आपको
अगर आप, अलसुबह अमिताभ बच्चन बनकर जागते हैं, तो एक बात तय समझिए, आपको ताउम्र समय पर ही जागना, उठना, काम करना, बोलना, विचारना, खान-पीना और सोना पड़ेगा. क्योंकि, भई आप अमिताभ बच्चन हैं, जिसका एक-एक पल ‘कीमती’ है. सरकारी नौकरी करते हुए आप 58, 60 या 65 साल में रिटायर हो जाते हैं. तगड़ा ‘जुगाड़’ है, तो कुछ साल और किसी आयोग, संस्था, संगठन या किसी कंपनी के चेयरमैन बन जाएंगे. लेकिन 70 के बाद? जी हां, 70 साल की उम्र आते-आते आपका मन रिटायरमेंट के बाद पेंशन और पॉलिसियों से आने वाले पैसे पर ‘ऐश’ काटने की पैरवी करने लगेगा. नौकरी करते हुए जितने पैसे बचाए होंगे, उससे अमिताभ बच्चन की फिल्में देखने, बीवी के साथ घूमने-फिरने, बच्चों के बच्चों के साथ समय बिताने का मन करेगा. लेकिन अगर आप अमिताभ बच्चन हैं, तो? समझ लीजिए, ऊपर लिखी सारी बातें बेकार हैं.

फोटो साभारः टि्वटर.

आपको 70 की उम्र में भी 35 साल वाले युवाओं की तरह ही कभी बालों में ‘नवरत्न’ तेल लगवाना पड़ेगा तो कभी ‘लड़कियां अगर NO कहती हैं तो इसका मतलब NO है,’ जैसे डायलॉग बोलने की प्रैक्टिस करनी पड़ेगी. ‘जिंदगी की दो बूंद’ पिलाने के लिए स्वास्थ्य उपकेंद्र पर जाना पड़ेगा या ‘कुछ दिन तो गुजारिए गुजरात में’ कहने के लिए गिर के जंगल की सैर करनी पड़ेगी. इतना सब कुछ करने के बाद भी आप ‘परफेक्टली’ अमिताभ हो ही जाएंगे, इसकी गारंटी नहीं है, क्योंकि करोड़ों लोगों को ‘करोड़पति’ बनाने का जिम्मा भी आप ही के ऊपर होगा. खूब सोचिए, तब जवाब दीजिएगा, अब भी अमिताभ बच्चन बनने का जी कर रहा है आपका?