मध्यप्रदेश की उज्जैन सीट. जिले की 7 सीटों पर 66 प्रत्याशी मैदान में हैं और 14 लाख 26 हजार 230 मतदाता उनका फैसला करेंगे. उज्जैन वह शहर है जिसकी पहचान महाकाल तो हैं ही, एक ऐसा शख्स भी है जिसने एक सरकारी नौकरी छोड़ सामाजिक, राजनैतिक और धार्मिक कुरुतियों को पैनी निगाह से देखा ही नहीं, बल्कि कलम से व्यक्त भी किए. ”जो लिखेगा सो दिखेगा, जो दिखेगा सो बिकेगा-यही जीवन का मूल मंत्र है”, लिखने वाले शरद जोशी के बारे में कहा जाता है कि वह दूसरे व्यंग्यकारों की तरह बाजार को देखकर नहीं लिखते थे. उनके व्यंग्य में सामाजिक सरोकार स्पष्ट तौर पर दिखता था.

> शरद जोशी नेताओं पर लिखते हैं:-
उनका नमस्कार एक कांटा है, जो वे बार-बार वोटरों के तालाब में डालते हैं और मछलियां फंसाते हैं. उनका प्रणाम एक चाबुक है, हंटर है जिससे वे सबको घायल कर रहे हैं.

> भ्रष्टाचार पर शरद जोशी लिखते हैं:-
सारे संसार की मसि (स्याही) करें और सारी जमीन का कागज, फिर भी भ्रष्टाचार का भारतीय महाकाव्य अलिखित ही रहेगा.

> जनता के कष्ट पर लिखते हैं:-
जनता को कष्ट होता है मगर ऐसे में नेतृत्व चमक कर ऊपर उठता है. अफसर प्रमोशन पाते हैं और सहायता समितियां चंदे के रुपये बटोरती हैं. अकाल हो या दंगा, अन्तत: नेता, अफसर और समितियां ही लाभ में रहती हैं.

> मंत्रियों पर लिखते हैं:-
बाढ़ और अकाल से मुर्गा बच जाए, मगर वह मंत्रियों से सुरक्षित नहीं रह सकता है. बाहर भयंकर बाढ़ और अंदर लंच चलता है.

21 मई 1931 को उज्जैन में जन्मे शरद जोशी राज्य सरकार के सूचना एवं प्रकाशन विभाग की नौकरी छोड़ लेखन को पूरी तरह से आत्मसात किया था. उन्होंने कई समाचारपत्रों और रेडियो के लिए लेखन किया. बाद के दिनों में वह दूरदर्शन के लिए धारावाहिक और फिल्मी संवाद भी लिखे. शरद जोशी ने आपातकाल के दिनों पर पांच लघु कथाओं में व्यंग्य से जो प्रहार किए वह काफी चर्चा में रहे. वह चीजों को बड़ी सरलता से और छोटे में ही समझा देते थे. जैसे:-

> जब खरगोश सो कर उठा, उसने देखा कि कछुआ आगे बढ़ गया है, उसके हारने और बदनामी के स्पष्ट आसार हैं. खरगोश ने तुरंत आपातकाल घोषित कर दिया.
> शेर ने अपनी नई घोषणाओं में बताया– जंगल के पशुओं की सुविधा के लिए, गीदड़ मंडली के सुझावों को ध्यान में रखकर हमने अदालत को सचिवालय से जोड़ दिया है.
> लोमड़ी बाई, शासन ने हम बुद्धिजीवियों को यह रोटी इसी शर्त पर दी है कि इसे मुंह में ले हम अपनी चोंच को बंद रखें. मैं जरा प्रतिबद्ध हो गया हूं आजकल.

शरद जोशी ने लिखा था, लिखना मेरे लिए जीवन जीने की तरकीब है. इतना लिख लेने के बाद अपने लिखे को देख मैं सिर्फ यही कह पाता हूं कि चलो, इतने बरस जी लिया. यह न होता तो इसका क्या विकल्प होता, अब सोचना कठिन है. लेखन मेरा निजी उद्देश्य है. शरद जोशी भारत के पहले व्यंग्यकार थे, जिन्होंने सन् 1968 में पहली बार मुंबई में चकल्लस के मंच पर, जहां हास्य कविताएं पढ़ी जाती थीं, गद्य पढ़ा और हास्य-व्यंग्य में अपना लोहा मनवाया.

इंदौर में एक कार्यक्रम में शरद जोशी की बेटी नेहा शरद ने बताया कि उनके पिता ने कई दशक पहले यह लिखा था:-

हमारे देश की आम जनता को पता लगना चाहिए कि उसने देश का प्रधानमंत्री नहीं, चुना है, बल्कि विश्व नेता चुना है, जिसे दुनिया भर की समस्याएं सुलझाना है. हमारी संवैधानिक मजबूरी है कि हम एक ही प्रधानमंत्री विश्व को सप्लाई कर सकते हैं. काश, हम चार-पांच प्रधानमंत्री चुन लेते तब यह संभव होता कि उनमें से एक पीएम को हम देश के लिए रख लेते. संसार के देश तो चाहते हैं कि हमारा प्रधानमंत्री दुनिया भर में विश्व शांति पर भाषण दे पर प्रधानमंत्री पूरे साल देश से बाहर नहीं रह सकता. कभी लोकसभा का सत्र है तो कभी कश्मीर के चुनाव आ जाते हैं, तब प्रधानमंत्री को देश में लौटना पड़ता है.

ऊपर की लाइन से आप इसकी प्रासंगिकता को देख सकते हैं.
‘अकाल या दंगा, अन्तत: नेता, अफसर और समितियां ही लाभ में रहती हैं’, शरद जोशी के उज्जैन का सूरत-ए-हाल

जिले की 7 में से 5 सीटों पर निर्दलीयों ने बीजेपी और कांग्रेस के लिए परेशानी खड़ी कर दी है. उज्जैन उत्तर बीजेपी की परंपरागत सीट है. पिछले 5 विधानसभा चुनाव में 4 में उसे जीत मिली है. कांग्रेस को 1 बार ही जीत मिली है. बीजेपी के कैबिनेट मंत्री को छठी बार टिकट दिया है. कांग्रेस ने युवा कांग्रेस के विवेक यादव को टिकट दिया है.

उज्जैन दक्षिण
यह भी बीजेपी की परंपरागत सीट है. मौजूदा विधायक शिवनारायण जागीरदार का टिकट काट कर उनकी जगह पर्यटन निगम अध्यक्ष डॉ. मोहन यादव को बीजेपी ने टिकट दिया है. कांग्रेस ने जिला कांग्रेस अध्यक्ष जयसिंह दरबार को टिकट दिया है.

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तराना
यह भी बीजेपी की परंपरागत सीट मानी जाती है. बीजेपी के मौजूदा विधायक रोडमल राठौर का टिकट काट कर उज्जैन के विकास प्राधिकरण उपाध्यक्ष अनिल फिरोजिया को उम्मीदवार बनाया है. कांग्रेस ने भी इंदौर के राजेंद्र मालवीय को टिकट दिया है.

महिदपुर
यह सीट कांग्रेस के पास है. कांग्रेस ने मौजूदा विधायक डॉ. कल्पना परुलेकर को एक बार फिर टिकट दिया है. बीजेपी ने एक बार फिर पूर्व विधायक बहादुरसिंह चौहान को मैदान में उतारा है.

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बडनगर
यह भी बीजेपी की परंपरागत सीट मानी जाती है. बीजेपी ने मौजूदा विधायक शांतिलाल धबाई की जगह नगर पालिका अध्यक्ष मुकेश पंड्या को टिकट दिया है. कांग्रेस ने युवा नेता महेश पटेल को उम्मीदवार बनाया है.

घट्टिया
यह सीट कांग्रेस की मानी जाती रही है. कांग्रेस के विधायक रामलाल मालवीय तीसरी बार मैदान में है. बीजेपी ने युवा नेता सतीश मालवीय को मैदान में उतारा है.

नागदा
यह सीट भी कांग्रेस की मानी जाती है. कांग्रेस ने विधायक दिलीपसिंह गुर्जर को टिकट दिया है. बीजेपी ने युवा नेता दिलीप शेखावत को दोबारा मैदान में उतारा है.