नई दिल्ली. डॉ. अबुल पाकिर जैनुल आब्दीन अब्दुल कलाम यानी डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम (Dr. APJ Abdul Kalam), भारत के उन रत्नों में से एक थे जिनके होने से देश को न सिर्फ वैज्ञानिक जगत का सिरमौर माना गया, बल्कि वे भारत की बौद्धिक चेतना के समृद्ध इतिहास के भी प्रतीक थे. भारत के पूर्व राष्ट्रपति और रक्षा क्षेत्र में मिसाइल कार्यक्रम के जनक के रूप में पहचाने गए डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की आज जयंती है. आज ही के दिन 15 अक्टूबर 1931 को दक्षिण भारत के प्रसिद्ध शिव-तीर्थ रामेश्वरम में भारत के इस अद्भुत वैज्ञानिक का जन्म हुआ था. आर्थिक रूप से कमजोर परिवार में जन्मे कलाम का बचपन अभावों के बीच भले बीता, लेकिन उनके अंदर की नैसर्गिक प्रतिभा का तेज इससे कतई कम न हुआ. बालपन से ही पढ़ने में कुशाग्र बुद्धि के कलाम ने अपनी प्रतिभा की बदौलत ही जीवन में कई ऊंचाइयां हासिल की और देश के सर्वोच्च पद तक पहुंचे. यहां तक पहुंचने में उनके जीवन में जिन व्यक्तित्वों का हाथ रहा, डॉ. कलाम ने ताउम्र उन शख्सियतों को याद रखा और अपनी पुस्तक ‘अदम्य साहस’ में इसके बारे में लिखा. डॉ. कलाम की जयंती पर आइए जानते हैं उन महान लोगों के बारे में जिन्होंने इस देश को मिसाइल-मैन (Missile Man) जैसा नेमत बख्शी. Also Read - इतिहास में आज: पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम का जन्मदिन, नेल्सन मंडेला को नोबेल शांति पुरस्कार की हुई थी घोषणा

डॉ. कलाम की मां
डॉ. कलाम ने अपनी पुस्तक ‘अदम्य साहस’ में बचपन के दिनों को याद करते हुए अपनी मां के बारे में लिखा है. ट्यूशन पढ़ने के बारे में जिक्र करते हुए कलाम ने लिखा है कि मैं अपने शिक्षक श्री स्वामीयर के पास गणित पढ़ने जाता था. इसके लिए मुझे सुबह 4 बजे ही जगना होता था, क्योंकि निःशुल्क ट्यूशन पढ़ाने वाले उस शिक्षक की कठोर शर्त थी कि सभी छात्र स्नान करके सुबह 5 बजे उनकी कक्षा में उपस्थित हो जाएं. कलाम इस रूटीन का पालन कर सकें, इसके लिए उनकी मां उनसे पहले जाग जाती थी और बेटे को ट्यूशन के लिए तैयार कर देती थीं. ट्यूशन के बाद कलाम लौटते और घर से तीन किलोमीटर दूर रामेश्वरम रोड रेलवे स्टेशन पर आने वाला समाचार पत्रों का बंडल लेते, ताकि उसे बेचकर घर की कुछ आय बढ़ा सकें. डॉ. कलाम ने लिखा है, ‘मेरी मां रोज 5 बार नमाज अदा करती थीं. मैंने जब भी उन्हें नमाज अदा करते हुए देखा तब-तब मैं प्रेरित हुआ और अपने अंदर परिवर्तन महसूस किया. Also Read - APJ Abdul Kalam Birthday: All you want to know about India's Missile Man | कलाम को सलाम: देश के ऐसे राष्ट्रपति जिनकी हर बात अमल करने लायक

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भारतरत्न एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी
डॉ. कलाम अपने जीवन में जिन दो महत्वपूर्ण नारियों का जिक्र करते हैं, उनमें पहली तो उनकी मां है और दूसरा स्थान कर्णाटक संगीत की जननी तथा प्रख्यात शास्त्रीय गायिका एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी थीं. डॉ. कलाम ने लिखा है कि उन्होंने वर्ष 1950 में पहली बार तंजौर में सुब्बुलक्ष्मी को एक समारोह में सुना था. इसी समारोह में सुब्बुलक्ष्मी द्वारा त्यागराज कीर्तन के गायन ने डॉ. कलाम पर ऐसा प्रभाव छोड़ा कि उनका मन आनंद और प्रसन्नता से भर उठा. डॉ. कलाम लिखते हैं कि इस गीत को सुनकर उनका तन-मन ऊर्जावन हो गया. गीत का भाव अत्यंत सशक्त था. और फिर वह अदाकारी. मैं जीवन भर के लिए एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी का प्रशंसक बन गया.

डॉ. विक्रम साराभाई
महान वैज्ञानिक डॉ. कलाम को विज्ञान-वेत्ता के रूप में स्थापित करने के पीछे भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के जनक डॉ. विक्रम साराभाई का नाम आता है. डॉ. कलाम ने अपनी पुस्तक में डॉ. साराभाई के बारे में लिखा है, ‘जब भी मैं डॉ. साराभाई के एक पृष्ठ के प्रकल्पना-प्रारूप एवं उसके परिणामों पर विचार करता हूं तो अभिभूत हो उठता हूं. मुझे प्रो. विक्रम साराभाई के साथ सात वर्षों तक कार्य करने का सौभाग्य मिला हुआ है. उनके सान्निध्य में काम करते हुए मैंने भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की कल्पना को सच में रुपांतरित होते देखा था.’ भारत के पहले उपग्रह-प्रक्षेपण और इससे संबंधित यादों के बारे में डॉ. कलाम ने लिखा है कि अगर प्रो. साराभाई जैसे वैज्ञानिक न होते तो भारत कभी इस क्षेत्र में दुनिया का अग्रणी देश नहीं बन पाता.

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प्रो. सतीश धवन
भारतीय विज्ञान संस्थान के शिक्षक और इसरो के भूतपूर्व अध्यक्ष प्रो. सतीश धवन, उन महत्वपूर्ण शख्सियतों में से एक थे जिनकी दूरदृष्टि और सदाशयता से डॉ. कलाम का जीवन प्रभावित हुआ. डॉ. कलाम ने लिखा है, ‘प्रो. सतीश धवन ने देश, विशेषकर युवकों के, सामने नेतृत्व की ऐसी मिसाल रखी जो हमें प्रबंधन की किसी पुस्तक में नहीं मिल सकती. उन्होंने अपने स्वयं के उदाहरण से हमें बहुत कुछ सिखाया. जो सबसे महत्वपूर्ण बात मैंने सीखी वह यह थी कि जब कोई मिशन प्रगति पर हो तो हमेशा कुछ न कुछ समस्याएं या असफलताएं सामने आएंगी ही, किंतु असफलताओं के कारण कार्यक्रम बाधित नहीं होना चाहिए. नेता को उस समस्या पर नियंत्रण रखना होता है. उसका अंत करना होता है और सफलता की दिशा में अपनी टीम का नेतृत्व करना होता है.’