Rahat Indori Death Anniversary: 'मोहब्बत करने वाला जा रहा है...' वो इंसान जो पेंटर बनते बनते बन गया आवाम का शायर

Rahat Indori Death Anniversary: हिंदुस्तान का एक ऐसा शायर जिसने अपने लहजे से हर उम्र की धड़कनों पर राज किया.

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Rahat Indori Death Anniversary: 'मोहब्बत करने वाला जा रहा है'... शायरी ज़िंदगी की ज़बान होती है और इस ज़िंदगी के कई रंग होते हैं. जब हर रंग एक साथ नज़र आ जाए तो उसे राहत इंदौरी कहना गलत नही होगा. हिंदुस्तान का एक ऐसा शायर जिसने अपने लहजे से हर उम्र की धड़कनों पर राज किया. एक ऐसा मकबूल कलमकार जिसकी शायरी ने पूरी दुनिया पर हुकूमत की. आज उन्हें दुनिया से गुज़रे एक साल हो गए हैं. पिछले साल आज के ही दिन शायरी, अदब और साहित्य का एक सितारा हमेशा के लिए हम सब की आंखों से ओझल हो गया.

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फोटो राहत इंदौरी के फेसबुक पेज से ली गई है.

राहत साहब आज भले ही इस दुनिया में नही हैं मगर हर महफ़िल में वो ज़िंदा रहे हैं और ज़िंदा रहेंगे. 1 जनवरी 1950 को कपड़ा मिल के कर्मचारी रफ्तुल्लाह कुरैशी और मकबूल उन निशा बेगम के यहाँ जन्म लेने वाले राहत साहब को पेंटिंग का खूब शौक था. घर की माली हालत ज़्यादा ठीक नही होने की वजह से उन्होंने अपने ही शहर में एक साइन-चित्रकार के रूप में 10 साल से भी कम उम्र में काम करना शुरू कर दिया था.चित्रकारी में बचपन से ही उस्ताद रहे राहत साहब ने बहुत कम वक्त में इस लाइन में अपना नाम बना लिया था.

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बताया जाता है कि ग्राहक राहत साहब द्वारा बनाए गए साइन बोर्ड को पाने के लिए महीनों तक इंतज़ार किया करते थे. पेंट ब्रश थामने वाले राहत ने जब कलम उठाई तब एक नया इतिहास लिखा जा चुका था. मुशायरे और कवि सम्मेलन की दुनिया में अपनी कई रातों को आबाद करने वाले राहत इंदौरी धीरे धीरे आवाम के शायर बन गए.

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बॉलीवुड की चमचमाती हुई दुनिया में भी राहत साहब ने अपने गानों से रौशनी फैलाई है. उनके गीतों को 11 से अधिक ब्लॉकबस्टर बॉलीवुड फिल्मों में इस्तेमाल किया गया. रात क्या मांगे एक सितारा (फिल्म- खुद्दार), दिल को हज़ार बार रोका (फ़िल्म- मर्डर), एम बोले तो मैं मास्टर (फ़िल्म- मुन्नाभाई एमबीबीएस), धुंआ धुंआ (फ़िल्म- मिशन कश्मीर), ये रिश्ता क्या कहलाता है (फ़िल्म- मीनाक्षी), चोरी-चोरी जब नज़रें मिलीं (फ़िल्म- करीब) जैसे कई गानों के ज़रिए राहत साहब की मौजूदगी रहेगी.

अदबी दुनिया के इस बेबाक शायर ने जहां एक तरफ मोहब्बत, हिज्र, विसाल, ख़ल्वत जैसे एहसासों को आवाज़ दी वहीं दूसरी तरफ उन्होंने अपनी शायरी से ज़िंदगी, हुकूमत और मुल्क को भी कटघरे में खड़ा कर दिया. राहत साहब के चले जाने से हर इंसान के अंदर से थोड़ा थोड़ा कुछ न कुछ ज़रूर चला गया है. हम आज नम आंखों से उन्हें खिराज़ ए अक़ीदत पेश करते हैं.

'ये हादसा तो किसी दिन गुज़रने वाला था, मैं बच भी जाता तो एक रोज़ मरने वाला था'

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Published Date:August 11, 2021 3:42 PM IST

Updated Date:August 11, 2021 3:42 PM IST

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