नई दिल्ली. ‘झूठ बोलना पाप है, नदी किनारे सांप है’. हमारे बुजुर्ग जीवन के इस फलसफे को इतनी आसान तुकबंदी में इसलिए सिखाते रहे हैं, ताकि हम छुटपन से ही असत्य से दूर रहें. लेकिन आजकल जिस तरह से फेक न्यूज (Fake News) या तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किए जाने का चलन बढ़ा है, उसमें यह कहावत सिर्फ तुकबंदी बनकर ही रह गई है. खासकर सत्ता के शिखर पर रहने वालों के द्वारा जब झूठ या गलत जानकारी या तथ्यों को उलट-पुलटकर पेश किया जाना चलन बन गया हो, तो फिर कहने को बच ही क्या जाता है. भारत में भी फेक न्यूज या सोशल मीडिया के जरिए झूठ फैलाने का चलन पिछले 3-4 वर्षों में अतिशय बढ़ गया है. अपने को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश कहने वाला अमेरिका भी इसकी गिरफ्त से बचा नहीं है. वहां तो खुद राष्ट्रपति पर ही झूठ या गलत जानकारी फैलाने के आरोप लगते रहे हैं. अमेरिकी अखबार वाशिंगटन पोस्ट (Washington Post) के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने अपने कार्यकाल के 700 दिनों में 7 हजार से ज्यादा बार झूठ बोला है या लोगों को गलत जानकारी दी है. वाशिंगटन पोस्ट, ट्रंप के इन झूठे बयानों की लगातार गिनती कर रहा है.

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डेढ़ दर्जन मुद्दों के लिए 7546 झूठ
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भाषणों में झूठ का सिलसिला बेरोकटोक जारी है. वाशिंगटन पोस्ट के विश्लेषण के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने लगभग डेढ़ दर्जन मुद्दों पर 700 दिनों में साढ़े 7 हजार से ज्यादा, यानी 7546 बार झूठ बोला है या जनता को गलत तरीके से जानकारी दी है. राष्ट्रपति ट्रंप ने इकोनॉमी, इमिग्रेशन, रोजगार, विदेश नीति, टैक्स व्यवस्था, अपराध, आतंकवाद, शिक्षा, व्यापार, रूस के साथ संबंध आदि जैसे मामलों पर अपने भाषणों या बयानों के जरिए जनता को गलत जानकारी दी है. अखबार ने ट्रंप के द्वारा दिए गए विभिन्न झूठे बयानों को बार-बार दोहराए जाने की भी गिनती की है. अखबार की वेबसाइट पर जारी फैक्ट-चेकर विश्लेषण पर ध्यान दें तो आप पाएंगे कि शायद ही कोई ऐसा मुद्दा हो, जिस पर अमेरिकी राष्ट्रपति ने गलत जानकारी नहीं दी है.

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ट्रंप बोलते हैं झूठ, लोग करते हैं यकीन
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के झूठ फैलाने वाले बयानों को लेकर वाशिंगटन पोस्ट में छपे एक अन्य आलेख की मानें तो प्रेसिडेंट के ऐसे बयानों पर उनके समर्थक भरोसा भी करते हैं. अखबार ने बीते दिनों राष्ट्रपति के झूठे बयानों को लेकर एक सर्वे भी कराया है. अखबार ने जनवरी 2017 से लेकर अब तक डोनाल्ड ट्रंप के बयानों और भाषणों के विश्लेषण के आधार पर बताया है कि इन दो वर्षों में शायद ही ऐसा कोई महीना बीता, जिसमें ट्रंप ने झूठा बयान नहीं दिया. इसमें रोचक बात यह है कि जनवरी 2017 के बाद से लगातार हर महीने डोनाल्ड ट्रंप के झूठे बयानों या भाषणों की संख्या बढ़ ही रही है. चाहे प्रवासियों के अमेरिका आने पर प्रतिबंध लगाने वाले आदेश पर हस्ताक्षर की बात हो या टैक्स बिल पर दस्तखत करने की बात, बॉर्डर सेपरेशन पॉलिसी हो या फिर मध्यावधि चुनाव, डोनाल्ड ट्रंप ने हर मसले पर झूठे बयान दिए या लोगों तक गलत जानकारी पहुंचाई है.