नई दिल्ली. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार चाहे लाख दावे कर लें कि वे एक दशक से ज्यादा समय से बिहार में ‘सुशासन’ का राज कायम किए हुए हैं, लेकिन पिछले दो वर्षों से उनके सरकार का काम-काज सुशासन के मानकों पर खरा नहीं उतर रहा है. प्रशासनिक स्तर पर बिहार की लुटिया डूब ही रही है. यह हम नहीं कह रहे, बल्कि थिंक टैंक पब्लिक अफेयर सेंटर (पीएसी) द्वारा जारी सार्वजनिक मामलों के सूचकांक-2018 (पीएआई) में यह बात कही गई है. पीएसी ने शनिवार को जारी अपनी रिपोर्ट में कहा है, ‘वर्ष 2018 के पब्लिक अफेयर्स इंडेक्स (पीएआई) में केरल लगातार तीसरे साल शीर्ष पर है.’ पीएसी ने देश के 30 राज्यों को लेकर यह सूची जारी की है, जिसमें बिहार को सबसे निचले पायदान यानी 30वें स्थान पर रखा गया है. पीएसी की रिपोर्ट में गैर-भाजपा शासित राज्य केरल के शीर्ष पर होने और भाजपा समर्थित राज्य बिहार को सबसे निचले पायदान पर रखे जाने को लेकर राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं.

PAI-Index

पीएसी इंडेक्स पर आधारित इंफोग्राफ. (India.com)

सामाजिक-आर्थिक विकास के आंकड़ों का लेखा-जोखा
पीएसी वर्ष 2016 से राज्यों की शासन व्यवस्था पर सालाना आधार पर अपनी रिपोर्ट जारी कर रहा है. इस रिपोर्ट में राज्यों के सामाजिक और आर्थिक विकास के आंकड़ों के आधार पर शासन-व्यवस्था के प्रदर्शन की रैंकिंग की जाती है. इस बार की रिपोर्ट में केरल लगातार तीसरे साल देश में अव्वल है. दूसरे नंबर पर तमिलनाडु, तीसरे पर तेलंगाना, चौथे पर हिमाचल प्रदेश, पांचवें पर कर्नाटक और छठे स्थान पर गुजरात है. वहीं, इस सूची के आखिरी 6 राज्यों में बिहार सबसे नीचे 30वें नंबर पर है. 29वें स्थान पर मेघालय, 28वें पर झारखंड, 27वें पर मणिपुर, 26वें पर मध्यप्रदेश और 25वें स्थान पर देश का सबसे बड़ा राज्य उत्तर प्रदेश है. पीएआई के अनुसार, सूची में आखिरी स्थान पर वही राज्य हैं, जहां अधिक सामाजिक व आर्थिक असमानता है. पीएसी के चेयरमैन के. कस्तूरीरंगन ने कहा, ‘युवाओं की बढ़ती आबादी वाले देश के रूप में भारत को अपनी विकासपरक चुनौतियों का आकलन करने और उनका समाधान करने की जरूरत है.’

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बिहार लगातार दूसरे साल 30वें स्थान पर
पीएसी इंडेक्स में यह लगातार दूसरा साल है, जब बिहार सुशासन के मानकों पर खरा नहीं उतरा है. पीएसी की वर्ष 2017 की रिपोर्ट में भी बिहार को 30वां नंबर ही हासिल हुआ था. वहीं, वर्ष 2016 में जब इस एजेंसी ने पहली बार इस तरह की सूची जारी की थी, उस साल भी बिहार, वर्तमान से थोड़ा अच्छा, यानी 29वें स्थान पर था. ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर क्यों नीतीश कुमार के तमाम दावों के बावजूद बिहार सुशासन के स्तर पर फिसड्डी साबित होता जा रहा है. वहीं, इस सूची को देखते हुए नीतीश कुमार के इस दावे में दम भी नजर आने लगता है कि बिहार को जल्द से जल्द विशेष राज्य का दर्जा दे दिया जाना चाहिए. हालांकि यह गौरतलब है कि वर्ष 2016 और 2017 के दौरान बिहार में अकेले नीतीश कुमार की पार्टी सरकार में नहीं रही. 2016 में जहां नीतीश कुमार महागठबंधन की सरकार के मुखिया थे, वहीं 2017 में उन्होंने महागठबंधन छोड़कर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन से तालमेल कर बिहार में सरकार बना ली थी. तो क्या…भाजपा जो कि पूरे देश में सुशासन या स्वराज लाने के दावे करती है, उसके साथ रहकर भी बिहार में अब तक ‘सुशासन’ का राज स्थापित नहीं हो सका है? पीएसी की रिपोर्ट इसी ‘जमीनी हकीकत’ को उजागर कर रही है.

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सुशासन के दावों पर विपक्ष ने किया वार
पीएसी की लिस्ट में बिहार के सबसे नीचे रहने को लेकर नीतीश कुमार के विरोधी दलों की प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं. बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने देश के राज्यों की शासन व्यवस्था के मामले में बिहार के सबसे निचले पायदान पर रहने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को जिम्मेदार ठहराया है. पीएसी की रिपोर्ट सार्वजनिक किए जाने के बाद बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी ने सीएम नीतीश कुमार पर निशाना साधा है. तेजस्वी यादव ने ट्वीट कर कहा, ‘शासन व्यवस्था के मामले में बिहार सबसे निचले पायदान पर है. इसका श्रेय स्वघोषित सुशासन बाबू नीतीश कुमार को जाता है.’ तेजस्वी यादव ने पीएसी इंडेक्स पर केरल सरकार को बधाई दी है. साथ ही बिहार में जदयू और भाजपा की सरकार पर तंज कसते हुए ट्वीट में कहा है, ‘केरल सरकार को सर्वश्रेष्ठ स्थान पाने की शुभकामनाएं और ‘डबल इंजन’ वाली भाजपा-जदयू की सरकार को सबसे निचले पायदान पर रहने के लिए डबल बधाई.’

(इनपुट – एजेंसी)