मधुबनी (बिहार). साहित्य, कला, संगीत और पौराणिक धरोहरों को समेटे बिहार का मधुबनी जिला, इस साल के आखिर में साहित्य के बहाने लोक कला, संगीत, फोटोग्राफी, उद्योग और विविध विषयों के लिए एक मंच बनने जा रहा है. जी हां, इसी साल के आखिरी महीने दिसंबर में मधुबनी के राजनगर में मधुबनी लिटरेचर फेस्टिवल (Madhubani Literature Festival) का आयोजन होने जा रहा है. अपनी तरह के अनोखे और मिथिला क्षेत्र में पहली बार होने जा रहे इस कार्यक्रम की रूप-रेखा तैयार कर ली गई है. यह तय कर लिया गया है कि तीन दिवसीय इस आयोजन में किस दिन क्या होगा. 19 से 21 दिसंबर तक होने वाले इस आयोजन के दौरान देश और विदेश के विद्वान मिथिला क्षेत्र की साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधियों और उपलब्धियों पर चर्चा करेंगे. मिथिला के अतीत को याद करेंगे और सुखद भविष्य की बुनियाद कैसे गढ़ी जाए, इस पर बात करेंगे. फेस्टिवल की आयोजन समिति से जुड़े उत्पल ने बताया कि मधुबनी लिटरेचर फेस्टिवल एक बहुभाषिक समुदाय की अपने धरोहर के सचेतन को समेटने और समृद्ध साहित्य, कला के उल्लास का एक उत्सव है. इसकी परिकल्पना विरासत, स्थानीयता और विश्व को एक सूत्र में बांधने की है. इसका उद्देश्य आने वाली पीढ़ी को उसके समृद्ध संस्कृति से परिचय और विस्थापन को रोकना है. Also Read - दरभंगा एयरपोर्ट और एम्स के सहारे मिथिला में NDA को मिल सकती है बढ़त, जानिए क्यों सब पे भारी है ये मुद्दा!

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मिथिला के धरोहर और दर्शन का पुनर्पाठ

मधुबनी लिटरेचर फेस्टिवल का विषय क्षेत्र मिथिला के विशिष्ट अतीत और भविष्य का रेखांकन है. फेस्टिवल के आयोजन के उद्देश्य की चर्चा करते हुए राजनगर के वीएसजे कॉलेज के प्रिंसिपल हीरानंद आचार्य ने बताया, ‘राजनगर मिथिला के सांस्कृतिक धरोहर का एक केंद्र रहा है. इसलिए यहां लोक कला, इतिहास, साहित्य और संस्कृति का एक व्यापक आयोजन मिथिला के बौद्धिक धरोहर और दर्शन के पुनर्पाठ के लिए आवश्यक है.’ उन्होंने कहा कि इस फेस्टिवल में तंत्र, शक्ति परंपरा, मैथिली भाषा-साहित्य, उद्योग, जल संसाधन, राजनीति, कुटीर उद्योग, हस्तकला (सुजनी, केथरी, लाह जनेऊ सूती कड़ी वस्त्र ), मिथिला चित्रकला (गोदना और तंत्र) भोजन-विन्यास, स्थापत्य, जीवन-शैली, मैथिली रंगमंच, सिनेमा, ध्रुपद संगीत घराना, फोटोग्राफी आदि विषयों पर पैनल डिस्कशन, वार्ता, प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएंगे. इससे न सिर्फ मिथिला में रहने वालों, बल्कि देश-दुनिया से फेस्टिवल में आने वाले विभिन्न विषयों के विद्वानों को इस क्षेत्र की समृद्धि के बारे में जानकारी मिलेगी. मधुबनी लिटरेचर फेस्टिवल के आयोजन से जुड़ी प्रो. सविता झा खान ने India.com के साथ बीते दिनों हुई बातचीत में कहा था कि इस आयोजन से न सिर्फ मिथिला की प्राचीन समृद्धि को विश्व-पटल पर ले जाने की योजना मूर्त-रूप लेगी, बल्कि मिथिला क्षेत्र के प्रति राज्य से लेकर केंद्र सरकार का ध्यान भी आकृष्ट होगा.

इंडोनेशिया के थियेटर-ग्रुप की भी होगी प्रस्तुति

Madhubani Literature Festival का तीन दिवसीय आयोजन सभी वर्ग और समुदाय को ध्यान में रखकर हो रहा है. इसलिए इसमें न सिर्फ देशभर के विद्वानों का समागम होगा और संस्कृति के क्षेत्र में काम कर रहे विभिन्न संस्थाओं के साथ संयोजन का प्रयास किया जा रहा है. बल्कि कई विदेशी संस्थाओं को भी आमंत्रित किया जा रहा है. इस क्रम में इंडोनेशिया से रामायण थिएटर ग्रुप के भी फेस्टिवल में शामिल होने की सम्भावना है. वहीं, भारतीय पुरातत्व विभाग को कन्ज़र्वेशन कैंप लगाने का आमंत्रण दिया गया है. गांधी पर एक खास कार्यक्रम में उनपर आधारित गीत और कविताओं को भी समायोजित करने की योजना है. भारत-नेपाल संबंधों को सुदृढ़ करते हुए वहां के प्रमुख विद्वानों और कला मर्मज्ञों को भी आमंत्रित किया गया है. विलुप्त होती कला और संगीत विधाओं, वाद्ययंत्रों पर एक प्रदर्शनी की योजना है. मिथिला चित्रकला पर आधारित प्रतियोगिता, प्रदर्शनी, फोटोग्राफी प्रशिक्षण शिविर और शक्तिपीठों और तंत्र पर अकादमिक परिचर्चा और भ्रमण के साथ ही देशभर के विद्वानों से आलेख आमंत्रित कर एक त्रिभाषायी स्मारिका प्रकाशित करने की भी योजना है. इसके साथ ही मिथिला के प्रमुख दार्शनिक पंडित बच्चा झा के सौंवें पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में उनको समर्पित एक खास विमर्श सेशन की योजना है, जिसमें मिथिला के दर्शन पर विशद चर्चा होगी. लोक गायन और बाल रंगमंच शिविर की भी व्यापक व्यवस्था की जा रही है. कृषि, कृषक और ग्राम आधारित लेखन पर भी खास चर्चा होगी. साथ ही मिथिला की प्रमुख स्त्री उद्योगपतियों का भी एक परिचर्चा-सत्र रखा जाएगा. वहीं अप्रवासी मैथिल उद्योगपतियों को भी आमंत्रित कर फेस्टिवल का भाग बनाया जाएगा, ताकि उनको क्षेत्र में निवेश करने को प्रवृत्त किया जा सके.

किस दिन क्या होगा- कार्यक्रम सूची

Sessions (सत्र)

Water Session (Pokhri-Rajokhari)

Nepal Session(Beyond the borders)

Self and Others

Conservation session

Shakti and Tantra session

Philosophy session

Aprawasi Maithil

Maithili Navsanchar

Painting Session(Likhiya)

Mithila Lok

Maithili Cinema

Idea of Jan in Mithili literature

Sahityettar

Maithili Theatre(Baantar)

Cross-community lecdem

Stree Dalan

Gen X

Gram gatha

Competitons (प्रतियोगिता)

Photography(Ahibaat)

Painting(Likhiya)

Drawing(Aripan)-For women and children

Folk song for women

Workshops (कार्यशाला)

Photography

Painting: Mithila Painting,Godhna and Tantra

Handicaft

Khissa-Pihani

Bal Rang Manch Shivir by MAILORANG & Kilkari, Patna

Cultural Programs (सांस्कृतिक कार्यक्रम)

Darbhanga Gharana/malik brothers

Bhanu kala kendra

Indonesian troupe

Maithili rap

Women theatre

Local street play

Other Events (अन्य कार्यक्रम)

Rasanchowki on the inaugural day

Swagat gaan

Photo walk

Book release & Film release

Shaktipeeth tour on 20,21 december

Poet meet