नई दिल्ली. बिहार के स्कूलों में राष्ट्रपिता के जीवन दर्शन, मूल्य-बोध और उनके प्रमुख कार्यों के बारे में अब बच्चों को प्रारंभिक कक्षाओं से ही पढ़ाया जाएगा. यह व्यवस्था अगले महीने यानी सितंबर से लागू होने वाली है. तीसरी से आठवीं तक की कक्षाओं के बच्चों को ‘बापू की पाती’ नामक किताब से नियमित रूप से एक पाठ पढ़ाया जाएगा. सरकार इस व्यवस्था को राज्य के सभी 71 हजार प्रारंभिक विद्यालयों में लागू करेगी. बता दें कि राज्य में पहले से ही 9वीं से 12वीं कक्षाओं के विद्यार्थियों को गांधी से संबंधित पाठों का अध्ययन कराया जा रहा है. इसके तहत राज्य के 6 हजार हाईस्कूल और प्लसटू स्कूलों में गांधी पाठ की व्यवस्था लागू हो गई है.

सीएम नीतीश कुमार ने की थी शुरुआत
बिहार के प्रमुख अखबार हिन्दुस्तान में छपी खबर के मुताबिक, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पिछले साल 11 अक्टूबर 2017 को राज्य में गांधी कथा वाचन की परंपरा की शुरुआत की थी. सीएम ने ‘मिट्टी से नेता भी बनते हैं’ और ‘च से चंपारण’ नामक दो कहानियों का पाठ कर इसकी शुरुआत की थी. सरकार की योजना के तहत प्रदेश के सभी स्कूलों में प्रार्थना सत्र के दौरान गांधी कथा वाचन किया जाना है. इसके लिए शिक्षा विभाग के जनशिक्षा निदेशालय को, तीसरी से आठवीं कक्षा तक के लिए ‘बापू की पाती’ और 9वीं से 12वीं कक्षा तक के लिए ‘एक था मोहन’ नामक दो किताबें प्रकाशित करानी थी. इसमें से ‘एक था मोहन’ छपकर आ गई है और पिछले दो महीनों से हाईस्कूलों व प्लसटू स्कूलों में इसका पाठन शुरू कर दिया गया है. ‘बापू की पाती’ किताब की 8 लाख प्रतियां अब छपकर आई हैं, जिसकी 10-10 प्रतियां जल्द ही सभी स्कूलों को भेजी जाएगी.

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एक कहानी का 2 दिन पाठ
प्रदेश के स्कूलों में गांधी कथा वाचन कार्यक्रम के तहत व्यवस्था भी बना दी गई है. तय किया गया है कि बच्चे एक कहानी दो दिन पढ़ेंगे. दो दिन के बाद कहानी और इसे पढ़ने वाला समूह बदल जाएगा. जनशिक्षा निदेशालय के अनुसार प्राथमिक स्तर से ही बच्चों को राष्ट्रपिता के कार्यों, उनके जीवन-दर्शन और मूल्य-बोध के बारे में ज्ञान देने के लिए इस परंपरा की शुरुआत की गई है. बच्चों को गांधी कथा वाचन ठीक से कराया जा सके, इसके लिए हर स्कूल के एक-एक शिक्षक को इस बाबत प्रशिक्षण भी दिया जाएगा. हिन्दुस्तान अखबार के अनुसार, बिहार के स्कूलों में इस तरह के पहल की देश के दूसरे राज्यों ने भी तारीफ की है. प्रदेश के जनशिक्षा निदेशक ने अखबार को बताया कि नीति आयोग की बैठक में आए विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने बिहार में किए जा रहे इस प्रयोग की सराहना की.

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‘बापू की पाती’ में क्या पढ़ेंगे बच्चे
हिन्दुस्तान अखबार के मुताबिक, तीसरी से आठवीं कक्षा तक के बच्चों के लिए प्रकाशित ‘बापू की पाती’ किताब में 45 कहानियां हैं. इसकी भाषा इतनी सरल है कि कम उम्र के बच्चे इसे आसानी से पढ़ सकेंगे. इस किताब में हर दूसरे पन्ने पर रंगीन कार्टून बने हुए हैं, ताकि बच्चे शब्दों से ज्यादा, चित्रों की भाषा से बात को समझ सकें. इस किताब को सोपान जोशी ने लिखा है. इसमें महात्मा गांधी के प्रमुख कार्य, विचार, आंदोलनों में उनकी भूमिका और जीवन के अन्य सभी महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला गया है. सरकार का मानना है कि गांधी कथा वाचन की परंपरा से बच्चों को प्रारंभिक स्तर से ही राष्ट्रपिता के बारे में जानकारी मिल सकेगी.