नई दिल्ली. एक शख्स जो दक्षिण भारत में संजय गांधी का दोस्त कहलाता था और यूथ कांग्रेस से मेडक जिले में राजनीति शुरू करता है. जो तेलुगू, उर्दू, हिंदी और इंग्लिश लिख, बोल और पढ़ सकता है. जिसे इतिहास की इतनी समझ और जानकारी है कि अलग राज्य का पूरा मूवमेंट खड़ा कर देता है और राज्य लेकर ही मानता है. एक ऐसा नेता जो अपने आंदोलन को धार देने के लिए खुद गाना लिखता और गाता है, जिसके उत्साह में लाखों लोग जुड़ते चले जाते हैं. एक ऐसा शख्स को जितना नेता है उतना ही किसान भी है. हम बात कर रहे हैं तेलंगाना के मुख्यमंत्री कल्वाकुंतला चंद्रशेखर राव (के. चंद्रशेखर राव/केसीआर) की.

केसीआर को तेलंगाना का सबसे लंबा नेता कहा जाता है. वह भीड़ में एकदम अलग दिख जाते हैं और अपने भाषण से लोगों को कनेक्ट कर लेते हैं. वह समुदाय के हिसाब से लोगों को जोड़ने के लिए तेलुगू, उर्दू, हिंदी और इंग्लिश में बोलना शुरू कर देते हैं. साल 2001 में जब उन्होंने अलग तेलंगाना राज्य का आंदोलन शुरू किया था तो उसके पीछे उनकी सबसे बड़ी ताकत उनका इतिहास ज्ञान था. उन्होंने पूरे तेलंगाना रीजन में घूम-घूम कर लोगों को इतिहास का हवाला देते हुए सामाजिक-भौगोलिक जानकारी देकर नए राज्य के लिए समर्थन मांगा.

खुद गाना लिखते और गाते थे
आजादी से लेकर हर आंदोलन इस बात की तस्दीक करता है कि गाना-कविता लोगों में सिर्फ उत्साह ही नहीं भरता, बल्कि उस आंदोलन के प्रति भावना भी भरने का काम करता है. केसीआर ने इसे बखूबी समझा. वह अलग तेलंगाना राज्य को लेकर खुद गाना लिखते थे और गाते थे. बाद में इसे म्यूजिशियन से कंपोज कराकर भी जनता के बीच लाते थे. इससे एक जनभावना तैयार होती थी. 13 साल लंबे आंदोलन में केसीआर एक आर्किटेक्ट के तौर पर दिखे, जिन्होंने खुद एक-एक चीज तैयार करके तेलंगाना को 29वां राज्य बनाने में कामयाब हुए.

जितना बड़ा नेता, उतना मेहनती किसान
केसीआर की पकड़ जितनी इतिहास, भाषा, समाजविज्ञान, भूगोल और राजनीति में है, उतनी ही उन्हें खेती-किसानी की समझ भी है. वह 60 एकड़ में खेती करते हैं. अपने कई इंटरव्यू में उन्होंने खुद कहा है कि मैं एक कृषि प्रधान देश का नागरिक हूं और खेती-किसानी करता हूं. मुझे वैज्ञानिक तरीके से खेती करने का शौक है, जिससे मैं लगभग 10 करोड़ रुपये सलाना की कमाई करता हूं. खास बात ये है कि वह शिमला मिर्च और आलू की खेती करते हैं.

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राजनैतिक करियर
साल 1970 में संजय गांधी की राजनीति से प्रभावित होकर केसीआर ने यूथ कांग्रेस ज्वाइन किया और मेडक जिले में राजनीति शुरू की. साल 1983 में वह एनटी रामा राव की पार्टी तेलुगू देशम पार्टी से जुड़ गए. इसके बाद वह सिद्दिपेट से विधानसभा के चुनाव में उतरे और 1985 से लेकर 1999 तक चार बार चुनाव जीते. साल 2000-2001 के बीच उन्होंने डिप्टी स्पीकर की जिम्मेदारी भी निभाई.

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टीआरएस बना, तेलंगाना के लिए शुरू किए आंदोलन
साल 2001 में केसीआर ने टीडीपी से इस्तीफा दे तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) पार्टी बना ली. इसके पीछे मकसद सिर्फ अलग तेलंगाना राज्य रहा. इस बीच केंद्र में यूपीए की सरकार आ गई और केसीआर ने उसे समर्थन दे दिया. हालांकि, बाद में केसीआर ने ये आरोप लगाते हुए समर्थन वापस ले लिया कि यूपीए, तेलंगाना को अलग राज्य का दर्जा देने के मूड में नहीं है. इस बीच केसीआर ने आंदोलन तेज कर दिया और भूख हड़ताल पर भी बैठे.

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अलग राज्य बना तेलंगाना
2 जून 2014 को तेलंगाना अलग राज्य बना. केसीआर की पार्टी टीआरएस सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी और वह तेलंगाना के पहले सीएम बने. इस बीच उनका झुकाव केंद्र की मोदी सरकार की तरफ रहा. लेकिन बाद के दिनों में मतभेद होने के बाद उन्होंने न सिर्फ केंद्र सरकार की आलोचना की, बल्कि विधानसभा भंग कर चुनाव में उतर गए.