क्या है रुद्राक्ष? जिसका वाराणसी में पीएम नरेंद्र मोदी ने किया उद्घाटन

कन्वेंशन सेंटर में ग्रीन रूम भी बनाया गया है. 150 लोगों की क्षमता वाला दो कॉन्फ्रेंस हॉल या गैलरी भी है जो दुनिया के आधुनिकतम उपकरणों से सुसज्जित है.

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वाराणसी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी पहुंच गए हैं. इस दौरान उन्होंने 186 करोड़ की लागत से बने 'रुद्राक्ष' अंतर्राष्ट्रीय सहयोग सम्मेलन केंद्र का उद्घाटन किया. ऐसे में इस कन्वेंशन सेंटर की खासियतों के बारे में आपका जानना बहुत जरूरी है. दुनिया के सबसे प्राचीनतम शहरों में से एक वाराणसी के सिगरा में इस रुद्राक्ष सेंटर को जापान की सहयोग से बनाया गया है. इस सेंटर में इंडोजापान कला और संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी. काशी-क्योटो प्रोग्राम के तहत जापान और भारत की दोस्ती का एक बेमिसाल नमूना है रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर

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क्या है रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर (What Is Rudraksh Convention Center)

शिवलिंग की आकृतिनुमा बना यह कन्वेंशन सेंटर वाराणसी के सिगरा में बना है और इसका नाम वाराणसी शहर के मिजाज के अनुरूप ही है. बता दें कि इस कन्वेंशन सेंटर में स्टील के 108 रुद्राक्ष के दाने भी लगाए गए. सनातन परंपराओं के मुताबिक रुद्राक्ष की माला में 108 दाने होते हैं.

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ऐसे में जितना शानदार यह कन्वेंशन सेंटर है उतनी ही इसकी खूबियां भी हैं. इस कन्वेंशन सेंटर में 120 गाड़ियों की बेसमेंट पार्किंग है. ग्राउंड फ्लोर, प्रथम तल को लेकर हॉल होगा जिसमें वियतनाम से मंगाई गई कुर्सियां हैं और लगभग 1200 लोग एक साथ इस हॉल में बैठ सकते हैं. बता दें कि दिव्यांगो के लिए भी दोनों दरवाजों के पास 6-6 व्हील चेयर्स का इंतजाम किया गया है. वहीं शौचालयों को दिव्यागजनों को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है.

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बता दें कि इसके अलावा इस कन्वेंशन सेंटर में ग्रीन रूम भी बनाया गया है. 150 लोगों की क्षमता वाला दो कॉन्फ्रेंस हॉल या गैलरी भी है जो दुनिया के आधुनिकतम उपकरणों से सुसज्जित है. इन हॉल्स को जरूरत के मुताबिक घटाया या बढ़ाया जा सकता है. बता दें कि रुद्राक्ष को जापान इंटरनेशन कोऑपरेशन एजेंसी ने फंडिंग किया है. इस सेंटर में छोटा जापानी गार्डेन भी बनाया गया है साथ ही 110 किलोवॉट की उर्जा के लिए इसमें सोलर प्लांट भी लगा है. वहीं दीवारों पर लगें ईंट भी ताप रोकने का काम करते हैं साथ ही रुद्राक्ष को वातनुकूलित रखने के लिए इटली के उपकरणों को दीवारों पर लगाया गया है. बता दें कि इसके निर्माण में फ्लाई ऐश का भी इस्तेमाल किया गया है.

बता दें कि रुद्राक्ष में सीसीटीवी का जगह जगह इस्तेमाल किया गया है और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं. बता दें कि इसका निर्माण 10 जुलाई 2018 से शुरू हुआ था. लेकिन अब भारत जापान की सहभागिता और दोस्ती का प्रतीक रुद्राक्ष बनकर तैयार हो चुका है.

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Published Date:July 15, 2021 11:35 AM IST

Updated Date:July 15, 2021 11:37 AM IST

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