PV Narasimha Rao Birth Anniversary: देश के पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव (P. V. Narasimha Rao) का जन्म 28 जून 1921 को वर्तमान तेलंगाना के लेकनेपल्ली में हुआ था. आज उनके जन्म शताब्दी के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए नमन किया. इस दौरान पीएम ने राव को बहुमुखी प्रतिभा का धनी व ज्ञानी बताया. लेकिन नरसिम्हा राव को अक्सर कांग्रेस पर यह आरोप लगते रहे हैं कि नरसिम्हा राव जैसे ज्ञानी प्रधानमंत्री को कांग्रेस भूला बैठी. यही नहीं आज हम उनके जीवन के कई अहम मुद्दों पर बात करेंगे और कई बातें आपको बताएंगे जिनमें नरसिम्हा राव का योगदान रहा है. लेकिन इस बीच पीवी नरसिम्हा राव को काफी आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ा है. हम उनके जीवन के कुछ पहलू के बारे में आज आपको बताएंगे. Also Read - LAC से पीछे हटी चीनी सेना, कांग्रेस बोली- क्या प्रधानमंत्री अब सर्वदलीय बैठक वाला बयान वापस लेंगे और माफी मांगेगे

प्रधानमंत्री बनने का सफर Also Read - एलएनजेपी, राजीव गांधी अस्पतालों में आईसीयू बेड की संख्या बढ़ायी गई: अरविंद केजरीवाल

पीवी नरसिम्हा राव अपने सरकारी बंगले को खाली करवा रहे हैं. अब वो राजनीति से सन्यास लेकर अपने गांव तत्कालीन आंध्रप्रदेश के अपने गांव जाना चाहते है. अब वो वहीं अपनी पढ़ाई लिखाई में समय व्यतीत करना चाहते थे. यह बात है सन 1991 की. लेकिन इस बीच 21 मई को देश में एक दुखद घटना घटी और पीवी नरसिम्हा राव को लेकर एक बड़ा ऐलान किया गया. 21 मई को चेन्नई के श्रीपेराम्बदूर में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) एक जनसभा को संबोधित करने पहुंचे थे. लेकिन यहां आत्मघाती हमले में राजीव गांधी कौ दुखद मौत हो गई. इसके बाद कांग्रेस पार्टी की सभी योजनाएं बदल गईं. राजीव गांधी की मौत के बाद लोकसभा चुनाव हुए. इसमें जो परिणाम आए उसके बाद पीवी नरसिम्हा राव को प्रधानमंत्री के लिए उपयुक्त पाया गया और उन्हें भारत देश का प्रधानमंत्री बना दिया गया. Also Read - लेह अस्पताल में जहां जवानों से मिले पीएम मोदी उसको लेकर उठे सवाल, सेना ने की सबकी बोलती बंद

21 टन सोना का क्या है विवाद

दरअसल जब पीवी नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री बने उस वक्त देश आर्थिक बदहाली से गुजर रहा था. इससे पहले चंद्रशेखर सरकार को देश का सोना बेचना पड़ा था. वहीं अब पीवी नरसिम्हा राव ने 21 टन भारतीय सोने को इंग्लैंड भेज दिया ताकि इसके बदले भारत को विदेशी डॉलर मिल सके. विदेशी डॉलर लेने पीछे पीवी नरसिम्हा राव की मंशा कर्ज की किश्तों में देरी से बचने का था. क्योंकि पैसों का भुगतान डॉलर में ही किया जाना था.

परमाणु बम की शुरुआत

हमें आज यह पता है कि भारत सन 1998 में परमाणु बम से लैस देश बन गया था. क्योंकि पोखरण में अटल बिहारी बाजपेयी सरकार ने इस बम का परीक्षण कर दुनिया को चौंका दिया था. लेकिन क्या आपको पता है कि देश में परमाणु बम और मिसाइलों पर काम किसके राज में शुरू हुआ. पीवी नरसिम्हा राव के राज में ही देश में परमाणु बम और मिसाइलों पर भारत ने काम करना शुरू किया था. हालांकि परीक्षण अटल बिहारी बाजपेयी सरकार में सभी देशों की आंखों में धूल झोंकते हुए सन 1998 में किया गया. बता दें कि पीवी नरसिम्हा राव के शासन में ही पंजाब आतंकवाद का खात्मा हुआ था.

बाबरी ध्वंस पर उठे सवाल

6 दिसंबर 1992 को अयोध्या स्थित बाबरी मस्जिद को ढहा दिया गया था. इसके बाद मस्जिद के ढहाने को लेकर पीवी नरसिम्हा राव को भी जिम्मेदार बताया गया. कई लोगों का मानना है कि नरसिम्हा राव बाबरी मस्जिद ढहाने में सीधे तौर पर तो शामिल नहीं थे लेकिन इस कृत्य में उनकी मौन सहमित जरूर थी. ऐसा इसलिए भी कहा जाता है क्योंकि कार सेवकों को रोकने के लिए केंद्र सरकार यानी पीवी नरसिम्हा राव की सरकार को जो उचित कदम उठाने चाहिए थे वो नहीं उठाए गए थे. देश के कुछ तत्कालीन पत्रकारों की मानें तो उस वक्त नरसिम्हा राव ने सोच समझकर किया जो भी किया. बल्कि इतना तक कहा जाता है कि पूर्व नामी पत्रकार प्रभाष जोशी संघ परिवार और पीवी नरसिम्हा राव की बीच की कड़ी थे.

देश के हित में आर्थिक सुधार

पीवी नरसिम्हा राव ने अपने शासन काल में देश के हित में कई आर्थिक सुधार व बदलाव किए. इसमें सबसे बड़े नाम शेयर मार्केट का है. नरसिम्हा राव ही थें जिन्होंने भारत में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की शुरुआत की थी. उन्होंने लाइसेंस राज और लालफीताशाही पर भी लगाम लगाया. यही नहीं उन्होंने उदारीकरण (Liberalization) नीतियों को मानते हुए विदेशी निवेश को भी आकर्षित करने का काम किया. यही नहीं उनके ही कारण विश्व के कई प्रसिद्ध ब्रांड्स कई बड़ी कंपनियों ने भारत की तरफ मौके तलाशने शुरू किए. यही नहीं इनके राज में उस वक्त की GDP तत्कालीन जीडीपी से भी बेहतर थी. साल 1994 में भारत की जीडीपी 6.7 थी. यही नहीं राव के कार्यकाल में भारत की जीडीपी 8 फीसदी तक भी पहुंची थी.

नरसिम्हा राव पर अपनों ने ही उठाए सवाल

नरसिम्हा राव के काम अब लोगों की आंखों में खटकने लगे थे. इसी कारण अप पार्टी के अदंर ही उनके विरोधी पैदा हो रहे थे. पार्टी के लिए कई लोग नरसिम्हा राव की नीतियों का विरोध करने लगे और आरोप लगाने लगे कि नरसिम्हा राव देश की दिशा गांधी-नेहरू की नीतियों के खिलाफ ले जा रहे हैं. लेकिन आज देश में आर्थिक मामलों, विकास, जीडीपी, विदेशी मुद्रा, विकास जब इन सब मामलों की बात हम करते हैं तो हम भूल जाते हैं कि यह देन पीवी नरसिम्हा राव की थी. उनके राज में काफी कुछ शुरू किया गया और कई चीजों को तेजी दी गई. नरसिम्हा राव की उदारीकरण और नीतियों का कमाल था कि देश की जीडीपी 8 फीसदी तक पहुंची थी.

सोनिया गांधी से क्यों हुए नाराज

दरअसल सोनिया गांधी से पीवी नरसिम्हा राव की निजी नाराजगी तो नहीं थी, लेकिन उनके प्रधानमंत्री पद को लेकर सोनिया गांधी से उनकी नाराजगी शुरू हुई थी. अपने करीबी पत्रकार को एक बार नरसिम्हा राव ने बताया था कि वो कई बार सोनिया गांधी को जब फोन करते तो वह उन्हें काफी देर तक होल्ड पर रुकना पड़ता. यही नहीं जब वह उनसे मिलने जाते तो सोनिया गांधी उनसे काफी इंतजार भी करवाती थीं. बस फिर क्या था यहीं से पीवी नरसिम्हा राव के रास्ते सोनिया गांधी से अलग हो गए थे. इस बाबत उन्होंने करीबी पत्रकार से कहा था कि नरसिम्हा राव तो फोन पर सोनिया गांधी का इंतजार कर सकते हैं. लेकिन प्रधानमंत्री इंतजार नहीं कर सकते हैं. अगर प्रधानमंत्री को सोनिया गांधी के फोन पर इंतजार करना पड़े तो यह प्रधानमंत्री के पद और ओहदे का अपमान होगा. इसी कारण नरसिम्हा राव कांग्रेस परिवार के मुखियाओं से दूर होते हैं और लोगों की आंखों में नासूर भी बनते गए. इसके बाद सोनिया गांधी के समर्थकों को यह लगने लगा कि नरसिम्हा राव जानबूझकर नेहरू-गाधी परिवार और उनके करीबियों को हाशिए पर ले जाना चाहते हैं और इसी ओर वह लागातार काम भी कर रहे हैं.

कई महिलाओं से संबंध और भ्रष्टाचार का संगीन आरोप

नरसिम्हा राव के उपर कई महिलाओं से संबंध रखने का आरोप भी लग चुका है. राव पर अल्पमत वाली सरकार को बनाए रखने के लिए सांसदों को मोटा पैसा देने का भी आरोप लगा था. इस दौरान इनपर कई भ्रष्टाचार के संगीन आरोप भी लगे. लंदर के अचार व्यापारी ने भी खुलकर राव पर भ्रष्टाचार करने का आरोप लगाया था. यही नहीं यह मामला कोर्ट तक भी पहुंचा साथ ही चंद्रा स्वामी के साथ रिश्तों को लेकर भी उनपर कई उंगलियां उठ चुकी हैं. भारतीय स्टोकब्रोकर हर्षद मेहता ने भी उनपर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था.

कांग्रेस का कलंक, शव को नहीं दिया मुख्यालय में स्थान

कांग्रेस अध्यक्ष पद छोड़े जाने के बाद नरसिम्हा राव को पार्टी में किनारे कर दिया गया था. इस दौरान एक पूर्व प्रधानमंत्री को जो सम्मान दिया जाना चाहिए था पार्टी में उन्हें कभी नहीं दिया गया. राव का निधन 23 दिसंबर 2004 में दिल का दौरा पड़ने से हुआ (P. V. Narasimha Rao Death). इसके बाद पार्टी और नेहरू-गांधी परिवार पर यह आरोप लगने लगे कि पीवी नरसिम्हा राव की निधन के बाद उनके पार्थिव शरीर को कांग्रेस मुख्यालय तक में जगह नहीं दी गई. जैसे बाकी बड़े नेताओं के शव को पार्टी कार्यालय में रखा जाता है. इस तरह पीवी नरसिम्हा राव के शव को ना ही पार्टी मुख्यालय में रखा गया और ना ही दिल्ली में उनके निधन के बाद पार्टी कार्यालय में उनके स्मारक को जगह दी गई.

पीवी नरसिम्हा राव को क्यों कहते हैं ज्ञानी

आपको बता दें वास्तव में पीवी नरसिम्हा राव एक ज्ञानी व्यक्ति थें. क्योंकि उन्हें 17 भाषाओं में महारथ हासिल थी. एक आम आदमी के लिए इतनी भाषाओं का ज्ञान असंभव है. उन्होंने 60 साल की उम्र में कंप्यूटर कोड बनाया था. यही नहीं उन्हें कंप्यूटर्स की दो भाषाओं का भी ज्ञान था. इन लैग्वेज में उन्होंने स्नातकोत्तर की पढ़ाई की थी.