नई दिल्लीः अगले सप्ताह बुधवार को हम 72वां स्वतंत्रता दिवस समारोह मना रहे होंगे. तमाम लोग स्वतंत्र भारत के बीते 71 सालों की उलब्धियों और विफलताओं को लेकर चर्चा कर रहे होंगे. इन 71 सालों में भारत ने कई क्षेत्रों में काफी प्रगति की है. कई क्षेत्र ऐसे भी हैं जहां अपेक्षाकृत प्रगति नहीं हुई है. लेकिन इन अच्छाइयों और बुराइयों पर चर्चा से पहले एक नजर उस वक्त के भारत पर दौड़ा लेना चाहिए. 15 अगस्त 1947 को देश आजाद होने के साथ कई ऐसे क्षेत्र थे जहां पर तिरंगा नहीं फहराया जा सका था, क्योंकि उन क्षेत्रों के शासक भारतीय गणराज्य के अधीन नहीं आना चाहते थे. आइए देखते हैं कि ये क्षेत्र कौन-कौन से थे… Also Read - Lockdown: पब्लिक को सब्‍जियां बांटना कांग्रेस विधायक को पड़ा महंगा, केस दर्ज

जम्मू-कश्मीर
आजादी के वक्त 500 से अधिक रजवाड़ों का भारतीय संघ में विलय किया गया, लेकिन उस वक्त देश की सबसे बड़ी रियासत रही जम्मू-कश्मीर को लेकर स्थिति साफ नहीं थी. 84471 वर्गमील क्षेत्र में फैली इस रियासत का आजादी के वक्त विलय नहीं हो सका. जम्मू-कश्मीर के तत्कालीन महाराज हरि सिंह अपनी रियासत को भारत और पाकिस्तान दोनों से अलग रखना चाहते थे. 15 अगस्त 1947 तक इस रियासत का भारत और पाकिस्तान में से किसी में विलय नहीं हो सका. इस कारण वहां आजादी का जश्न नहीं मनाया गया और न ही तिरंगा फहराया गया. कश्मीर में पाकिस्तान की ओर से किए गए हमले के बाद 26 अक्टूबर 1947 को जम्मू-कश्मीर के महाराज हरि सिंह ने राज्य का भारत में विलय पत्र पर हस्ताक्षर किया. Also Read - सात महीने की हिरासत के बाद रिहा होंगे उमर अब्दुल्ला, जम्मू-कश्मीर सरकार ने जारी किए आदेश

हैदराबाद
आजादी के वक्त हैदराबाद भी एक बड़ी रियासत थी. वहां की गद्दी पर सातवां निजाम मीर उस्मान अली बैठा हुआ था. भौगोलिक रूप से भारत के बीचों-बीच स्थित यह रजवाड़ा देश के बंटवारे के बाद खुद को पाकिस्तान में शामिल करना चाहता था. 15 अगस्त 1947 तक उसने भी भारत में विलय की संधि पर हस्ताक्षर नहीं किया. आजादी के करीब एक साल से अधिक समय बाद तक हैदराबाद भारत का हिस्सा नहीं रहा. 21 जून 1948 को गवर्नर जनरल पद से लार्ड माउंटबेटन के इस्तीफे के बाद तत्कालीन उप प्रधानमंत्री सरदार बल्लभभाई पटेल ने एक बेहद साहसिक फैसला किया. 13 सितंबर 1948 को भारतीय सेना ने हैदराबाद में कार्रवाई की और करीब 10 दिनों तक चली जंग के बाद वहां के निजाम ने भारत में हैदराबाद का विलय करने की बात कही. इस हैदराबाद में 15 अगस्त 1947 और 1948 को भी तिरंगा नहीं फहराया जा सका था. Also Read - VIDEO: सत्यपाल मलिक बोले - 'जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सिर्फ गोल्फ खेलते हैं और दारू पीते हैं'

Independence Day: बॉलीवुड से निकलते देशभक्ति के सुर, आजादी के मायने समझाते ये 10 गानें

जूनागढ़
देश की आजादी और बंटवारे के वक्त रियासतों को लेकर फंसे पेंच में जूनागढ़ का भी एक नाम था. मौजूदा गुजरात के दक्षिणी सौराष्ट्र में फैली यह रियासत भी आजादी के वक्त भारत में विलय को तैयार नहीं थी. उस वक्त वहां के शासक रहे मोहम्मद महाबत खांजी (तृतीय) ने अपनी रियासत का विलय पाकिस्तान में करना चाहता था, लेकिन वहां की हिंदू जनता ने इसके खिलाफ बगावत कर दी. 13 सितंबर 1947 को जूनागढ़ का भारत में विलय किया गया.

गोवा
1947 में भारतीय उप महाद्वीप के अधिकतर हिस्सों में अंग्रेजों का शासन था, लेकिन गोवा एक ऐसी जगह थी जहां पर अंग्रेज नहीं पुर्तगालियों का शासन था. 1947 में भारत के आजाद होने के वक्त पुर्तगाल ने गोवा को आजाद करने से इनकार कर दिया. इसके करीब डेढ़ दशक बाद 19 दिसंबर 1961 को भारतीय सेना ने ऑपरेशन विजय अभियान चलाकार गोवा और दमन व दीव द्वीप को आजाद करवाया और उसे भारतीय गणराज्य में शामिल किया. इसके बाद गोवा और दमन व दीव को केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया. आजादी के बाद करीब 15 वर्षों तक यहां पर तिरंगा नहीं फहराया जा सका.

पुड्डुचेरी
1947 में भारत के आजाद होने के बावजूद कई वर्षों तक पुड्डुचेरी भारत सरकार के अधीन नहीं था. यह एक फ्रांसीसी कॉलोनी था. यहां पर फ्रांस का शासन चलता था. तमिलनाडु से सटे समुद्र किनारे स्थिति यह जगह वास्तविक रूप से एक नवंबर 1954 को भारतीय गणराज्य का हिस्सा बना. इतना ही नहीं कानूनी रूप से 16 अगस्त 1962 को इसे भारत में शामिल किया गया.

Independence Day: बॉलीवुड की 5 खास फिल्में जो जगाती हैं देशभक्ति का जज़्बा

सिक्किम
पूर्वोत्तर भारत में स्थित सिक्किम एक सीमाई राज्य है. इसकी सीमा भूटान, नेपाल और बांग्लादेश से लगती है. यह देश का सबसे कम आबादी वाला राज्य है. 1947 में देश को मिली आजादी के वक्त यह पूर्वोत्तर की एक बड़ी रियासत थी. यहां चोगयाल का शासन था. आजादी के बाद इसने भारत सरकार के साथ अपना स्वतंत्र संबंध बनाए रखा. भारत सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद यह भारतीय गणराज्य का हिस्सा नहीं बना. अंततः 1973 में वहां पर राजशाही के खिलाफ विद्रोह भड़क गया. 1975 में जनता में राजशाही को खत्म कर दिया. इसके बाद 1975 में ही करवाए गए जनमत संग्रह के आधार पर वह भारत का 22वां राज्य बना. यहां पर 15 अगस्त 1947 को तिरंगा नहीं फहराया जा सका था.

नगालैंड
आजादी के वक्त नगालैंड, असम प्रांत के तहत आता था. वहां पर नगा विद्रोही अपने लिए एक स्वतंत्र देश की मांग कर रहे थे. इसको लेकर वहां पर हिंसा का एक लंबा दौर चला. बाद में भारत सरकार को वहां व्यवस्था कायम करने के लिए 1955 में सेना भेजनी पड़ी. इसके बाद 1957 में भारत सरकार और फीजो के नेतृत्व वाले नगा नेशनल काउंसिल के बीच नगा हिल्स के लिए एक अलग क्षेत्र बनाने को लेकर समझौता हुआ. इसके बाद भी मामला शांत नहीं हुआ. इसके बाद अंततः 1960 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और नगा नेताओं के बीच 1960 में 16 सूत्रीय समझौता हुआ जिसके तहत भारत संघ के अंदर एक पूर्ण नगालैंड राज्य की स्थापना की बात कही गई.