Rajya Sabha Election Full Process: हमारे देश को चलाने वाले लोकतंत्र में लोकसभा और राज्यसभा इन दोनों सदनों के विशेष योगदान है. राज्यसभा पहला सदन व ऊपरी सदन माना जाता है. वहीं लोकसभा को नीचला सदन कहा जाता है. लोकसभा चुनावों के बारे में तो हमे मालूम है कि हर 5 साल में एक बार होता है. साथ लोकसभा सांसदों को जनता सीधे तौर पर वोटकर सदन में बिठाती है. लेकिन क्या राज्यसभा चुनावों की प्रक्रिया के बारे में आपको किसी प्रकार की जानकारी है. बता दें कि राज्यसभा चुनावों में विधायकों के वोट को अहम माना जाता है क्योंकि राज्यसभा सांसदों का चयन राज्यों के विधायकों को ही करना होता है. राज्यसभा चुनावों की सरगर्मी इन दिनों देश में फिर से तेज हो चुकी है.लेकिन हम आपको बताएंगे कि आखिर राज्यसभा चुनाव होते कैसे हैं और कौन इसमें वोट करता है. हम आपको आज पूरी प्रक्रिया बताने वाले हैं. Also Read - गुजरात: राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस छोड़ने वाले पांच पूर्व विधायकों ने थामा भाजपा का दामन

राज्यसभा क्या है? Also Read - Rajya Sabha Elections 2020: झारखंड में झामुमो के शिबू सोरेन और भाजपा के दीपक प्रकाश ने राज्य सभा का चुनाव जीता

देश में राज्यसभा का गठन 23 अगस्त 1954 को किया गया था. इसके निर्माण के पीछे एक और सदन की जरूरत है. इसकी जरूरत देश में पहले लोकसभा चुनावों के बाद महसूस हुई. राज्यसभा को भंग नहीं किया जा सकता क्योंकि यह एक स्थाई सदन है. राज्यसभा के सदस्यों का कार्यकाल लोकसभा के सदस्यों की अपेक्षा 6 साल का होता है. अगर राज्यसभा में सदस्यों की बात करें तो संविधान के अनुच्छेद 80 के मुताबिक राज्यसभा में कुल 250 सदस्य हो सकते हैं. इनमें से 12 सदस्यों को राष्ट्रपति द्वारा नामित किया जाता है. बाकि 238 सदस्य राज्य व केंद्र शासित प्रदेशों से चुने जाते हैं. राष्ट्रपति द्वारा नामित किए गए 12 सदस्य किसी खास क्षेत्र में उपलब्धि के आधार पर तय किए जाते हैं. ये सदस्य कला, संगीत, खेल इत्यादि कई क्षेत्रों से हो सकते हैं. Also Read - Rajya Sabha Elections 2020: वाईएसआर कांग्रेस ने आंध्र प्रदेश की सभी चार राज्यसभा सीटों पर हासिल की जीत

वोटिंग और चुनावी प्रक्रिया

राज्यसभा चुनावों को ‘इनडायरेक्ट इलेक्शन’ भी कहा जाता है. क्योंकि यहां जनता सीधे तौर पर राज्यसभा सांसदों का चयन नहीं करती है. बल्कि यहां राज्यसभा सांसदों का चयन विधायक (MLA) करते हैं. इस प्रक्रिया में विधान परिषद के सदस्य भाग नहीं लेते हैं. वहीं अगर चयन प्रक्रिया की बात करें तो यह थोड़ा टेढ़ा है. यहां +1 सीट को आपको ध्यान में रखना होगा तभी इस प्रक्रिया को आसानी से समझा जा सकता है. उत्तर प्रदेश में 31 राज्यसभा सीटें हैं जोकि सबसे ज्यादा है. अब 31 राज्यसभा सीटों में 1 सीट को हमें जोड़ना होगा. इसके बाद यह संख्या 32 हो जाती है. अब 32 सीटों को विधानसभा की कुल 403 सीटों से भाग (divide) देना होगा. इसके बाद जो नतीजे आएंगे, उसमें पुन: 1 जोड़ना होगा. अब आपका बता दें कि परिणाम जितना आएगा आपको राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए उतने ही विधायकों के वोटों की आवश्यकता होगी. अब अगर सीट कम होती हो तो आपको इसमें भी एक जोड़कर हिसाब करना होगा.

कैसे तय की जाती हैं राज्यसभा की सीटें

संविधान के अनुच्छेध 4 के मुताबिक राज्य या किसी केंद्रशासित में राज्यसभा की सीटों का चयन उसकी आबादी के आधार पर किया जाएगा. जिस जगह जितनी आबादी वहां उतनी ही अधिक राज्यसभा की सीटें. वर्तमान की बात करें तो राज्यसभा में कुल 245 राज्यसभा सांसद हैं. क्योंकि अंडमान निकोबार, चंडीगढ़, दमन-दीव, दादर और नगर हवेली, लक्षद्वीप के प्रतिनिधि राज्यसभा में नहीं है.

चुनाव कब होता है?

राज्यसभा का चुनाव हर दो साल में होता है. क्योंकि हर दो साल बाद राज्यसभा के एक तिहाई सदस्यों का कार्यकाल भी पूरा हो जाता है. इस कारण खाली सीटों पर दोबारा चुनाव कराए जाते हैं. बता दें कि इस साल 2020 में कुल 55 सीटों पर चुनाव होने वाले हैं.

वोटिंग विधायकों के हाथ

अब आते हैं इस टॉपिक के सबसे अहम मुद्दे पर. आपको बता दें कि जो विधायक वोटिंग करते हैं वो सभी सीटों के लिए नहीं होते हैं. उनके वोट को केवल एक बार ही गिना जाता है. इसलिए वे हर सीट पर अपने मतदान नहीं कर सकते हैं. इस कारण उन्हें अपनी वोट के लिए प्राथमिकता तय करना होता है. इसी आधार पर वो अपना एक मत देते हैं. मतदान के दौरान उन्हें यह बताना होता है कि उनकी पसंद की लिस्ट में पहले दूसरे व अन्य स्थान पर कौन कौन हैं. ऐसे में जिस उम्मीदवार को ज्यादा वोट मिलते हैं उसे विजेता घोषित कर दिया जाता है.