एक नवंबर 1956 को जब मध्य प्रदेश बना तो शिक्षा मंत्री बने शंकरदयाल शर्मा. राज्य में धर्मनिरपेक्षता लाने के लिए उन्होंने हिन्दी के सिलेबस में परिवर्तन करा दिए. मध्य प्रदेश के अलग राज्य बनने के बाद स्कूलों में ग से गणेश पढ़ाया जाता था. शिक्षामंत्री शंकर दयाल शर्मा ने ग से गधा पढ़वाना शुरू किया. उस समय भोपाल राज्य में किसी हिन्दू देवी देवता के पाठ्यक्रम में होना उचित नहीं माना जाता था. भोपाल राज्य में भी ग से गधा ही पढ़ाया जाता था. शर्मा भोपाल राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके थे. उन्होंने उसी शिक्षा को मध्य प्रदेश में भी लागू किया. Also Read - इजराइल को क्लोरोक्वीन भेजने के लिए शुक्रिया, मेरे प्रिय मित्र नरेंद्र मोदी: बेंजामिन नेतन्याहू

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पत्रकार और लेखक दीपक तिवारी अपनी किताब राजनीतिनामा मध्यप्रदेश राजनेताओं के किस्से (1956 से 2003) में लिखते हैं कि उन दिनों शंकर दयाल शर्मा समकालीन नेताओं से ज्यादा पढ़े लिखे थे. मात्र 34 साल की उम्र में लखनऊ यूनिवर्सिटी से रीडर के पद से इस्तीफा देकर भोपाल के प्रधानमंत्री बने (इस समय मुख्यमंत्री को प्रधानमंत्री कहा जाता था) उन्होंने हिन्दी अंग्रेजी में पोस्ट ग्रेजुएट और वकालत की पढ़ाई की थी. वह शानदार अंग्रेजी बोलते थे. हिन्दी बोलने वाले नेता उनकी इस क्षमता से चिढ़ते थे. एक बार जब वह विधानसभा में अंग्रेजी में बोल रहे थे तो विधायकों ने ऐतराज जताया और कहा कि उन्हें अंग्रेजी की बजाय हिन्दी में बोलना चाहिए. आखिर अध्यक्ष के कहने पर उन्हें हिन्दी में बोलना पड़ा. Also Read - पीएम ने ट्वीट कर बताया,...तो यह मोदी को विवादों में घसीटने की कोई खुराफात लगती है

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1960 के दशक में शंकर दयाल शर्मा ने इंदिरा गांधी को कांग्रेस पार्टी का नेतृत्व दिलाने में मदद की. इंदिरा कैबिनेट में वे संचार मंत्री भी रहे. अधिकांश नेता चाहते थे कि उन्हें प्रधानमंत्री बनने का मौका मिले. 1991 में राजीव गांधी की हत्या के बाद डॉक्टर शंकर दयाल शर्मा के पास प्रधानमंत्री बनने का मौका था, लेकिन उन्होंने बड़ी ही सहजता से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि उनकी उम्र और सेहत अब इसकी इजाजत नहीं देते. शंकरदयाल शर्मा के इनकार के बाद नरसिम्हा राव देश के प्रधानमंत्री बने. 25 जुलाई 1992 को शर्मा देश के नौवें राष्ट्रपति बने. उन्होंने तीन प्रधानमंत्रियों को शपथ दिलाई.

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जब 1984 में शंकर दयाल शर्मा आंध्रप्रदेश के राज्यपाल थे उसी दौरान दिल्ली में उनकी बेटी गीतांजली और दामाद ललित माकन की हत्या कर दी गई. शंकर दयाल शर्मा की बेटी गीतांजलि के पति ललित माकन पर सिख दंगों के दौरान भीड़ को भड़काने के आरोप लगे. दिल्ली के कीर्ति नगर वाले घर के बाहर दोनों की हत्या सिख चरमपंथियों ने कर दी.

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हरजिंदर सिंह जिंदा, सुखदेव सिंह सुक्खा और रंजीत सिंह गिल पर हत्या का आरोप लगा. सुखदेव सिंह सुक्खा और हरजिंदर सिंह पकड़े गए. मुकदमा चला और दोनों को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा हुई. क्षमा याचिका राष्ट्रपति के पास पहुंची. राष्ट्रपति थे शंकर दयाल शर्मा. शर्मा की बेटी और दामाद के अलावा जनरल की हत्या में भी दोनों को दोषी करार दिया गया था.  इन हत्यारों को फांसी दे दी गई.

डॉ. शर्मा के बारे में एक किस्सा है. राज्य सभा में एक मौके पर वे इसलिए रो पड़े थे कि क्योंकि राज्य सभा के सदस्यों ने एक राजनैतिक मुद्दे पर सदन को जाम कर दिया था. अपने जीवन के अन्तिम पांच वर्षो में वे बीमार रहे. 9 अक्टूबर 1999 को उन्हें दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया. 1985 से 1986 तक वे पंजाब के राज्यपाल रहे. उन्होंने महाराष्ट्र के राज्यपाल के रूप में भी सेवाएं दीं. उपराष्ट्रपति से होते हुए राष्ट्रपति तक का सफर तय किया.