नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सितंबर में एक के बाद एक ऐतिहासिक फैसले दिए. ये फैसले आने वाले समय में देश की राजनीति से लेकर सामाजिक ताने बाने पर असर डालेंगे. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा मंगलवार को रिटायर हो रहे हैं. रिटायरमेंट के आखिरी 15 दिनों में उनकी अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने आधार से लेकर अयोध्या और एडल्ट्री से लेकर समलैंकिता पर ऐतिहासिक फैसले दिए हैं. सितंबर में आए इन फैसलों पर एक नजर. Also Read - कोरोना वायरस के बारे में सही सूचना के लिये 24 घंटे में पोर्टल बनाये केन्द्र: सुप्रीम कोर्ट

1.सबरीमाला में हर उम्र की महिलाओं को एंट्री का अधिकार
सुप्रीम कोर्ट ने केरल के सबरीमाला में स्थित अय्यप्पा स्वामी मंदिर में एक खास आयुवर्ग की महिलाओं के प्रवेश पर लगी पाबंदी शुक्रवार को हटा दी और मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति प्रदान कर दी. न्यायालय ने कहा कि एक आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश पर पाबंदी लगाने वाली सदियों पुरानी यह हिन्दू परंपरा गैरकानूनी और असंवैधानिक है. प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय पीठ ने 4:1 के बहुमत के फैसले में कहा कि मंदिर में महिलाओं को प्रवेश से रोकना लैंगिक आधार पर भेदभाव है और यह परिपाटी हिन्दू महिलाओं के अधिकारों का उल्लंघन करती है. Also Read - Covid-19: कोरोना के चलते मजदूरों का पलायन, केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा- 23 लाख लोगों को दे रहे हैं खाना

2.विवाहेतर संबंध अपराध की श्रेणी से बाहर
विवाहेतर संबंध को अपराध की श्रेणी से बाहर करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को इससे संबंधित भारतीय दंड संहिता की धारा 497 को ‘पुरातन’ और ‘असंवैधानिक’ करार देते हुए निरस्त कर दिया. न्यायालय ने कहा कि यह महिलाओं को ‘संपत्ति’ के तौर पर मानता है और उन्हें उनकी ‘यौन स्वायत्तता’ से वंचित करता है. एक ऐतिहासिक फैसले में प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से व्यभिचार से संबंधित 158 साल पुरानी भारतीय दंड संहिता की धारा 497 के साथ-साथ सीआरपीसी की धारा 198 के व्यभिचार से संबंधित हिस्से को निरस्त कर दिया. सीआपीसी की धारा 198 विवाह से जुड़े अपराधों में मुकदमा से संबंधित है. इस फैसले के साथ भारत चीन, जापान, ब्राजील, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी और फ्रांस जैसे देशों की श्रेणी में आ गया है जिन्होंने व्यभिचार को अपराध की श्रेणी में रखने वाले दंडात्मक प्रावधान को खत्म कर दिया है. Also Read - कोरोना के कारण मजदूरों का पलायन: कोर्ट ने तलब की रिपोर्ट, डर दहशत को बताया वायरस से भी बड़ी समस्या

3.समलैंगिक संबंध अब अपराध नहीं
दो बालिगों के बीच सहमति से बनाए गए समलैंगिक संबंध अब अपराध नहीं रहे. धारा-377 के तहत दो बालिगों के बीच सहमति से बनाए गए समलैंगिक संबंध को अपराध के दायरे से बाहर कर दिया गया. इस प्रावधान को सुप्रीम कोर्ट ने गैरसंवैधानिक करार दिया है.सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों की संवैधानिक पीठ ने कहा कि धारा 377 अतार्किक और मनमानी वाला धारा है.

4.दहेज उत्पीड़न में होगी तुरंत गिरफ्तारी
दहेज प्रताड़ना मामले में पति और उनके परिजनों को तुरंत गिरफ्तारी से मिले सेफगार्ड को खत्म कर दिया गया है. पहले दहेज प्रताड़ना मामला दर्ज होने के बाद मामले को परिवार कल्याण कमिटी के पास भेजने और तब तक गिरफ्तारी पर रोक का प्रावधान किया था. बेंच ने परिवार कल्याण कमिटी बनाए जाने और तब तक गिरफ्तारी पर रोक के प्रावधान को निरस्त कर दिया.

5.अयोध्या मामला
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को अपने 1994 के उस फैसले को पुनर्विचार के लिए संविधान पीठ को सौंपने से इंकार कर दिया जिसमें कहा गया था कि ‘मस्जिद इस्लाम का अनिवार्य अंग नहीं’ है. इसके साथ ही राजनैतिक रूप से संवेदनशील अयोध्या भूमि मालिकाना हक से संबंधित मुख्य विवाद पर शीर्ष अदालत के 29 अक्तूबर से सुनवाई करने का रास्ता साफ हो गया है. कोर्ट ने कहा कि पहले की टिप्पणी अयोध्या मामले पर सुनवाई के दौरान ‘भूमि अधिग्रहण’ के सीमित संदर्भ में की गई थी. शीर्ष अदालत ने 2-1 से बहुमत के फैसले में साफ कर दिया कि राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मालिकाना हक विवाद पर फैसला करने के लिये यह प्रासंगिक नहीं है. इस मामले में फैसले का 2019 के लोकसभा चुनावों से पहले काफी उत्सुकता से इंतजार रहेगा.

6.प्रमोशन में आरक्षण
सुप्रीम कोर्ट ने पदोन्नति में आरक्षण के बारे में संविधान पीठ का नागराज मामले में 2006 का फैसला सात सदस्यों की संविधान पीठ को भेजने से इंकार कर दिया. नागराज प्रकरण में 2006 के फैसले अनुसूचित जातियों (एससी) एवं अनुसूचित जनजातियों (एसटी) को नौकरियों में तरक्की में आरक्षण देने के लिए शर्तें तय की गई थीं. न्यायालय ने कहा कि 2006 के फैसले को सात सदस्यीय संविधान पीठ के पास भेजने की आवश्यकता नहीं है. इसके साथ ही संविधान पीठ ने केंद्र सरकार का यह अनुरोध भी ठुकरा दिया कि एससी/एसटी को आरक्षण दिए जाने में उनकी कुल आबादी पर विचार किया जाए. प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने एकमत से यह फैसला सुनाया. संविधान पीठ ने एकमत से कहा कि प्रमोशन में कोटा देने के लिए उनके पिछड़ेपन के आंकड़े जुटाने की जरूरत नहीं होगी.

7.आधार पर क्या है कोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में आधार को संवैधानिक रूप से वैध करार दिया लेकिन उसने बैंक खाते, मोबाइल फोन और स्कूल दाखिले में आधार अनिवार्य करने सहित कुछ प्रावधानों को रद्द कर दिया. प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के नेतृत्व वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने अपने फैसले में आधार को आयकर रिटर्न भरने और पैन कार्ड बनाने के लिए अनिवार्य बताया. हालांकि अब आधार कार्ड को बैंक खाते से लिंक करना जरूरी नहीं है और मोबाइल फोन का कनेक्शन देने के लिए टेलीकॉम कंपनियां आपसे आधार नहीं मांग सकती हैं. कोर्ट ने कहा कि सीबीएसई, नीट, यूजीसी आधार को अनिवार्य नहीं कर सकते हैं और स्कूलों में दाखिले के लिए भी यह अनिवार्य नहीं है. पीठ ने सरकार को निर्देश दिया कि वह अवैध आव्रजकों को आधार नंबर नहीं दे.

8.दागी नेताओं के चुनाव लड़ने पर रोक से इनकार 
सुप्रीम कोर्ट ने पांच साल या उससे ज्यादा सजा के मामले में आरोप तय होने के बाद चुनाव लड़ने से रोक लगाने से इनकार कर दिया और कानून बनाने का काम संसद के पाले में डाल दिया.

9.जनप्रतिनिधियों के बतौर वकील प्रैक्टिस पर रोक से इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि एमएलए और एमपी को देश भर की अदालतों में बतौर वकील प्रैक्टिस पर रोक लगाई जाए.

10.कोर्ट कार्रवाई की लाइव स्ट्रीमिंग
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक बेंच की कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग कराने का आदेश भी दिया.