देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते दिनों घोषणा की थी कि नेता जी सुभाष चंद्र बोस की जयंती यानी 23 जनवरी को पराक्रम दिवस के रूप में मनाया जाए. तो आज नेताजी की जयंती यानी पराक्रम दिवस है. ऐसे में लाजमी है कि हम नेताजी के बारे में बात करने वाले हैं. कहते हैं कि नेताजी की मौत 1945 के ताइपेई में हुए विमान हादसे में नहीं हुई बल्कि कुछ वर्षों पूर्व ही उनक मौत हुई है. हालांकि इस बात की सत्यता को प्रमाणित करने के लिए और इसे नकारने के लिए दोनों के ही साक्ष्य पब्लिक डोमेन में काफी कम उपलब्ध है. Also Read - जय श्री राम के नारे पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस के परपोते बोले- ऐसा लगा कि ममता बनर्जी को नारे से एलर्जी है

आजाद हिंद फौज पर लिखी कई किताब ‘नेताजी की पराक्रमी सेना’ किताब के 6 पन्नों को लेकर भी विवाद है. क्योंकि इस किताब के इन 6 पन्नों को भारत सरकार द्वारा गोपनीय रखा गया है. गृह मंत्रालय द्वारा इसे जब से गोपनीय घोषित किया गया है तभी से यह किताबों लोगों के बीच नेताजी के जीवन को लेकर चर्चा का विषय बनी हुई है. लोग ऐसा मानते हैं कि इस किताब में नेताजी के विमान हादसे से संबंधित जानकारियां हैं. Also Read - PM Modi News Update: शिवसागर में PM मोदी बोले- ये प्रेम मुझे बार-बार असम ले आता है

कहते हैं कि 18 अगस्त 1945 में नेताजी की मौत ताइपेई में एक विमान दुर्घटना में हो गई थी. हालांकि नेताजी की मौत हमेशा से ही रहस्य और चर्चा का विषय बनी हुई है. क्योंकि मशहूर लेखक अनुज धर व अन्य लेखकों व हिस्ट्री टीवी चैनल पर प्रसारित कुछ शोज के मुताबिक नेताजी की विमान हादसे में मौत हुई ही नहीं थी. क्योंकि ताइपेई में जिस दिन नेताजी के विमान हादसे का जिक्र किया जाता है. उस विमान हादसे का कोई रिकॉर्ड ताइपेई एयरपोर्ट अथॉरिटी के पास नहीं है. उनका कहना है कि उस दिन ऐसा कोई हादसा यही नहीं हुआ था. हालांकि जिन अस्थियों को नेताजी की बताई जाती है उसे लेकर भी विवाद बना हुआ है. Also Read - Parakram Diwas: नेताजी सुभाष चंद्र बोस को पीएम मोदी ने किया नमन, बोले- देश सदा याद रखेगा आपको

तासकंद में जब भारत और पाकिस्तान के बीच समझौता होने जा रहा था. उस दौरान शास्त्री जी ने भारत फोन कर कहा था उनके पास कुछ खास है. हालांकि वे खास बात बता पाते उनकी भी रहस्यमयी तरीके से मौत हो गई. लेकिन तासकंद में हुए संमझौते की एक तस्वीर खूब चर्चा में रहती है जिसमें नेताजी जैसा कोई शास्त्री जी और अन्य अधिकारियों के साथ देखा गया था. हालांकि इसकी पुष्टि अबतक नहीं हो पाई है.

यही नहीं नेताजी की मौत के बाद तीन जांच आयोगों का गठन किया गया था. इन जांच कमेटियों ने अपने रपोर्ट भी सबमिट किए. लेकिन 2 जांच आयोगों ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि नेताजी की मौत विमान हादसे में हुई थी लेकिन 1 जांच आयोग ने बताया दुर्घटना के बाद भी नेताजी जीवित थे. इस कमेटी की अध्यक्षता एमके मुखर्जी कर रहे थे. बता दें कि इस खबर के सामने आने के बाद नेताजी के परिवार में भी दरार पड़ गई थी.

नेताजी की मौत हमेशा से ही चर्चा मे बनी रही है. आए दिन देश के प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखी जाती है कि नेताजी से जुड़े अन्य गोपनीय दस्तावेजों को सार्वजनिक किए जाए. लेकिन भारत सरकार द्वारा साल 2016 में केवल 100 फाइलों को सार्वजनिक किया गया था.