शिमला: हिमाचल बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन की ओर से होने वाली परीक्षाओं में खराब रिजल्‍ट के असर शिक्षकों पर भी पड़ा है. हिमाचल सरकार के शिक्षा विभाग ने सरकारी स्कूलों के 38 स्नातकोत्तर शिक्षक (पीजीटी) की वार्षिक वेतन वृद्धि को रोक दिया है. सरकार ने यह कदम इन अध्‍यापकों के स्‍कूलों में खराब रिजल्‍ट के चलते उठाया है. हालांकि सरकार के इस कदम का विरोध भी किया जा रहा है. Also Read - इस साल प्राइवेट कंपनियों के कर्मचारियों को मिल सकता 10 फीसदी से ज्‍यादा इंक्रीमेंट

द ट्रिब्‍यून की रिपोर्ट के मुताबिक, हिमाचल सरकार ने बोर्ड परीक्षाओं में 25 फीसदी से कम परीक्षा परिणाम देने वाले शिक्षकों की वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने फैसला लिया था. राज्‍य सरकार ने इसी क्रम में 38 शिक्षकों की इस साल की वेतन वृद्धि को रोक दिया है. शिक्षकों और उनके स्कूलों के नाम उच्च शिक्षा विभाग की वेबसाइट पर डाले गए हैं. विभाग ने शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई करने का प्रस्ताव भी 50 प्रतिशत से कम परिणाम दिखाया.  जिन शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की गई है उनमें 10 कांगड़ा जिले में, बिलासपुर जिले में आठ, हमीरपुर जिले में छह, मंडी जिले में पांच, सोलन जिले में तीन, शिमला और उना जिलों में दो और कुल्लू और चंबा जिलों से एक-एक शिक्षक शामिल हैं.

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हिमाचल सरकारी शिक्षक संघ ने जताया विरोध
हिमाचल सरकारी शिक्षक संघ (एचजीटीयू) से विरोध प्रदर्शन के बावजूद, बोर्ड परीक्षाओं में 25 से 50 प्रतिशत से कम परिणाम वाले शिक्षकों पर बोर्ड की ओर से कार्रवाई की जा रही है. एचजीटीयू के अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने कहा कि परीक्षा परिणामों को प्रभावित करने वाले तथ्यों की जांच किए बिना और चेतावनी पत्र जारी किए बिना शिक्षकों को दंडित करना अन्याय है. उन्होंने कहा कि जल्द ही इस संदर्भ में मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री सहित शिक्षा सचिव और शिक्षा निदेशक को ज्ञापन सौंपा जाएगा.

पहली से आठवीं तक फेल न करने की नीति कम रिजल्‍ट के लिए जिम्‍मेदार
सरकारी नीति के अनुसार, पहली से आठवीं कक्षा तक फेल न करने की नीति भी बोर्ड परीक्षाओं में कम परिणाम आने के लिए जिम्मेवार है. इसके अलावा शिक्षकों से गैर शिक्षण कार्य लिए जा रहे हैं. जिसके कारण स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित होती है. सरकार को नीति में बुनियादी परिवर्तन करना चाहिए ताकि प्रत्येक वर्ग के बाद सीखने के स्तर का फैसला किया जा सके और कमजोर छात्रों को विशेष ध्यान दिया जा सके. उन्होंने कहा कि संघ इस तरह के एकपक्षीय और विरोधी शिक्षक निर्णयों को स्वीकार नहीं करेगा और निर्णय को वापस लेने के लिए भविष्य के कार्यवाही के बारे में बताएगा.