ओरछा (मध्य प्रदेश): चुनाव के दौरान राजनैतिक दल, राजनेता, प्रत्याशी कुर्सी तक पहुंचने के लिए लोगों के बीच प्रचार में रात-दिन जुटे हुए हैं. कोई विकास कार्य गिना रहा है, तो कोई वादे कर रहा है. मतदाताओं के अलावा एक ऐसी चौखट भी है, जहां अगर अर्जी नहीं लगाई तो यह जोखिम भरा हो सकता है. अयोध्या में भगवान राम के मंदिर के लिए घमासान मचा है, लेकिन मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ ज़िले के ओरछा में भगवान राम का एक ऐसा मंदिर है, जहां श्रीराम भगवान तो हैं ही, लेकिन इससे कहीं ज्यादा वह यहां के राजा के रूप में स्थापित हैं. उन्हें यहां भगवान नहीं बल्कि श्री रामराजा सरकार कहा जाता है. ख़ास बात यह है कि यहां किसी भी तरह के प्रोटोकॉल को नहीं माना जाता है. यह दुनिया का इकलौता ऐसा मंदिर है, जहां राम राजा सरकार को राजा मान नियमित गार्ड ऑफ आॅनर दिया जाता है.

मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव का मतदान 28 नवंबर को होना है. सिर्फ दो दिन बचे हैं. ऐसे में सीएम हों या कोई भी नेता यहां सब प्रजा की हैसियत से आकर चुनाव में राजा राम के सामने जीत की गुहार लगा चुके हैं या पहुंच रहे हैं. विधानसभा चुनाव के ऐलान से पहले मध्य प्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान यहां पहुंचे थे. उन्होंने राम राजा सरकार के दर्शन किए थे. शिवराज के अलावा चुनावों के चलते यहां लगभग सभी दलों के नेता पहुंच चुके हैं.

इसलिए इतना महत्वपूर्ण है ये मंदिर, ये है इतिहास
देश और दुनिया में अनेक जगहों पर भगवान राम के मंदिर स्थापित हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले का ओरछा का स्थान अलग है. राम के दरबार के तौर पर यह बड़ा तीर्थ स्थल है. ओरछा को धाम का दर्जा दिया गया है. कहा जाता है कि भगवान राम खुद ही यहां के राजा बनना चाहते थे. लगभग 400 साल पहले राजा मधुकर शाह की पत्नी रानी कुंवर गनेशी के स्वप्न में आकर भगवान राम ने खुद को भगवान की बजाय राजा कहलवाने की इच्छा जाहिर की थी. तब से राम राजा सरकार को राजा के रूप में स्थापित है.

1554 से 1594 तक ओरछा में महाराजा मधुकर शाह का शासन था. राजा मधुकर शाह कृष्ण भक्त थे. एक बार उन्होंने रानी कुंवर गणेषी से वृंदावन चलने को कहा, लेकिन रानी ने वहां जाने से मना कर दिया. इसे लेकर राजा की रानी से बहस हो गई. इतिहास के अनुसार राजा ने रानी को चुनौती दी कि यदि राम भगवान हैं, तो उन्हें ओरछा लाकर दिखाओ. इस पर रानी अवधपुरी अयोध्या चली गईं और सरजू नदी के किनारे लक्ष्मन किला के पास कठिन तपस्या शुरू कर दी. एक माह तक रानी ने नदी के किनारे कठिन तपस्या की. तपस्या से थकी रानी ने सरजू नदी में छलांग लगा दी, लेकिन चमत्कारिक रूप से वह नदी से बाहर पहुंच गईं. इसे भगवान राम का ही चमत्कार माना गया. कहा जाता है कि बेहोश स्थिति में रहीं रानी ने आंख खोली तो भगवान राम उन्हें बाल रूप में गोद में बैठे प्रतीत हुए. रानी को अपार प्रसन्नता हुई. रानी ने भगवान से प्रार्थना की कि वह ओरछा चलें क्योंकि महाराजा का वचन था कि राम लला को ओरछा लाओ तभी तुम्हारी भक्ति श्रेष्ठ मानी जाएगी.

 

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भगवान राम ने रखी थीं ये तीन शर्त, इस तरह राजा बने भगवान राम
जानकारों और भगवान राम ने रानी के समक्ष तीन शर्त रखी. पहली यह कि वह पुख्य नक्षत्र में ही ओरछा के लिए प्रस्थान करेंगे. दूसरा ये कि जहां एक बार बैठ जाएंगे वहीं स्थापित हो जाएंगे. और तीसरा सबसे महत्वपूर्ण यह कि वह ओरछा के राजा कहलाएंगे. उनका यहां राजशाही फरमान चलेगा. इसी दौरान राम ने राजा मधुकर शाह को भी दर्शन दिए. दर्शन पाने के बाद राजा को रानी की इस तरह के स्वप्न और बात नहीं मानने का दुख हुआ. और उन्होंने रानी से हार मान ली. वहीं, दूसरी और रानी ने भगवान राम को ओरछा लाए जाने की तैयारी कर ली. भगवान राम की प्रतिमा को ओरछा में लाने में 8 माह का समय लगा. इस बीच ओरछा के राजा ने भी तैयारी शुरू कर दी. राजा ने भगवान राम की मूर्ती स्थापित करने के लिए ओरछा में अपने महल के ठीक सामने एक चतुर्भुज मंदिर का निर्माण कराया. महल के सामने मूर्ती को ऐसी जगह रखवाने की योजना बनाई कि महल से ही वह भगवान राम के दर्शन कर सकें, लेकिन यहां स्थापना से पहले भगवान राम को मंदिर के गर्भगृह में रखा गया. इसके बाद भगवान राम की प्रतिमा को जब चतुर्भुज मंदिर में स्थापित करने को ले जाने का प्रयास किया गया, लेकिन प्रतिमा को कोई हिला भी नहीं सका. शर्त के मुताबिक भगवान राम की प्रतिमा को जिस स्थान पर पहले रखा गया, वह उसी स्थान पर काबिज हो गए. काफी कोशिशों के बाद राजा मधुकर शाह ने मजबूरन इसी गर्भगृह को भगवान राम का मंदिर मान लिया और फिर शर्त के मुताबिक भगवान राम को ओरछा का राजा घोषित कर दिया गया. इस घटना को 400 साल बीत चुके हैं. तभी से अब तक भगवान राम यहां के राजा कहलाते हैं.

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यहां किसी का नहीं माना जाता प्रोटोकॉल
कितना भी बड़ा राजनेता हो या देश का कोई भी महत्वपूर्ण व्यक्ति, लेकिन ओरछा के राम राजा सरकार के दरबार में किसी का भी प्रोटोकॉल नहीं माना जाता है. लंबे समय से राम राजा सरकार को गार्ड ऑफ आॅनर दिया जाता है. पुलिस कर्मी नियमित यहां अपने राजा को सलामी देते हैं. यहां पूरी दुनिया से पर्यटक व श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. मंदिर के अंदर किसी भी तरह की तस्वीरें लेना प्रतिबंधित है. मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं द्वारा साल भर में अरबों रुपए का चढ़ावा चढ़ाया जाता है. इसका हिसाब रखने के लिए सरकार द्वारा कई लोगों की नियुक्ति की गई है.