नई दिल्ली: जनसंघ के संस्थापक डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सहयोगी और स्टेनोग्राफर रहे पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का गुरुवा को 93 साल की उम्र में दिल्ली के एम्स में निधन हो गया. अटलजी कुल मिलाकर 47 साल तक भारतीय संसद के सदस्य रहे. Also Read - PM मोदी ने अटल बिहार वाजपेयी को किया नमन, कहा- उन्‍होंने देश को विकास की अभूतपूर्व ऊंचाइयों पर पहुंचाया

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अटलजी उन गिने चुने नेताओं में हैं जो इतने लंबे समय तक सांसद रहे. वह 10 बार लोकसभा और दो बार राज्यसभा के लिये चुने गए. एकमात्र बार वह 1984 में लोकसभा चुनाव हारे थे जब कांग्रेस के माधवराव सिंधिया ने ग्वालियर में उन्हें करीब दो लाख वोटों से शिकस्त दी थी. वाजपेयी ने 10वीं, 11वीं, 12वीं, 13वीं और 14वीं लोकसभा में 1991 से 2009 तक लखनऊ का प्रतिनिधित्व किया था. Also Read - NDA सरकार में मंत्री रहे दिलीप रे कोयला घोटाले में दोषी करार, 14 को सजा सुनाई जाएगी

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लेकिन ये सफर इतना आसान नहीं था. वाजपेयी ने शुरुआती असफलता से घबराकर हार नहीं मानी और लगातार प्रयत्न करते रहे. अटलजी ने 1955 में अपने जीवन का पहला लोकसभा चुनाव लड़ा था लेकिन उसमें वह हार गए थे. दूसरा चुनाव उन्होंने 1957 के लोकसभा चुनाव में लड़ा था.

ये फोटो 15 अगस्त 1999 की है जब वाजपेयी जी दिल्ली के लाल किले पर गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण कर रहे थे.

ये फोटो 15 अगस्त 1999 की है जब वाजपेयी जी दिल्ली के लाल किले पर गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण कर रहे थे.

1957 में अटलजी ने यूपी में तीन सीटों से चुनाव लड़ा था- मथुरा, लखनऊ और बलरामपुर. मथुरा में उनकी जमानत जब्त हो गई थी, लखनऊ में वह दूसरे नंबर पर रहे थे और बलरामपुर से जीतकर संसद पहुंचे थे. अटलजी 33 साल की उम्र में संसद पहुंचे थे.

अटल बिहारी वाजपेयी के साथ केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद.

अटल बिहारी वाजपेयी के साथ केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद.

दूसरी और चौथी लोकसभा के दौरान उन्होंने बलरामपुर का नेतृत्व किया, पांचवीं लोकसभा के लिये वह ग्वालियर से चुने गए जबकि छठीं और सातवीं लोकसभा में उन्होंने नई दिल्ली का प्रतिनिधित्व किया. वाजपेयी 1962 और 1986 में राज्यसभा के लिये निर्वाचित हुए थे. 1977 में जब जनता पार्टी की सरकार बनी थी तब वाजपेयी जी को विदेश मंत्री बनाया गया था और यही वह समय था जब उन्होंने संयुक्त राष्ट्र में जाकर हिंदी में भाषण दिया था. उस समय वाजपेयी जी के इस फैसले की खूब तारीफ हुई थी.

तत्कालीन उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी और विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा के साथ वाजपेयी जी.

तत्कालीन उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी और विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा के साथ वाजपेयी जी.

आपसी अलगाव के चलते 1980 में जनता पार्टी टूट गई और इसी साल भारतीय जनता पार्टी का उदय हुआ. अटलजी बीजेपी के अध्यक्ष बने और संगठन की जिम्मेदारी आडवाणी ने संभाली. पार्टी के स्थापना दिवस पर अटलजी ने नारा दिया – सूरज उगेगा, अंधेरा छंटेगा, कमल खिलेगा. आज वो समय आ भी गया है जब पूरे भारत में बीजेपी का कमल खिल चुका है.

5 मई 2004 को लखनऊ में वोट डालने के बाद वाजपेयी जी.

5 मई 2004 को लखनऊ में वोट डालने के बाद वाजपेयी जी.

मुंबई में पार्टी की एक सभा में दिसंबर 2005 में वाजपेयी ने चुनावी राजनीति से अपने को अलग करने की घोषणा की थी. वह करीब 47 सालों तक सांसद रहे. वाजपेयी 1996 से 2004 के बीच तीन बार प्रधानमंत्री भी रहे. पहली बार 13 दिन के लिये, फिर 1998 और 1999 के बीच 13 महीनों के लिये और फिर 1999 से 2004 तक.

(सभी फोटो: PTI)