नई दिल्ली. बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित बालिका गृह यौन उत्पीड़न मामले के खुलासे के बाद मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर जहां जेल में बंद है, वहीं उसकी ‘सहयोगी’ के रूप में चर्चित मधु मैडम की पुलिस सरगर्मी से तलाश कर रही है. बालिका गृह कांड के खुलासे के बाद से ही मधु नामक यह महिला गायब है. स्थानीय अखबारों की रिपोर्ट के अनुसार, वह मधु मैडम ही है जो ब्रजेश ठाकुर की सबसे बड़ी राजदार रही और जिसने बालिका गृह, अल्पावास गृह और अन्य शेल्टर होम को ‘कोठे’ में तब्दील कर दिया था. ब्रजेश ठाकुर की ‘छांव’ में पलते हुए मधु, समाज कल्याण विभाग से अल्पावास गृहों के लिए मिलने वाली राशि का इस्तेमाल मनमाने तरीके से करती रही. मुजफ्फरपुर के रेडलाइट एरिया में रहने वाली मधु का प्रभाव आसपास के इलाकों से लेकर सरकारी दफ्तरों में काम करने वाले बाबुओं तक पर था. ब्रजेश ठाकुर की संस्था, सेवा संकल्प और विकास समिति के खजाने का जिम्मा भी मधु पर ही था. सरकारी अनुदान की बदौलत ही मधु ऐशो-आराम की जिंदगी जीती थी. आइए जानते हैं बालिका गृह स्कैंडल कांड के इस दागदार चेहरे की कहानी.

सिर्फ नेगेटिव ही नहीं पॉजिटिव बातों पर भी ध्यान दें- नीतीश कुमार

प्रशासन के अभियान से चर्चा में आए मधु और ब्रजेश
बालिका गृह कांड से चर्चा में आई मधु का इतिहास करीबन 3 दशकों का है. हिन्दी अखबार दैनिक जागरण के अनुसार, वर्ष 2001 में मुजफ्फरपुर में देह व्यापार के अड्डे लालटेनपट्टी में तत्कालीन प्रशिक्षु आईपीएस दीपिका सूरी ने महिलाओं के उद्धार के लिए ऑपरेशन उजाला नाम से एक अभियान चलाया था. इसके तहत देह व्यापार से जुड़ी यौनकर्मियों और उनके बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने, रोजगार दिलाने और बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने के काम किए गए. बालिका गृह कांड का मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर इसी दौरान प्रशासन का सहयोग करने वाले शख्स के रूप में सामने आया था. वहीं, मधु भी इसी अभियान के तहत महिलाओं की दशा सुधारने वाली कार्यकर्ता के रूप में चर्चा में आई थी. आईपीएस दीपिका सूरी ने यौनकर्मियों की स्थिति सुधारने के लिए मोहल्ला सुधार कमेटी बनाई, जिसके सदस्यों के रूप में ब्रजेश ठाकुर और मधु सामने आए. यह कमेटी मोहल्लों में जागरूकता अभियान चलाती थी. इसी कमेटी के जरिए ब्रजेश ठाकुर का एनजीओ सेवा संकल्प विकास समिति सक्रिय हुई. बाद के दिनों में ब्रजेश ठाकुर ने समुदाय आधारित संगठन वामा शक्ति वाहिनी बनाई, जिसकी कमान मधु को सौंपी. यह संगठन मानव तस्करी रोकने, एचआईवी जागरूकता आदि का काम करता था.

यह भी पढ़ें – राजद के धरने में विपक्ष का जमावड़ा, राहुल ने कहा नीतीश तुरंत कार्रवाई करें

मधु के जरिए ब्रजेश ने शुरू किया काला धंधा
मधु जिस वामा शक्ति वाहिनी संगठन के जरिए लड़कियों के पुनर्वास का काम करती थी, ब्रजेश ठाकुर ने इसी को बाद में बालिका सुधार गृह जैसी संस्था के रूप में विकसित कर लिया. चूंकि वामा शक्ति वाहिनी कोठे से मुक्त कराई गई लड़कियों को स्वरोजगार का प्रशिक्षण भी दिलाता था, इसलिए शुरुआती दिनों में ब्रजेश और मधु की हरकतों पर किसी का ध्यान नहीं गया. दैनिक जागरण के अनुसार, प्रशिक्षु आईपीएस दीपिका सूरी ने जिन लोगों के कब्जे से यौनकर्मियों को मुक्त कराया था, बाद के दिनों में यही लोग मधु और ब्रजेश की टीम का हिस्सा बन गए और लड़कियों की खरीद-फरोख्त और सप्लाई का गोरखधंधा फिर से शुरू हो गया. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अपने रूप-यौवन के लटके-झटके और लुभावनी बातचीत की शैली से मधु ने सरकारी दफ्तरों में पैठ बना ली. ब्रजेश ठाकुर पर मधु का कितना प्रभाव था, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ब्रजेश ने उसे जिला किशोर न्याय परिषद की सदस्य बनवा दिया. परिषद का सदस्य बनने का ही प्रभाव था कि जब सरकार ने बालिका गृहों के संचालन का जिम्मा गैर सरकारी संस्थाओं को देने का निर्णय लिया तो मुजफ्फरपुर समते कई जिलों के बालिका गृहों और अन्य शेल्टर होम के संचालन का जिम्मा ब्रजेश ठाकुर के एनजीओ सेवा संकल्प समिति को मिल गया. एक बार बालिका गृह के संचालन का काम हथियाने के बाद उन जगहों पर बच्चियों और लड़कियों के यौन उत्पीड़न का नंगा-खेल शुरू हो गया. इस घिनौने काम की परिणति के रूप में ही मुजफ्फरपुर शेल्टर होम स्कैंडल का मामला सामने आया है.

शेल्टर होम स्कैंडलः सिर्फ आरा-छपरा या पटना ही नहीं, 7 मनोवैज्ञानिकों की रिपोर्ट से हिल गया पूरा बिहार

शेल्टर होम स्कैंडलः सिर्फ आरा-छपरा या पटना ही नहीं, 7 मनोवैज्ञानिकों की रिपोर्ट से हिल गया पूरा बिहार

महीने में 20 दिन टूर, महंगे होटल में होता था रहना-खाना
सरकार के समाज कल्याण विभाग की ओर से बालिका गृहों के लिए मिलने वाली राशि का इस्तेमाल, मधु अपने ऐशो-आराम के लिए करती थी. स्थानीय अखबारों की रिपोर्टों की माने तो ब्रजेश ठाकुर के एनजीओ की कमाई पर मधु का कब्जा था. संस्था से जुड़े लोगों के वेतन या अन्य काम के लिए जारी होने वाले पैसों पर उसका एकाधिकार होता था. ब्रजेश ठाकुर की शह पर वह मनमाने तरीके से इस पैसे का इस्तेमाल करती थी. दैनिक जागरण की खबर के अनुसार, उसका स्थाई ठिकाना वैसे तो मुजफ्फरपुर के रेडलाइट एरिया में ही था, लेकिन महीने के 20 दिन वह शहर से बाहर ही रहती थी. मधु जहां जाती, महंगे होटल में उसके ठहरने और खाने-पीने का इंतजाम होता था. मधु का दिल्ली, कोलकाता और मुंबई जैसे शहरों में भी कनेक्शन था. लोग बताते हैं कि इन महानगरों के रेडलाइट इलाकों से भी उसका गहरा जुड़ाव रहा है. चूंकि मुजफ्फरपुर में रेडलाइट एरिया में रहने के कारण उसके आवास पर पुलिस के आने का खतरा कम होता था, इसलिए उसे किसी भी सरकारी एजेंसी का डर नहीं था. आम लोगों को भी इसीलिए बालिका गृहों में लड़कियों के साथ होने वाले यौन उत्पीड़न की जानकारी कम ही मिल पाती थी. स्थानीय अखबारों के अनुसार, मधु के सेंटर पर देश के कई शहरों के रईस आते थे और लड़कियों को अपनी हवस का शिकार बनाते थे.

TISS की रिपोर्ट में बिहार के 20 ‘ठिकाने’ जहां होता है हैवानियत का गंदा खेल

मामले के खुलासे के बाद से ही गायब है मधु
इसी साल अप्रैल में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज ने बिहार सरकार को प्रदेश के सभी 110 अल्पावास गृहों, बालिका गृहों समेत अन्य शेल्टर होम को लेकर की गई सोशल ऑडिट रिपोर्ट सौंपी. इस रिपोर्ट के बाद ही मुजफ्फरपुर बालिका गृह में लड़कियों के यौन उत्पीड़न का मामला सामने आया. तब समाज कल्याण विभाग ने मई के आखिरी हफ्ते में ब्रजेश ठाकुर के खिलाफ मामला दर्ज किया. मीडिया में मुजफ्फरपुर शेल्टर होम स्कैंडल के सुर्खियों में आने के बाद 3 जून को ब्रजेश ठाकुर को गिरफ्तार कर लिया गया, लेकिन ब्रजेश की राजदार मधु पुलिस की पकड़ में नहीं आई. ब्रजेश के जेल जाने के बाद से ही वह लापता है. ब्रजेश ठाकुर के एनजीओ का काला-साम्राज्य बिहार के कई जिलों में फैला हुआ था, इसलिए मुजफ्फरपुर पुलिस अन्य जिलों की पुलिस की मदद से मधु को तलाश रही है. लेकिन अभी तक वह पकड़ में नहीं आई है. स्थानीय लोगों का कहना है कि मधु की गिरफ्तारी के बाद ही इस मामले के कई अनदेखे पहलुओं से पर्दा उठ सकता है. आपको बता दें कि मुजफ्फरपुर बालिका गृह में 34 लड़कियों के साथ यौन उत्पीड़न को लेकर पुलिस ने ब्रजेश ठाकुर और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया है. राज्य सरकार ने इसकी जांच का जिम्मा केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई को सौंपा है.

शेल्टर होम स्कैंडल से जुड़ी अन्य खबरों के लिए पढ़ें India.com