नई दिल्ली. समाजवादी नेताओं का जब भी नाम आता है उसमें जॉर्ज फर्नांडिस की गिनती जरूर की जाती है. एक ऐसा नेता जो कि मजदूरों, गरीबों और शोषितों की लड़ाई के लिए लगातार संघर्ष करता रहा. साल 1975 में लगे इमरजेंसी के खिलाफ जिस तरह से उन्होंने आवाज उठाई, उसकी चर्चा हमेशा होती रहेगी. कहा जाता है कि फर्नांडिस ने इमरजेंसी का खुलकर विरोध किया और गिरफ्तारी से बचने के लिए कभी पगड़ी पहनी तो कभी दाढ़ी रखकर सिख का भेष धारण किया था. इतना ही नहीं गिरफ्तारी के बाद वह जेल में गीता के श्कोल सुनाकर कैदियों का मनोबल बढ़ाते थे.

जॉर्ज फर्नांडिस का देश के विद्वान नेताओं में गिनती किया जाता था. उन्हें हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत और कन्नड़ सहित 8 भाषाओं की जानकारी थी. जॉर्ज ने पहला लोकसभा चुनाव साल 1977 में जेल में रहते हुए लड़ा. बिहार की मुजफ्फरनगर सीट से उन्हें रिकॉर्ड वोटों से जीत मिली. वह जनता पार्टी की सरकार में उद्योग मंत्री बने. जनता पार्टी के टूटने के बाद जॉर्ज ने अपनी समता पार्टी बना ली. इस दौरान ही वह अटल बिहारी वाजपेयी और बीजेपी के करीब आए. बाद में वह अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में रक्षा मंत्री बने.

फुटपाथ पर खाना, चौपाती पर सोना
जॉर्ज ने अपने इंटरव्यू में कई बार बताया है कि राजनैतिक जीवन की शुरुआत ही श्रमिकों की आवाज बुलंद करने से हुई. इस दौरान वह देशभर में श्रमिकों के खिलाफ हो रहे आत्याचार के खिलाफ भ्रमण करते रहे और मुखर विरोध किया. उन्होंने बताया था कि वह फुटपाथ पर ही खाते थे और चौपाती पर सो जाते थे. उनके नेतृत्व में 8 मई 1974 को देशव्यापी रेल हड़ताल का ऐलान हुआ था.

रक्षामंत्री
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली राजग सरकार में फर्नांडिस रक्षा मंत्री थे, जब 1999 में भारत ने करगिल युद्ध लड़ा था. उनके कार्यकाल के दौरान ही भारत ने 1998 में पोखरण में परमाणु परीक्षण किया था. बतौर रेल मंत्री उन्हें कोंकण रेलवे को शुरू करने का भी श्रेय दिया जाता है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने समाजवादी नेता के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि वह स्पष्टवादी तथा निडर थे जो हमेशा अपनी विचारधारा पर अडिग रहे.