नई दिल्ली. ऐसे समय में जब भारत में सोशल मीडिया के फेसबुक, वाट्सएप जैसी साइटों पर फैलाई जा रही फर्जी खबरों और सूचनाओं के कारण भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या करने के मामले सामने आ रहे हैं. देश के कई राजनीतिक दल एक पार्टी विशेष पर मॉब-लिंचिंग करने वालों को उकसाने का आरोप लगा रहे हैं. देश के केंद्रीय मंत्रियों द्वारा ऐसी घटनाओं के आरोपियों का सम्मान किए जाने की खबरें आ रही हैं. सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद केंद्र सरकार द्वारा मॉब-लिंचिंग की घटनाओं को रोकने के लिए भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं में संशोधन की बात आ रही है, लंदन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में हुए एक अध्ययन ने सनसनीखेज खुलासा किया है. ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने अपने एक अध्ययन में बताया है कि सोशल मीडिया पर भ्रामक या फर्जी खबरें फैलाने का काम राजनीतिक पार्टियां और सरकारी एजेंसियां कर रही हैं.
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सोशल मीडिया के मंच की आड़ में फैलाते हैं भ्रम
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के अध्ययन के मुताबिक सरकारी एजेंसियां और राजनीतिक पार्टियां फर्जी खबरें फैलाने, सेंशरशिप करने, मीडिया, जनसंस्थानों और विज्ञान में लोगों का विश्वास घटाने के लिए सोशल मीडिया मंचों का दोहन करने के लिए लाखों डॉलर फूंक रहे हैं. विश्व के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में शुमार ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में इस विषय पर अध्ययन करने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि कंप्यूटर आधारित दुष्प्रचार को रोकने की कोशिशों के बावजूद सोशल मीडिया के माध्यम से जनमत को अपने हिसाब से ढालना दुनियाभर में एक गंभीर खतरा के रूप में उभरा है. विश्वविद्यालय की रिपोर्ट में पाया गया है कि यह समस्या पूरी दुनिया में बड़ी तेजी से बढ़ रही है.
फर्जी खबरें फैलाने वाले देशों की संख्या बढ़ी
इस अध्ययन के अनुसार, सोशल मीडिया के जरिए पिछले कुछ वर्षों में फर्जी और भ्रामक खबरें फैलाने वाले देशों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है. रिपोर्ट की सह लेखक समंता ब्रैडशॉ ने कहा, ‘ऐसे देश जहां औपचारिक रूप से सोशल मीडिया में संगठित हेरफेर होता है, उनकी संख्या 28 से बढ़कर 48 हो गई है.’ ब्रैडशॉ ने कहा, ‘इसमें वृद्धि राजनीतिक दलों की वजह से हुई जो चुनाव के दौरान गलत सूचनाएं फैलाते हैं.’ उन्होंने कहा कि ऐसे राजनीतिक दलों की संख्या बढ़ती गई, जिन्होंने ब्रेक्जिट और अमेरिका के 2016 के राष्ट्रपति चुनाव के दौरान की रणनीतियों से सीख ली. प्रचार करने वाले बॉट, फर्जी खबरों और गलत सूचना का इस्तेमाल धुव्रीकरण और मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए कर रहे हैं. ऐसे कई लोकतांत्रिक देशों में इंटरनेट पर फर्जी खबरों का मुकाबला करने के लिए नए कानून बनाए जाने के बाद भी ऐसी स्थिति है.
भारत सरकार भी कानून बनाने पर कर रही विचार
देश में मॉब-लिंचिंग की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए भारत सरकार भी गंभीर है. केंद्र सरकार ऐसी घटनाओं को दंडनीय अपराध के तौर पर परिभाषित करने के लिए भारतीय दंड संहिता यानी आईपीसी में संशोधन की संभावनाओं पर विचार कर रही है. आज राजस्थान के अलवर, कुछ दिन पहले महाराष्ट्र और उससे पहले असम में मॉब-लिंचिंग के कारण कई लोगों की जानें जा चुकी हैं. इन घटनाओं को देखते हुए ही केंद्र सरकार भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दिए जाने के मामलों को रोकने के लिए सख्त कानून लाने पर विचार कर रही है. एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि एक मॉडल कानून का मसौदा तैयार करने के विकल्प पर भी विचार किया जा रहा है, जिसे राज्य सरकारें भीड़ हत्या की घटनाएं रोकने के लिए अपना सकें.
(इनपुट – एजेंसी)
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