नई दिल्ली. वर्ष 1947 में हमारा देश आजाद हुआ. आगामी 15 अगस्त को हम अपना 72वां स्वतंत्रता दिवस (Independence Day) मनाएंगे. अंग्रेजों की 200 वर्षों की गुलामी के बाद, एक हिन्दुस्तान को भारत और पाकिस्तान के रूप में बांट दिया गया. क्या इसका कोई दस्तावेज है? अगर है तो उस पर किसी ने दस्तखत किए हैं? भारत को आजाद देश की मान्यता देने वाले किसी दस्तावेज पर महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू या सरदार वल्लभभाई पटेल ने दस्तखत किए? या फिर भारत और पाकिस्तान को अलग करने वाला कोई दस्तावेजी प्रमाण है? ब्रिटेन की महारानी ने किस प्रकार भारत को सत्ता और संप्रभुता सौंपी? ऐसे कई सवाल हैं, जो हमारे स्वतंत्रता दिवस से पहले मन में आते हैं. लेकिन इन सवालों का कोई जवाब उपलब्ध नहीं है. खुद भारत सरकार के पास भी इसका प्रमाण नहीं है. क्योंकि अगर होता तो हाल ही में सूचना के अधिकार (RTI) के तहत पूछे गए प्रश्न का उत्तर मिलता. लेकिन सरकार ने भी दोटूक कह दिया- इस संबंध में कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं है.

आजादी और बंटवारे पर No Clue
हमारी सहयोगी वेबसाइट डीएनए के अनुसार, पंजाब के फिरोजपुर के रहने वाले मदनलाल नरूला ने पिछले दिनों एक आरटीआई दाखिल किया था. इसमें उन्होंने भारत-पाक बंटवारे और देश की आजादी के लिखित प्रमाण के संबंध में सरकार से जानकारी मांगी थी. लेकिन केंद्र सरकार का स्पष्ट जवाब आया- इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है. सरकार के जवाब में कहा गया, ‘ऐसा कोई दस्तावेज हमारे कार्यालय में उपलब्ध नहीं है जिसमें 14 और 15 अगस्त 1947 के दिन भारत के बंटवारे से संबंधित प्रमाण हो.’ मदनलाल नरूला को उनकी मांगी गई सूचना के जवाब में कहा गया कि इस संबंध में एक निर्देश केंद्र के सभी मंत्रालयों और विभागों को दिया गया है, जिसमें उनसे 25 वर्ष से पुराने सभी रिकॉर्ड जुटाने और उसे भारतीय अभिलेखागार (National Archives) को भेजने को कहा गया है.

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पीएमओ, गृह और विदेश मंत्रालय से मांगी जानकारी
राष्ट्रीय अभिलेखागार (National Archives of India) के असिस्टेंट डायरेक्टर सय्यद फरीद अहमद ने इस साल की शुरुआत में विदेश मंत्रालय, प्रधानमंत्री कार्यालय और गृह मंत्रालय से भारत-पाकिस्तान के बंटवारे और देश की आजादी से संबंधित सभी दस्तावेजों की मांग की थी. अहमद ने केंद्रीय सूचना आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत पीएमओ, गृह मंत्रालय और संस्कृति मंत्रालय को निर्देश जारी करते हुए आग्रह किया कि इस संबंध में जितने भी पुख्ता प्रमाण हों, उनका तत्काल संकलन कर उन्हें राष्ट्रीय अभिलेखागार को स्थानांतरित किया जाए. केंद्रीय सूचना आयोग के निर्देशों के तहत सरकार ने मात्र एक जानकारी दी कि इस संबंध में सिर्फ ‘इंडियन इंडिपेंडेंस एक्ट 1947’ ही उपलब्ध है. इस एक्ट को ब्रिटेन की संसद ने पास किया था, जिसमें सत्ता हस्तांतरण की बात कही गई थी.

स्वतंत्रता सेनानियों की कुर्बानी से मिली आजादी
सूचना आयोग को भारत सरकार द्वारा दी गई जानकारी में यह भी कहा गया है कि भारत के लोगों ने स्वतंत्रता के लिए वर्षों तक संघर्ष किया. अंग्रेजों के खिलाफ आजादी की इस लड़ाई के अनगिनत और ऐतिहासिक प्रमाण हैं जो अलग-अलग- किताबों, दस्तावेजों आदि के रूप में उपलब्ध हैं. लेकिन इनमें से किसी के बारे में भी आधिकारिक रूप से कोई जानकारी नहीं है. हालांकि, भारत सरकार ने अपने जवाब में यह माना है कि देश की आजादी और भारत-पाक बंटवारे से संबंधित दस्तावेज ब्रिटेन स्थित इंडिया ऑफिस या ब्रिटेन की सरकार या फिर भारतीय प्राधिकरणों (कार्यालयों) के पास उपलब्ध हो सकते हैं. कुल मिलाकर देखें तो देश की आजादी और बंटवारे को लेकर मांगी गई जानकारी के संबंध में भारत सरकार के पास ऐसा कोई प्रमाण नहीं है, जिसे हम लिखित प्रमाण की संज्ञा दे सकते हैं.

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आजादी से 2 महीने पहले अंग्रेजों ने की थी घोषणा
भारत सरकार ने केंद्रीय सूचना आयोग के निर्देशों का जो जवाब दिया है, उसमें स्पष्ट कहा गया है कि देश के बंटवारे या आजादी से संबंधित दस्तावेज, आधिकारिक या प्रमाणिक रूप से उसके पास उपलब्ध नहीं हैं. अलबत्ता, ब्रिटेन स्थित इंडिया ऑफिस या ब्रिटिश सरकार या भारत के विभिन्न कार्यालयों में मौजूद भिन्न-भिन्न दस्तावेज से इसके प्रमाण मिल सकते हैं. वहीं, प्रसिद्ध लेखक और इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने अपनी पुस्तक ‘इंडिया आफ्टर गांधी’ में यह जानकारी दी है कि अंग्रेजों ने ब्रिटिश राज की समाप्ति की घोषणा, स्वतंत्रता दिवस से करीब 6 महीने पहले की. वहीं भारत की आजादी और देश के बंटवारे की घोषणा 15 अगस्त 1947 के महज दो महीने पहले की गई. गुहा अपनी किताब में लिखते हैं, ’20 फरवरी 1947 को ब्रिटिश सरकार ने बयान जारी किया, जिसमें औपचारिक रूप से ब्रिटिश राज की समाप्ति की घोषणा की गई.’ रामचंद्र गुहा आगे लिखते हैं, ‘3 जून 1947 को अंग्रेजों ने आखिरी तौर पर अपने वापसी की घोषणा की और दो आजाद देशों के निर्माण का एलान कर दिया.’