नई दिल्ली/जयपुर. राजस्थान के रहने वाले 71 साल के तीतर सिंह इस बार श्रीकरणपुर विधानसभा से चुनाव मैदान में हैं. वह अबतक 23 चुनाव लड़ चुके हैं और हर बार वह निर्दलीय ही मैदान में उतरते हैं. ताज्जुब की बात ये है कि वह मनरेगा मजदूर हैं और उनके पास कोई भी आय का साधन नहीं है. वह हर बार नामांकन भरने के लिए अपने घर से कोई जानवर बेचते हैं और उससे मिले पैसे को लगाते हैं.

तीतर सिंह साल 1975 में पहली बार विधानसभा का चुनाव लड़ने उतरे थे. 2013 में वह विधानसभा चुनाव और 2014 में लोकसभा चुनाव में मैदान में श्रीगंगानगर लोकसभा सीट से मैदान में उतरे थे. साल 2008 के चुनाव में उन्हें 938 वोट और साल 2013 के चुनाव में 427 वोट मिले थे. वह साइकिल से ही चुनाव प्रचार करते हैं और घर-घर पहुंचने की कोशिश करते हैं. हालांकि, उन्हें आज तक सफलता नहीं मिली है.

इसलिए लड़ते हैं चुनाव
तीतर सिंह कहते हैं कि वह बीजेपी और कांग्रेस दोनों को वोट दे चुके हैं. लेकिन कोई भी उनके क्षेत्र का विकास नहीं कर पाया. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रतिनिधि क्षेत्र का विकास करने की जगह खुद का विकास करने लगते हैं. वह गरीबों की समस्या की ओर ध्यान नहीं देते हैं. उनके दो लड़के और तीन लड़कियां हैं. सभी शादीशुदा हैं. उनका परिवार भूमिहीन है और मजदूरी करके जीवन बीताता है. इस बार क्षेत्रीय लोगों ने चंदा जुटाकर 5 हजार इकट्ठा किए और नामांकन फॉर्म भरने में मदद की.

 

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प्रचार का तरीका है अनोखा
तीतर सिंह के प्रचार का तरीखा अनोखा है. वह साइकिल से गांव-गांव जाते हैं. एक-एक घर जाकर लोगों से बात करने की कोशिश करते हैं. वह प्रचार के दौरान वह चुनाव जीतने के बाद भूमिहीन गरीबों को फ्री में जमीन और घर दिलवाने का वादा करते हैं. वह चुनाव मैं पैसों के खर्च के खिलाफ हैं और आयोग से अपील करते हैं कि इसकी लिमिट करनी चाहिए.

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ये है पॉलिटिकल करियर
तीतर सिंह हर दिन का 142 रुपये कमाते हैं. अपने नामांकन फॉर्म में उन्होंने चल-अचल संपत्ति और आपराधिक पृष्ठभूमि के कॉलम को खाली छोड़ दिया है. वह 9 बार लोकसभा, 9 बार विधानसभा के साथ-साथ नगर निगम के चुनाव में भी उतर चुके हैं. हालांकि, पंचायत चुनाव लड़ने के लिए उचित योग्यता नहीं होने पर वह इसमें नहीं उतर पाए हैं.