नई दिल्ली. पीएम नरेंद्र मोदी दो दिवसीय दौरे पर नेपाल पहुंच गए हैं. अपनी यात्रा के क्रम में पीएम मोदी सबसे पहले नेपाल की धार्मिक नगरी जनकपुर पहुंचे, जहां उन्होंने विश्वप्रसिद्ध जानकी मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की. नेपाल का जनकपुर शहर, भगवान राम की पत्नी सीता की नगरी के रूप में जाना जाता है. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि मिथिला के राजा जनक की राजधानी रहा जनकपुर, माता सीता की जन्मस्थली नहीं है. हिन्दू धर्म के अनुसार माता सीता का जन्म धरती से हुआ था. मिथिला में अकाल पड़ने के बाद जब राजा जनक ने एक किसान के खेत में हल चलाया तो उसी समय एक बच्ची प्रकट हुईं. इस बच्ची को राजा जनक ने अपनी बेटी के रूप में अपनाया. जनक ने जिस स्थान पर हल चलाया, वह जगह आज सीतामढ़ी के रूप में जानी जाती है. जी हां, बिहार का सीतामढ़ी ही वह जिला है जहां पर स्थित पुनौरा धाम में माता सीता का जन्म हुआ था. पीएम मोदी की नेपाल यात्रा के बहाने आइए जानते हैं जानकी मंदिर से जुड़े रोचक तथ्य. Also Read - केंद्र सरकार पर कांग्रेस का आरोप, डर कर बदला दवा देने का फैसला, 1971 में इंदिरा गांधी ने दिया था करारा जवाब

जानकी मंदिर में नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने पीएम नरेंद्र मोदी से की मुलाकात.

जानकी मंदिर में नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने पीएम नरेंद्र मोदी से की मुलाकात.

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हल चलाने से हुआ जन्म, इसलिए नाम पड़ा ‘सीता’
जनकनंदनी जानकी को माता सीता के रूप में जाना जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार राजा जनक ने खेत में हल चलाकर उन्हें पाया था. बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित बिहार विश्वविद्यालय के अवकाशप्राप्त शिक्षक प्रो. इन्द्र नाथ झा के अनुसार हल के फाल या फाड़ को संस्कृत भाषा में ‘सिता’ कहा जाता है. चूंकि हल चलाने के बाद ही राजा जनक को बेटी की प्राप्ति हुई थी, इसलिए जानकी को बाद में ‘सीता’ कहा गया. बिहार के सीतामढ़ी में पुनौरा नाम के स्थान पर जहां हल चलाने के बाद सीता का जन्म हुआ था, वहां एक कुंड है. मान्यता है कि इस कुंड का निर्माण हल चलाने के कारण ही हुआ था. पुनौरा में सीता मंदिर भी है, जहां माता सीता के जन्मदिन के अवसर पर बैसाख के महीने में मेला लगता है. हाल ही में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पुनौरा में माता सीता के भव्य मंदिर की आधारशिला भी रखी है. Also Read - कोरोना वायरस के खौफ में हौसला बढ़ाएगा ये गाना, बॉलीवुड हस्तियों ने मिलकर गाया-फिर मुस्कुराएगा इंडिया

पीएम नरेंद्र मोदी भारत के ऐसे पहले प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने जानकी मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की है.

पीएम नरेंद्र मोदी भारत के ऐसे पहले प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने जानकी मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की है.

 

टीकमगढ़ की रानी ने बनवाया था जनकपुर का जानकी मंदिर
नेपाल के जनकपुर में स्थित जिस जानकी मंदिर में पीएम नरेंद्र मोदी ने विशेष पूजा-अर्चना की, उसका निर्माण 1911 ईस्वी में हुआ था. इस संबंध में एक दंतकथा है कि टीकमगढ़ की रानी वृषभानु कुमारी ने पुत्रप्राप्ति की कामना से इस मंदिर का निर्माण कराया था. इस मंदिर के निर्माण में उस समय 9 लाख रुपए की लागत आई थी, जिसके कारण इसे लोग ‘नौलखा मंदिर’ भी कहते हैं. भारतीय वास्तुकला और स्थापत्यशैली में बने इस मंदिर के निर्माण में लगभग 15 साल से ज्यादा समय लगा था. वर्ष 1895 में इसका निर्माण शुरू किया गया था, जो 1911 में जाकर पूरा हुआ. यह मंदिर लगभग 5 हजार वर्गफीट क्षेत्र में फैला हुआ है. मंदिर परिसर के आसपास लगभग 100 सरोवर और कुंड भी बने हुए हैं. आज इस मंदिर में हर साल लाखों की तादाद में श्रद्धालु पहुंचते हैं. विवाह पंचमी के अवसर पर यहां श्रद्धालुओं का तांता लगता है.

बिहार के सीतामढ़ी में भी माता जानकी का मंदिर. यहीं पर पंथ पाकड़ नाम की जगह की भी मान्यता माता सीता से जुड़ी हुई है.

बिहार के सीतामढ़ी में भी माता जानकी का मंदिर. यहीं पर पंथ पाकड़ नाम की जगह की भी मान्यता माता सीता से जुड़ी हुई है.

 

बिहार के सीतामढ़ी स्थित पुनौरा धाम, जहां पर माता सीता धरती से प्रकट हुई थीं.

बिहार के सीतामढ़ी स्थित पुनौरा धाम, जहां पर माता सीता धरती से प्रकट हुई थीं.

 

सीता के कारण ही सीतामढ़ी का भी बढ़ा महत्व
माता सीता की जन्मस्थली होने की वजह से ही बिहार का सीतामढ़ी हिन्दुओं के पवित्र तीर्थस्थान के रूप में जाना जाता है. जनकपुर की तरह ही यहां भी एक जानकी मंदिर का निर्माण किया गया है. इसके अलावा पुनौरा धाम में सालोंभर श्रद्धालुओं की आवाजाही लगी रहती है. खासकर नेपाल के तराई इलाकों से बड़ी संख्या में हिन्दू धर्मावलंबी सीतामढ़ी आते हैं. राम और सीता का विवाह कार्तिक शुक्ल पंचमी को हुआ था. सीतामढ़ी में इस विवाह पंचमी के अवसर पर बड़ा मेला लगता है. सीतामढ़ी में वर्षों तक रहे और वर्तमान में मुजफ्फरपुर में स्कूल शिक्षक के रूप में कार्यरत रतनजी ने बताया, ‘सीतामढ़ी में विवाह पंचमी के अवसर पर लगने वाले मेले में हर साल हजारों की संख्या में देश-विदेश से श्रद्धालु आते हैं. इस मेले में पशुओं का मेला भी लगता है. सोनपुर में लगने वाले पशु मेले के बाद सीतामढ़ी का पशु मेला भी काफी प्रसिद्ध रहा है.’