नई दिल्ली. आपराधिक चरित्र या अपराध करने वाले नेताओं को चुनाव लड़ने से रोकने को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी की है. इस नोटिस के जरिए हाईकोर्ट ने पूछा है कि जिन राजनेताओं के ऊपर अपराध में शामिल होने का आरोप है और उन्हें 2 साल से कम की सजा मिली है, उन्हें चुनाव लड़ने के अधिकार से क्यों नहीं वंचित कर देना चाहिए. हाईकोर्ट ने यह नोटिस एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दी है. अदालत ने नोटिस में ऐसे नेताओं को लोकसभा और विधानसभा, दोनों के चुनाव में भाग लेने से रोक लेने का जिक्र किया है.

अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के ज्यूडिशियल क्लर्क गणेश खेमका की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को यह नोटिस जारी किया है. आपको बता दें कि अभी उन्हीं नेताओं को चुनाव लड़ने से रोकने का प्रावधान है, जिन्हें दो साल से ज्यादा की सजा मिलती है. गणेश खेमका ने संविधान के अनुच्छेद 14 के समानता के अधिकार के तहत यह याचिका दायर की है. इस याचिका पर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस अरुण पल्ली ने सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर सवाल पूछा है.

अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, अपनी याचिका में गणेश खेमका ने जनप्रतिनिधि कानू 1951 का हवाला भी दिया है. हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली दो जजों की बेंच ने याचिका पर सुनवाई के दौरान सवाल उठाया कि जनप्रतिनिधि कानून 1951 की धारा 8 (3) के तहत दो साल से कम की सजा पर किसी व्यक्ति को चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता है. लेकिन यह संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन है. जनप्रतिनिधि कानून की यह धारा, एक ही समूह को अलग-अलग वर्गों में बांटती प्रतीत होती है. ऐसे में इस तथ्य की जांच किए जाने की आवश्यकता है.

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस अरुण पल्ली की पीठ ने केंद्र का जवाब आने तक सुनवाई आगे बढ़ा दी. अब इस याचिका पर 6 नवंबर को हाईकोर्ट सुनवाई करेगी. बहरहाल, अगर केंद्र सरकार ने अदालत की इस सलाह पर अमल किया तो देशभर के विभिन्न दलों के नेता इसके लपेटे में आएंगे. अगर केंद्र ने हाईकोर्ट की सलाह से जनप्रतिनिधि कानून की संबंधित धारा में संशोधन किया तो कई नेताओं का चुनाव लड़कर संसद या विधानसभा पहुंचने का सपना खत्म हो सकता है.