नई दिल्ली. जम्मू-कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा हटाने के बाद पिछले 5 अगस्त से लेकर अभी तक केंद्र सरकार और उसकी तमाम एजेंसियां यह दावा कर रही है कि राज्य में हालात सामान्य हो रहे हैं. सत्ताधारी दल भाजपा के नेता यह कहते नहीं अघा रहे हैं कि घाटी के लोग केंद्र के इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इस मसले पर भारत के समर्थन में है. लेकिन गृह मंत्रालय की अंदरूनी रिपोर्ट और राज्य के ताजा हालात, केंद्र सरकार के इस दावे की चुगली करते नजर आ रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, घाटी में पिछले 5 अगस्त के बाद से अभी तक सुरक्षाबलों के साथ स्थानीय लोगों के मुठभेड़ की सैकड़ों घटनाएं हो चुकी हैं.

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अंग्रेजी अखबार इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कश्मीर घाटी में पिछले एक पखवाड़े में 200 से ज्यादा बार सुरक्षाबलों के खिलाफ पत्थरबाजी हुई है, जिसमें 51 सुरक्षाकर्मी घायल हुए हैं. गृह मंत्रालय के कंट्रोल रूम से मिली रिपोर्ट्स के आधार पर अखबार ने लिखा है कि मंगलवार को नौहटा और खन्यार स्थित सीआरपीएफ कैंप पर पेट्रोल बम भी फेके गए. पेट्रोल बम से हमले की यह घटना उस समय हुई, जब कैंप में सुरक्षाकर्मियों की ड्यूटी बदलने का समय होता है. गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने इस हमले पर कहा था कि घटना में किसी के भी गंभीर रूप से घायल होने की खबर नहीं है.

इकोनॉमिक टाइम्स से बातचीत में गृह मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि पत्थरबाजी की घटनाओं से निपटने के लिए सुरक्षाबल हरसंभव प्रयास कर रहे हैं. अधिकारी ने कहा, ‘वर्ष 2016 में सुरक्षाबलों के खिलाफ पत्थरबाजी की कई घटनाएं हुई थीं, जिनमें बड़ी संख्या में लोग जख्मी हुए थे, लेकिन घाटी में अभी इस तरह का प्रदर्शन या रोष नहीं देखा जा रहा है. सुरक्षाबल के जवान प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए कई इलाकों में उन पर आंसू गैस का इस्तेमाल कर रहे हैं. लेकिन अभी तक कहीं से किसी बड़ी घटना की जानकारी नहीं है.’ मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने राज्य की जनता के साथ हालात को सामान्य करने के लिए कई सलाहकार नियुक्त किए हैं.

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सुरक्षाबलों के खिलाफ स्थानीय लोगों की नाराजगी के बारे में पुलिस ने भी पुष्टि की है. हालांकि पुलिस ने यह भी कहा है कि पत्थरबाजी की छिटपुट घटनाओं पर नियंत्रण कर लिया गया है. मध्य कश्मीर के पुलिस उप महानिरीक्षक वी.के.बिर्दी ने बीते दिनों बताया था कि सोमवार को जिन इलाकों में ढील दी गई या जारी रखी गई, वहां कानून-व्यवस्था उल्लंघन की कोई घटना सामने नहीं आई और माहौल शांतिपूर्ण है. उन्होंने कहा, ‘‘कुछ स्थानों पर पत्थरबाजी की छिटपुट घटनाएं सामने आई, लेकिन कानून के तहत उपद्रवियों को तितर-बितर कर दिया गया.’’

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आपको बता दें कि इस हफ्ते की शुरुआत में जम्मू-कश्मीर प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों ने सोमवार को बताया था कि घाटी में कानून-व्यस्था उल्लंघन की कोई बड़ी घटना नहीं हुई है और स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है. जम्मू-कश्मीर के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की निदेशक सैयद सहरीश असगर ने पत्रकारों को बताया था कि जम्मू क्षेत्र में कानून-व्यवस्था उल्लंघन की कोई घटना दर्ज नहीं की गई है. कश्मीर में लागू प्रतिबंधों में ढील के बाद स्कूल दोबारा खोल दिए गए हैं और शिक्षक काम पर लौट आए हैं, लेकिन छात्रों की उपस्थिति अधिक नहीं रही. उन्होंने कहा था कि रविवार को कुछ तत्वों ने अफवाह फैलाई. सरकार लोगों से आग्रह कर रही है कि वे निहित स्वार्थों के लिए फैलाई जा रही किसी अफवाह पर भरोसा नहीं करें. असगर ने कहा कि पूरी घाटी में कानून-व्यवस्था उल्लंघन की कोई बड़ी घटना सामने नहीं आई है. लोग आमतौर पर सहयोगात्मक रुख अपना रहे हैं.