नई दिल्ली: लड़का हो या लड़की, ख्वाहिश होती है कि ज़िंदगी ऐशोआराम वाली हो. घर, गाड़ी, बढ़िया नौकरी, घूमना-फिरना हो, लेकिन इसके उलट 22 साल की एक लड़की ने दुनिया का मोह त्याग दिया. 22 साल की ये लड़की चकाचौंध छोड़ वैराग्य की राह पर चल पड़ी. चमक धमक छोड़ सफ़ेद कपड़े धारण कर अध्यात्म की राह पकड़ ली. आपको साध्वी बनी सिमरन के इस फैसले से हैरानी जरूर होगी, लेकिन सिमरन ने कहा कि उसका आत्मविश्वास आसमान छू रहा है. वह अभिभूत हो गई हैं.

पानीपत की हैं रहने वालीं, इंदौर में ली दीक्षा
दरअसल, मुमुखी सिमरन जैन हरियाणा के पानीपत की रहने वाली हैं. 22 साल की सिमरन कुछ समय से इंदौर में थीं. यहीं उन्होंने साध्वी बनने का फैसला लिया. सिमरन को नया नाम साध्वी गौतमी मिला है. इंदौर के एक कॉम्प्लेक्स में सिमरन की दीक्षा शुरू हुई. जैन धर्म के शीर्ष मुनियों ने उन्हें दीक्षा दी. इस दौरान यहां सैकड़ों की संख्या में अन्य महिलाएं/साध्वियां मौजूद रहीं. ख़ास बात ये रही कि सिमरन के मां व पिता भी यहां मौजूद थे.

सिमरन ने पहले वीडियो शूट कराया

उच्च शिक्षित हैं सिमरन, संपन्न घर से रखती हैं ताल्लुक
संपन्न घर से ताल्लुक रखने वाली सिमरन पुणे से कंप्यूटर साइंस में ग्रेजुएट हैं. उन्हें एक्टिंग का भी शौक था, लेकिन उन्होंने सब कुछ छोड़ दिया. पिता अशोक जैन बताते हैं कि सिमरन ने पुणे से पढ़ाई की. देश में घूमी है. एक्टिंग का शौक था. बचपन में लगता था कि वह एक्टिंग में ही जाएगी, लेकिन सिमरन ने अध्यात्म को चुना. वह सभी खुश हैं.

साध्वी बनने से पहले दुल्हन की तरह सजी, वीडियो शूट कराया
सिमरन साध्वी बनने से पहले दुल्हन की तरह सजी. जेवर पहने. हाथों में मेहंदी लगाई. इतना ही नहीं सिमरन ने प्री दीक्षा वीडियो भी शूट कराया, जिसमें वह लाल, सफ़ेद व अन्य कई तरह की ड्रेस पहने दिख रही हैं. बेहद खूबसूरत लग रहीं सिमरन ने इसके बाद ये सब अपनी मां को दे दिया और सफ़ेद वस्त्र धारण कर लिए. उन्होंने अपना बाल भी त्याग दिए. उन्होंने इससे पहले अपना मनपसंद खाना खाया. अपने परिवार के साथ समय बिताया.

अपने परिवार के साथ सिमरन

सत्य के मार्ग पर चलना है, गरीबों की मदद करनी है
दीक्षा के दौरान सिमरन ने कहा कि उन्होंने इतनी उम्र में काफी घूमा. कई बहुत अच्छी जगहें देखीं. अब की ज़िंदगी में काफी आनंद लिया लेकिन कहीं भी शांति नहीं मिली. वह शांति चाहती हैं. इसके साथ ही वह अब गरीब बच्चों की मदद करना चाहती हैं. बच्चों को पढ़ाना चाहती हैं. साधना में लीन हो जाना चाहती हैं. उन्होंने कहा कि वह अभिभूत हैं. उनका आत्मविश्वास आसमान छू रहा है. उन्होंने कहा कि मुझे सत्य मार्ग पर चलना है. मुझे बेहद अच्छा लग रहा है.