प्राइवेट सेक्टर में SC/ST को आरक्षण: मोदी सरकार ने पहली बार की हाईलेवल मीटिंग

अक्टूबर 2006 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भारतीय कॉरपोरेट जगत से अफरमेटिव एक्शन के तहत वंचित सामाजिक समूहों को नौकरियां देने की अपील की थी.

Published date india.com Updated: September 26, 2018 12:13 PM IST
प्राइवेट सेक्टर में SC/ST को आरक्षण: मोदी सरकार ने पहली बार की हाईलेवल मीटिंग

नई दिल्ली: प्राइवेट सेक्टर में एससी-एसटी के लिए आरक्षण पर चल रही बहस के बीच केंद्र की मोदी सरकार ने बहुत बड़ा कदम उठाया है. इस संदर्भ में प्रधानमंत्री कार्यालय ने हाईलेवल मीटिंग की है. इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक प्रधानमंत्री कार्यालय ने पहली बार प्राइवेट सेक्टर में एससी-एसटी के लिए अफरमेटिव एक्शन (रिजर्व्ड जॉब्स) को लेकर मीटिंग की है. अफरमेटिव एक्शन का मतलब प्राइवेट सेक्टर में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए नौकरियां आरक्षित करना है. यह मीटिंग 22 सितंबर को आयोजित हुई थी. मीटिंग में भाग लेने वाले एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को रोजगार देने के लिए निजी क्षेत्र की प्रतिबद्धता पर सवाल उठ रहे थे. अधिकारी ने कहा कि इस दिशा में इंडस्ट्री के प्रयास काफी नहीं हैं.

मोदी सरकार में पहली बैठक

मोदी सरकार के कार्यकाल में यह मीटिंग ऐसे समय में हुई, जब दलित, जाट, मराठा और उच्च जातियां अलग-अलग मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रही हैं. नौकरियों और प्रमोशन में आरक्षण जैसे मुद्दों पर जोरदार बहस चल रही है. यूपीए -1 सरकार के कार्यकाल में अक्टूबर 2006 में, इस विषय पर चर्चा करने के लिए प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय अफरमेटिव एक्शन कमेटी गठित की गई थी. मई 2014 तक इस कमेटी की सात बैठकें हुईं, लेकिन समिति की आठवीं बैठक, पीएमओ के प्रधान सचिव की अध्यक्षता में इस सरकार के तहत पहली बार 22 सितंबर 2018 को आयोजित की गई. सूत्रों का कहना है कि अफरमेटिव एक्शन कमेटी की मीटिंग में होने वाली देरी से सरकार के अंदर ही सवाल उठ रहे थे.

प्राइवेट सेक्टर में एससी/एसटी के लिए रिजर्व जॉब्स यानी अफरमेटिव एक्शन कमेटी में उद्योग कक्षों के प्रमुख शामिल हैं. सूत्रों ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि शनिवार को हुई मीटिंग में भारतीय उद्योग द्वारा कौशल विकास, छात्रवृत्ति के प्रावधान और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए रोजगार के मुद्दे पर चर्चा हुई.

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22 हजार गांवों को गोद लेंगे कॉरपोरेट्स?

टॉप लेवल के एक अधिकारी ने बताया कि कौशल प्रशिक्षण और छात्रवृत्ति के मुद्दे पर बातचीत सही रही, लेकिन डाटा कलेक्शन में गैप है. सही डाटा नहीं होने के कारण निजी क्षेत्र प्रतिबद्धता नहीं दिखा रहे हैं. इस मीटिंग में अधिकारियों ने इंडस्ट्री चैंबर के प्रतिनिधियों से कहा कि सरकार 22 हजार उन गांवों की लिस्ट तैयार कर रही है जहां अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की आबादी ज्यादा है.अधिकारीयों ने बताया कि प्राइवेट सेक्टर इन गांवों को गोद लेंगे और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के युवाओं को स्किल ट्रेनिंग देने के बाद जॉब दिलाएंगे. इस पूरी कवायद का मतलब प्राइवेट सेक्टर में एससी-एसटी को अफरमेटिव एक्शन (रिजर्व्ड जॉब्स) से जोड़ना है.

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अफरमेटिव एक्शन क्या है

अक्टूबर 2006 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भारतीय कॉरपोरेट जगत से अफरमेटिव एक्शन के तहत वंचित सामाजिक समूहों को नौकरियां देने की अपील की थी. प्राइवेट सेक्टर ने निजी क्षेत्र में आरक्षण की मांग की काट के लिए स्वच्छेक तौर पर अफरमेटिव एक्शन की बात की थी. भारतीय कॉरपोरेट जगत की संस्था सीआईआई ने अफरमेटिव एक्शन पर डॉक्यूमेंट जारी कर बताया था कि भारत की सौ कंपनियों ने स्वैच्छिक रूप से अफरमेटिव एक्शन को लागू करने की पहल की है. सीआईआई से जुड़ी 600 से ज्यादा कंपनियों ने एक कोड ऑफ कंडक्ट पर दस्तखत किए थे कि नौकरियां देने में वे कोई भेदभाव नहीं करेंगी. यूपीए सरकार ने स्वैच्छिक अफरमेटिव एक्शन पर एसोचैम और सीआईआई के भरोसा दिलाने के बाद प्राइवेट सेक्टर में एससी/एसटी के रिजर्वेशन को जरूरी बनाने का ख्याल छोड़ दिया था.

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