जयपुर: दुनिया भर के कुछ सबसे ज्यादा खतरनाक बीमारियों के खिलाफ कई दवाओं के आविष्कार के साथ उनके नाम के साथ 320 पेटेंट दर्ज हैं, इसके बावजूद राजेंद्र जोशी आज भी अपने देश, अपनी जड़ों से जुड़े हैं. यह 1969 की बात है, जब आंखों में अपना नाम रोशन करने का ख्वाब संजोए वे कम उम्र में ही स्विट्जरलैंड जा बसे थे.

बीआईटीएस पिलानी के फार्मेसी ग्रेजुएट 83 वर्षीय डॉ राजेंद्र जोशी स्विट्जरलैंड में अपने लिए जगह तैयार करने से पहले उच्च शिक्षा के लिए चेकोस्लोवाकिया गए. उन्होंने एक प्रोफेसर के रूप में और बाद में एक उद्यमी के रूप में अपनी एक अलग पहचान बनाई. वे फुमाफार्म एजी स्विट्जरलैंड के संस्थापक और भागीदार थे. यह एक दवा कंपनी थी, जिसे उन्होंने 2006 में बायोजेन इडेक को बेच दिया था. फुमाफार्म में उन्होंने कई बीमारियों के लिए दवाएं बनाई, जैसे सोरायसिस के लिए फ्यूमाडर्म, जो जर्मनी में बिकती है. उन्हें मुख्य रूप से मल्टीपल स्कलेरोसिस (एमएस) के खिलाफ एक दवा टेकफिडा (बीजी 12) के आविष्कार के लिए जाना जाता है, जो कि एक स्नायविक रोग है जो युवा लोगों में अधिक होता है. इस दवा को एफडीए द्वारा स्वर्ण मानक बेंचमार्क प्रदान किया गया.

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डॉ जोशी ने 1989 में ईटीएच, ज्यूरिख की एक फार्मासिस्ट उर्सुला जोशी से से शादी की थी, जो अपनी फार्मेसी चला रही थीं. स्विट्जरलैंड में अपने जीवन के चार दशक गुजारने के बाद अपने देश के प्रति उनका प्यार उन्हें अपने देशवासियों, विशेषकर उनकी मातृभूमि राजस्थान के लिए कुछ करने के लिहाज से उन्हें भारत में वापस लाया. काफी बारीकी से विश्लेषण करने के बाद दोनों ने पाया कि भारत में शिक्षा प्रणाली सिर्फ डिग्री प्रदान करती है, लेकिन लोगों को अपनी आजीविका कमाने के लिए तैयार नहीं करती. ऐसा इंडस्ट्रीज की जरूरत के मुताबिक सैद्धांतिक और व्यावहारिक लर्निंग के बीच कनेक्शन की कमी के कारण है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्किल इंडिया और मेक इन इंडिया पर फोकस किए जाने के बाद उन्हें शिक्षा का एक ऐसा मॉडल दिखाने का मौका मिला, जहां युवाओं को व्यावसायिक स्नातक की डिग्री के साथ उन्हें कौशल सिद्ध बनाया गया और इसके बाद उन्हें स्विस ड्यूल सिस्टम ऑफ एजुकेशन के महत्व को साबित करने के लिए नौकरियां प्रदान की गईं.

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यह उनके परिवार और विशेष रूप से उनके भतीजों के प्रति उनका प्यार था, जो अब आरजे समूह की कंपनियों की स्थापना के उनके मिशन के साथ जुड़े हुए हैं. भारतीय स्किल डेवलपमेंट यूनिवर्सिटी के साथ, जहां छात्रों को कुशल बनाने और उन्हें नौकरी के लिए तैयार किया जा रहा है, इस स्विस युगल ने अपने भतीजे जयंत जोशी के साथ एक स्विस कंपनी के संयुक्त उद्यम में एक प्रीसिशन यूनिट आरएस इंडिया की स्थापना की. उद्देश्य था- भारत को सटीक, गुणवत्ता और स्थायित्व का पर्याय बनाना और साथ ही साथ बीएसडीयू के छात्रों को रोजगार प्रदान करना.

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भारतीय स्किल डेवलपमेंट यूनिवर्सिटी के साथ एक मशीन-एक-छात्र की अवधारणा को लागू किया जा रहा है ताकि मशीन के साथ सीखने, विश्लेषण और अभ्यास करने के लिए प्रत्येक छात्र के पास पर्याप्त समय हो. विभिन्न स्ट्रीम्स में बी. वोक और एम. वोक पाठ्यक्रम पेश किए गए हैं, जो विद्यार्थियों को अपनी पसंद के कैरियर का चयन करने में सक्षम बनाते हैं. यहां उद्योग की जरूरतों के हिसाब से अनुभवी शिक्षण प्रदान करने के साथ कस्टमाइज्ड इन-कैंपस ट्रेनिंग पर फोकस किया जाता है.