नई दिल्ली. देश के कई राज्यों में बच्चा चोरी की अफवाह या अन्य घटनाओं को लेकर लोगों को पीट-पीटकर मार डालने की घटनाओं (मॉब-लिंचिंग) को लेकर सोशल मीडिया एप्लीकेशन, वाट्सएप पूरी तरह से बैकफुट पर आ गई है. एक दिन पहले मॉब-लिंचिंग की घटनाओं पर भारत सरकार के सख्त रुख का जवाब देने के बाद वाट्सएप ने अब फर्जी खबरों के प्रसार को रोकने के लिए समाज-विज्ञानियों से सुझाव लेने का निर्णय किया है. इसके तहत कंपनी ने फर्जी खबरों को रोकने के लिए शोधकर्ताओं (रिसर्चरों) से मदद मांगी है. कंपनी इस शोध कार्य पर 50 हजार डॉलर यानी करीब 35 लाख रुपए खर्च करेगी. कंपनी के अनुसार इस शोध से सोशल मीडिया पर अफवाह या फर्जी खबरों का प्रसार रोकने का तरीका पता चल सकेगा. Also Read - WhatsApp Multiple Device Feature: WhatsApp में जल्‍द आने वाला है मल्‍टी-डिवाइस फीचर, लंबे समय से हो रहा इंतजार

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बच्चा चोरी या गो-तस्करों के साथ मॉब-लिंचिंग Also Read - WhatsApp Web new features: WhatsApp का नया फीचर, कम्‍प्‍यूटर-लैपटॉप से कर पाएंगे ऑडियो-वीडियो कॉल

हाल के समय में भीड़ द्वारा हत्या के कई मामले सामने आए हैं. एक आंकड़े के अनुसार अब तक करीब 25 लोगों को भीड़ द्वारा पीट-पीटकर मार डाला गया है. बच्चा चुराने, गो-तस्करी या किसी अन्य घटनाओं पर कई राज्यों में लोगों की बेरहमी से हत्या की गई है. कुछ दिन पहले ही महाराष्ट्र में भीड़ ने बच्चा चोरी के शक में 5 लोगों की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी. बाद में पता चला कि ये लोग नौकरी की तलाश में भटक रहे थे. इस मामले में 23 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है. कुछ ऐसी ही घटनाएं असम, बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश में भी हुई हैं. पिछले माह छुट्टियां मनाने असम आए दो युवकों को बच्चा चोर समझकर उन्हें पीट-पीटकर मार डाला गया था.

वहीं, झारखंड के जमशेदपुर में भी इसी तरह की अफवाह पर भीड़ ने 7 लोगों की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी. इन सारी घटनाओं की जांच में वाट्सएप पर एक-दूसरे को मैसेज भेजकर भीड़ इकट्ठा करने और इसके बाद वारदात को अंजाम देने की बात सामने आई. 2014 के बाद से फेसबुक के अधीन काम कर रहे इस सोशल मीडिया एप्लीकेशन पर सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने वाली अफवाहें फैलाने का आरोप लगा. इसके बाद ही भारतीय IT मंत्रालय ने वाट्सएप को नोटिस भेजा था. इसके जवाब में कंपनी ने भारत सरकार को आश्वस्त किया है कि वह अफवाहों को रोकने के लिए कदम उठा रही है.

भारत सरकार को दिया जवाब- सख्त नियम बनाएंगे

मॉब-लिंचिंग की घटनाओं को लेकर उठे सवाल पर वाट्सऐप ने IT मंत्रालय को दिए अपने जवाब में कहा है कि हिंसा की इन जघन्य घटनाओं से वह भी चिंतित है. कंपनी ने कहा है कि वह इस अहम मुद्दे पर तुरंत जवाब देना चाहती है. कंपनी इस संबंध में एप के दुरुपयोगों पर रोक लगाने के उपायों पर गंभीरता से विचार कर रही है. फर्जी खबरों को रोकने के संबंध में लागू किए जाने वाले उपायों की रूपरेखा बनाई जा रही है. वाट्सएप ने कहा कि फर्जी खबरों और गलत सूचनाओं की चुनौती से निपटने के लिए सरकार, समाज और IT कंपनियों को साथ मिलकर काम करने की जरूरत है. IT मंत्रालय ने बीते मंगलवार को इस मुद्दे पर सख्त प्रतिक्रिया जताई थी. साथी ही वाट्सएप प्रबंधन को गैरजिम्मेदारी और भड़काऊ संदेशों पर नियंत्रण लगाने को कहा था. वाट्सएप से मिले जवाब के बाद सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कल कहा था कि IT मंत्रालय के नोटिस के बाद वाट्सएप द्वारा उठाए जा रहे कदमों की वह सराहना करते हैं. साथ ही उम्मीद करते हैं कि एप का दुरुपयोग रोकने के लिए वाट्सएप द्वारा जल्द ही उपाय किए जाएंगे.

फर्जी खबरें रोकने को वाट्सएप ने उठाए हैं कदम

सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों का प्रसार रोकने के लिए वाट्सएप ने पिछले सप्ताह ही अपने एप में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं. कंपनी ने बताया था कि उसने एप में नया फीचर जोड़ा है. इसके तहत वाट्सएप ग्रुप के एडमिन को यह अधिकार दिया गया कि उसकी अनुमति के बाद ही ग्रुप का कोई सदस्य कोई मैसेज पोस्ट कर सकेगा. भारत में इस साल के अंत में और अगले साल होने वाले चुनावों के दौरान एप के दुरुपयोग को रोकने के लिए भी कंपनी ने कदम उठाया है. इसके तहत कंपनी कानून के जानकारों के साथ एक इंगेजमेंट-प्रोग्राम चलाने वाली है. अपने विश्वव्यापी नेटवर्क को फर्जी खबरों के जाल से बचाने के लिए वाट्सएप ने हाल के दिनों में ब्राजील और मैक्सिको में भी ऐसे ही कदम उठाए हैं. ब्राजील और मैक्सिको में वाट्सएप ने विभिन्न मीडिया समूहों के साथ समझौता किया है, ताकि फर्जी खबरों का प्रसार रोका जा सके. आपको बता दें कि भारत में दुनिया के सबसे अधिक, 200 मीलियन यानी 20 करोड़ से ज्यादा वाट्सएप यूजर हैं. ये यूजर रोजाना करोड़ों-अरबों मैसेज एक-दूसरे को भेजते हैं.