Mahant Narendra Giri: कौन हैं महंत नरेंद्र गिरि? सरकार सपा की हो या भाजपा की रसूख सभी में था कायम

घटनास्थल से बरामद सुसाईड नोट में उनके शिष्य आनंद गिरी का जिक्र है. जानकारी के मुताबिक इस सुसाईड नोट में बताया गया है कि आनंद गिरी की प्रताड़ना से महंत नरेंद्र गिरी परेशान चल रहे थे.

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Mahant Narendra Giri Death: संत समाज के लोगों के लिए बीते सोमवार के दिन प्रयागराज से बुरी खबर सामने आई. यहां शाम 6 बजे के लगभग यह सूचना सामने आई कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषज के के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. प्रयागराज स्थित मठ में उनका शव कमरे में फंदे से लटकता मिला था. शुरुआती जांच में पुलिस इसे आत्महत्या मान रही थी लेकिन घटनास्थल से बरामद सुसाईड नोट में उनके शिष्य आनंद गिरी का जिक्र है. जानकारी के मुताबिक इस सुसाईड नोट में बताया गया है कि आनंद गिरी की प्रताड़ना से महंत नरेंद्र गिरी परेशान चल रहे थे. वहीं किसी जमीन की बिक्री और खरीद को लेकर भी दोनों के बीच कुछ विवाद चल रहा था.

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हिरासत में आनंद गिरी

बता दें कि पुलिस ने कुछ समय पहले ही नरेंद्र गिरी के शिष्य आनंद गिरि को गिरप्तार कर लिया है. वहीं शिष्य के परिवार के लोगों को भी गिरफ्तार किाय गया है. आनंद गिरि का इस मामले पर कहना है कि यह एक षडयंत्र है. उनका उनके गुरु के साथ कोई भी विवाद नहीं था. बता दें कि महंत के निधन के बाद संत समाज में शोक की लहर छाई हुई है. इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, योगी आदित्यनाथ व कई बड़ी हस्तियों ने उनकी मौत पर दुख व्यक्त किया है.

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बता दें कि एक दिन पहले ही उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने महंत नरेंद्र गिरि से मुलाकात की थी. इस दौरान वे बिल्कुल ठीक थी. ऐसे में संत की हत्या या आत्महत्या के मामले ने तूल पकड़ लिया है. ऐसे में आपको बताएंगे कि आखिर कौन थे मंहत नरेंद्र गिरि. आखिर क्यों उनकी मौत पर देश की बड़ी बड़ी हस्तियां इन्हें श्रद्धांजलि दे रही हैं. वहीं राम मंदिर निर्माण में उनकी क्या भूमिका रही है.

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कौन थे महंत नरेंद्र गिरी

महंत नरेंद्र गिरी राम मंदिर आंदोलन से जुड़े हुए थे. उन्होंने राम मंदिर आंदोलन में बड़ी भूमिका निभाई थी. साल 2019 में वे 13 अखाड़ों की बैठक में दोबारा अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष चुना गया था. वहीं वे संगम तट पर लेटे हनुमान मंदिर के भी मंहत थे. बता दें कि अखिल आखड़ा परिषद की ओर से देश के 13 अखाड़ों को ही मान्यता प्राप्त है. शुक्रवार के दिन प्रयागराज में इन 13 अखाड़ों की बैठख में सर्वसम्मति से त्रिकाल भवंता के परी अखाड़ा और किन्नर अखाड़े पर प्रतिबंध लगा दिया गया. वहीं अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी की मानें तो 13 अखाड़ों के अलावा किसी भी अन्य अखाड़ें को हरिद्वार कुम्भ में प्रवेश नहीं दिया जाएगा. महंत महेंद्र गिरी राममंदिर आंदोलन से जुड़े थे. उन्होंमने मंदिर आंदोलन में अहम भूमिका निभाई थी.

क्या हैं ये अखाड़े

आदि गुरू शंकराचार्य ने देश के चार दिशाओं (बद्रीनाथ, रामेश्वरम, जगन्नाथ पुरी, द्वारिका पीठ) में धर्म की स्थापना के लिए मठ स्थापित किए. इन अखाड़ों को मठ कहा जाता है. शंकराचार्य का मानना था कि मठ, मंदिर और श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए जरूरत पड़ने पर शक्ति का भी इस्तेमाल किया जा सकता है. तभी से मठ के साधु शारीरिक कसरत, व्यायाम पर करने लगे तथा हथियारों चलाने की ट्रेनिंग भी लेते. बता दें कि देश में ऐसे कुल 13 अखाड़ें हैं जो तीन मतों में बंटे हैं और यहीं अखाड़ें हिंदू धर्म से जुड़े रीति-रिवाजों और त्योहारों का आयोजन करते रहते हैं. कुंभ के मेले में इन अखाड़ों की भूमिका सबसे ज्यादा होती है.

सभी सरकारों में था रसूख

राज्य में सपा, बसपा या भाजपा किसी भी पार्टी की सरकार हो मंहत नरेंद्र गिरि का रसूख सभी सरकारों में एक समान रहता. कुंभ 2019 के पहले पीएम नरेंद्र मोदी ने गंगा पूजना कराया. सपा सुप्रीमों मुलायम सिंह यादव व अखिलेश यादव की बात करें तो इनका भी महंत नरेंद्र गिरि से खूब लगाव था. मुलायम सिंह यादव को हनुमान मंदिर में दर्शन कराने से लेकर बाघम्बरी मठ में भोजन के दौरान तक की तस्वीर अब भी बड़े हनुमान मंदिर और बाघम्बरी मठ में लगी हुई है. साल 2017 में मंहत की नजदीकि भाजपा सरकार के साथ बढ गई. दरअसल योगी आदित्यनाथ खुद एक संत समाज से आते हैं ऐसे में महंद नरेंद्र गिरि के साथ उनके रिश्ते काफी अच्छे हैं.

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Published Date:September 21, 2021 8:32 AM IST

Updated Date:September 21, 2021 8:33 AM IST

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