नई दिल्ली. मध्यप्रदेश में बुधवार को एक ऐसे चुनाव के लिए वोटिंग होगी जो संभवत: ग्वालियर के ‘महाराजा’ का राजनैतिक भविष्य तय करेगा. जीत मिलती है तो वह सीएम भी बन सकता है और हारने पर वह हाशिए पर भी जा सकता है. स्टेनफोर्ड हावर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई कर चुके इस नौजवान की राजनीति में दिलचस्पी नहीं थी. लेकिन एक हादसे में पिता माधव राव सिंधिया की मौत के बाद विदेश की नौकरी छोड़ उन्हें राजनीति में उतरना पड़ता है. 30 साल की उम्र में चुनाव लड़ता है और गुना से सांसद बन जाता है. हम बात कर रहे हैं कांग्रेस के मध्यप्रदेश चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष और गुना सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया की. Also Read - MP ByPolls 2020: धरने पर बैठे शिवराज सिंह चौहान, बोले- महिलाओं का अपमान नहीं करेंगे बर्दाश्त

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गुना वह सीट है जहां माधव राव सिंधिया ने साल 1971 में चुनाव लड़ा था और अंत तक अपराजित रहें. 30 सितंबर साल 2001 को एक विमान हादसे में उनकी मौत हो गई. इसके बाद उनके राजनैतिक वारिस के रूप में ज्योतिरादित्य सिंधिया गुना से लोकसभा चुनाव में उतरे और लगातार जीतते आ रहे हैं. 17 साल के अपने राजनैतिक करियर में ज्योतिरादित्य अब मंज हुए राजनेता के तौर पर देखे जाते हैं और हर कदम उसके असर को ध्यान में रखते हुए उठाते हैं. Also Read - ज्योतिरादित्य सिंधिया की आमसभा में आए बुजुर्ग किसान की दिल का दौरा पड़ने से मौत, भाषण देते रहे स्थानीय नेता

चुटीले तंज और व्यंग्य

ज्योतिरादित्य सिंधिया सियासी समझ से भरे हुए नेता के तौर पर दिखने लगे हैं जो चुटीले तंज करता है तो व्यंग्य में ही विरोधियों को परास्त कर देते हैं. राजघराने से ताल्लुक रखने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया यूपीए सरकार में मंत्री भी रहे, लेकिन उन्होंने लालबत्ती लगाने से मना कर दिया. ज्योतिरादित्य सिंधिया गरीबों से खुद को जोड़ने के लिए कभी एसी वाली गाड़ी से नहीं चलते हैं. वह कई बार बता चुके हैं कि 21वीं सदी के भारत में वह महाराज की किसी भी छवि में यकीन नहीं रखते हैं.

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इस वजह से सिंधिया स्कूल में नहीं पढ़े

ज्योतिरादित्य का जन्म मुंबई में हुआ और 5वीं तक की पढ़ाई वह मुबंई के कैंपियन स्कूल में ही पूरी की. 6वीं में वह दून स्कूल चले गए. इस दौरान ये सवाल उठने लगा कि ग्वालियर के सिंधिया स्कूल में वह क्यों नहीं पढ़ रहे हैं. इस पर उनके पिता माधवराव सिंधिया ने जवाब दिया था कि सिंधिया स्कूल में पढ़ने की वजह से उन्हें न चाहते हुए भी वीआईपी ट्रीटमेंट मिलने लगता, जिससे उनके पूरे व्यक्तित्व पर असर पड़ता. बताया जाता है कि दून स्कूल में भी कहा गया था कि ज्योतिरादित्य से दूसरे बच्चों की तरह ही व्यवहार किया जाए.

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ज्योतिरादित्य ने की नौकरी

बताया जाता है कि ज्योतिरादित्य को स्कूल के दिनों से ही भाषण, क्रिकेट, कार रेसिंग, शूटिंग और आर्चीर में इंट्रेस्ट था. 12वीं के बाद माधव राव सिंधिया चाहते थे कि ज्यातिरादित्य कैम्ब्रिज में पढ़ने जाए, लेकिन ज्योतिरादित्य को अमेरिका पसंद आया. इसके बाद ज्योतिरादित्य ने स्टेनफोर्ड और हावर्ड से एमबीए किया. पढ़ाई के बाद ज्योतिरादित्य ने अमेरिका में ही साढ़े चार साल लिंच, संयुक्त राष्ट्र और मार्गेन स्टेनले में काम किया.

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पर्सनल लाइफ

साल 1994 में ज्योतिरादित्य सिंधिया की प्रियदर्शनी राजे के साथ शादी हुई. प्रियदर्शनी राजनीति में भी ज्योतिरादित्य का पूरा साथ देती हैं और गुना की हर समस्या से वाकिफ रहती हैं. दोनों का एक बेटा महा आर्यमण और बेटी अनन्या राजे हैं.